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वर्टिकल लिफ्ट, 5 मिनट में 17 मीटर उठेगा ऊपर... रामेश्वरम में 111 साल बाद बना न्यू पंबन ब्रिज क्यों है खास?

New Pamban Bridge: दक्षिण भारत में रामेश्वर को जोड़ने वाला पंबन ब्रिज पहली बार 1914 में बनाया गया था. यह ब्रिटिश काल में बनाया गया भारत का पहला समुद्री पुल था.

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वर्टिकल लिफ्ट, 5 मिनट में 17 मीटर उठेगा ऊपर... रामेश्वरम में 111 साल बाद बना न्यू पंबन ब्रिज क्यों है खास?

New Pamban Bridge

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को तमिलनाडु के रामेश्वर में हाईटेक न्यू पंबन ब्रिज (New Pamban Bridge) का उद्घाटन किया. यह देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज है, जो तमिलनाडु के मंडपम रेलवे स्टेशन को रामेश्वर रेलवे स्टेशन से जोड़ेगा. पीएम मोदी ने कहा कि इस ब्रिज से रेलवे यातायात में आवागमन आसान होगा और इससे रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे.

नए पंबन ब्रिज का निर्माण आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बनाया गया है. इसकी खास बात यह है कि इसमें वर्टिकल लिफ्ट लगाई गई है, जिसे एक तरफ से 17 मीटर ऊपर तक उठाया जा सकता है, ताकि जहाज पुल के नीचे से आसानी से गुजर सकें. न्यू पंबन ब्रिज की लिफ्ट खुलने में 5.30 मिनट लगेंगे, जबकि पुराने ब्रिज की स्विंग खुलने में 35 से 40 मिनट का समय लगता था.

ब्रिज बनाने में कितनी आई लागत?

समुद्र के ऊपर इस हाईटेक ब्रिज को बनाने में 550 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत आई. इसकी कुल लंबाई 2.08 किलोमीटर है. ब्रिज का लिफ्टिंग का हिस्सा 72.5 मीटर लंबा है. जिसे 17 मीटर ऊपर उठाया जा सकता है. इसमें  99 स्पैन लगाए गए हैं. ब्रिज की मजबूती के लिए स्टेनलेस स्टील, विशेष सुरक्षात्मक पेंट और वेल्डेड जोड़ का इस्तेमाल किया गया है.

111 साल बाद नए रूप में तैयार

दक्षिण भारत में रामेश्वर को जोड़ने वाला पंबन ब्रिज पहली बार 1914 में बनाया गया था. ब्रिटिश काल में बनाया गया यह भारत का पहला समुद्री पुल था. 100 साल तक तो यह ठीक से काम करता रहा, लेकिन समुद्र की उठती लहरों ने उसे जर्जर कर दिया और 2022 में हालत ऐसी हो गई कि इसे बंद करना पड़ा. लेकिन इसके बाद केंद्र सरकार ने इसे बनाने का फैसला किया और 111 साल बाद फिर से नए रूप में बनकर तैयार हो गया. 

देश का पहला वर्रिटकल लिफ्ट ब्रिज न सिर्फ समुद्र के दो किनारों को जोड़ता है, बल्कि सपनों और संभावनों को भी जोड़ता है. यह ब्रिज पुराने ब्रिज के मुकाबले 3 मीटर ऊंचा है. इसपर वाहनों की आवाजाही आसानी हो सकेगी. हालांकि, 58 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज हवा चलने पर ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही रोक दी जाएगी.

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