डीएनए एक्सप्लेनर
US-Isreal Iran War: ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है. जिसकी वजह से भारत में तेल का संकट मंडराने लगा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध की वजह से दुनियाभर में तेल का संकट गहरा गया है. इसमें भारत भी शामिल है. ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर कब्जा कर लिया है. इसी रास्ते से भारत का लगभग 60% कच्चा तेल आता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास फिलहाल करीब 25 दिन का कच्चे तेल का भंडार बचा है, अगर इससे लंबा युद्ध खिंचता है तो देश में तेल की समस्या पैदा हो सकती है. ऐसे में भारत का पुराना 'दोस्त' रूस संकटमोचक बनकर सामने आया है.
इंटरफैक्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस के प्राइम मिनिस्टर अलेक्जेंडर नोवाक ने बुधवार को कहा कि हम चीन और भारत को तेल सप्लाई बढ़ाने के लिए तैयार हैं. रूस ने यह ऐलान ऐसे समय किया है जब ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि स्ट्रेटेजिक वॉटरवे (होर्मुज जलडमरूमध्य) पर पूरी तरह उसने कब्जा कर लिया है. यह दुनिया भर के तेल और गैस शिपमेंट का चोकपाइंट माना जाता है.
इराक, सऊदी अरब, कुवैत, कतर और UAE जैसे खाड़ी देशों से स्ट्रेटेजिक वॉटरवे के रास्ते ही भारत, जापान, चीन, दक्षिण कोरिया समेत तमाम देशों का कच्चा तेल आता है. IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर किसी भी देश का जहाज इस रास्ते से गुजरा तो उसको ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स का सामना करना पड़ेगा.
रूस के बाद भारत सबसे ज्यादा क्रूड ऑयल इन खाड़ी के देशों से ही खरीदता है. इनमें इराक से लगभग 20-23%, सऊदी अरब से 16-18% और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से (10-12%) शामिल है.
रूस से भारत कुल आयात का लगभग 35 से 40% खरीदता था. यानी रोजाना लगभग 20 लाख बैरल आयात कर रहा था, लेकिन जनवरी में घटकर 11.6 लाख बैरल रह गया. इसकी वजह डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाया गया टैरिफ था. ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर उसने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया तो वह उसके सामान के निर्यात पर 18 से 25 फीसदी टैरिफ लगाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि भारत को बेचे गए तेल के पैसे से रूस, यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल करता है.
ट्रंप ने 2 फरवरी को भारत के साथ एक व्यापार समझौते की घोषणा की थी. जिसके तहत उन्होंने दावा किया था कि भारत, रूस से तेल खरीदना बंद करेगा. उसकी जगह अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदेगा. भारत के इस कदम पर रूस की प्रतिक्रिया आई थी. उसने कहा था कि भारत को अपने हित के बारे में सोचना चाहिए, उसे किसी के दबाव में नहीं आना चाहिए.
भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध कुछ साल से नहीं हैं, बल्कि सोवियत संघ के दौर से हैं. भारत ने 1950 के दशक में सोवियत संघ के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे. तब दोनों देशों के बीच 1971 में मैत्री संधि हुई थी. यह संधि रूस-भारत के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव बनी. 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भी भारत ने रूस के साथ संबंधों जारी रखा. 1994 में भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी समझौता हुआ और 2000 में दोनों देशों ने "विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी" स्थापित की.
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