डीएनए एक्सप्लेनर
Onion Prices: देश में प्याज की कीमते 80 फीसदी तक बढ़ी है, जबकि उत्पादन, खपत से ज्यादा हुआ है. ऐसे में आइए जानते हैं देश में कितनी प्याज की खपत है और इस साल कितना उत्पान हुआ है, दाम कब कम होंगे.
Onion Prices: दिल्ली, चेन्नई, भोपाल और लखनऊ समेत देश के कई शहरों में प्याज के दाम 60 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गए हैं. बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े शहरों में सीधे प्याज की बिक्री शुरू करने के साथ-साथ 'कांदा एक्सप्रेस के जरिए प्याज की सप्लाई बढ़ा रही है. देश में प्याज का उत्पादन खपत से काफी ज्यादा है, तो कीमतें इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही हैं? आइए जानते हैं कि इसके बारे में विस्तार से.
केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2024-25 में देश भारत में 307.67 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ था. इस साल करीब 307.37 लाख मीट्रिक टन प्याज का उत्पादन हुआ. हर साल देश में करीब 200 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है. अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब देश में प्याज का उत्पादन खपत से ज्यादा है, तो दाम क्यों बढ़ रहे हैं.
देश में प्याज की तीन फसलें होती हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण रबी प्याज की फसल है, जो कुल उत्पादन का करीब 70 फीसदी हिस्सा देती है. मार्च से मई के बीच तैयार होने वाली इस फसल को करीब 4-5 महीने तक स्टोर किया जा सकता है.
इसके अलावा खरीफ प्याज कुल उत्पादन में इसकी करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी है और लेट-खरीफ प्याज, इसका कुल उप्तादन में करीब 10 फीसदी का योगदान है. इन दोनों फसलों को लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जा सकता है.
देश में हर महीने करीब 17 लाख मीट्रिक टन प्याज की खपत होती है. मांग पूरे साल बनी रहती है, लेकिन प्याज की उपलब्धता मौसम और फसल के हिसाब से सप्लाई एक जैसी नहीं रहती है. मई-जून से अक्टूबर-नवंबर के बीच बाजार की सप्लाई काफी हद तक रबी की फसल और उसके स्टोरेज पर निर्भर रहती है.
रबी प्याज की बुआई, रोपाई और कटाई के दौरान बारिश, सूखा या अन्य मौसम संबंधी घटनाएं फसल को प्रभावित करती हैं. अच्छी पैदावार होने के बावजूद किसानों के सामने प्याज को सुरक्षित रखने की चुनौती रहती है.
बड़ी संख्या में किसान अभी भी प्याज को आधुनिक कोल्ड स्टोरेज के बजाय पारंपरिक हवादार शेड में रखते हैं. लंबे समय तक ऐसे प्याज को रखने के दौरान वह सड़ने और खराब होने लगते हैं. खराब मौसम की स्थिति में यह नुकसान और बढ़ सकता है.
महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है और देश के कुल उत्पादन में इसका हिस्सा करीब 40 फीसदी है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार किसानों का कहना है कि अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश ने उत्पादन के साथ-साथ प्याज की गुणवत्ता और स्टोरेज को काफी हद तक प्रभावित किया, जो दाम बढ़ने का एक कारण है.
प्याज की कीमतों में तेजी की एक वजह जमाखोरी और कालाबाजारी भी मानी जा रही है. अगस्त से नवंबर के बीच कुछ कारोबारी बाजार में सप्लाई कम करके कीमत बढ़ने का इंतजार करते हैं और बाद में ऊंचे दाम पर प्याज बेचते हैं.
कंपटीशन कमीशन ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कीमतों के बीच बड़े अंतर की ओर इशारा किया गया था. इसमें किसानों से करीब 34 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी गई प्याज के उपभोक्ताओं तक करीब 80 रुपये प्रति किलो पहुंचने का उदाहरण दिया गया था.
प्याज के बाजार में कोबवेब साइकल' यानी मकड़जाल चक्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. किसान अक्सर पिछले सीजन की कीमतों को देखकर अगले सीजन में बुवाई का फैसला करते हैं.
अगर पिछले साल प्याज की कीमतें बहुत कम रहीं, तो किसान अगले साल प्याज की खेती कम करते हैं. इससे बाजार में सप्लाई घटती है और कीमतें बढ़ जाती हैं. इसके बाद बढ़े दाम को देखकर किसान अगले सीजन में ज्यादा प्याज की खेती करते हैं. सभी किसानों के ज्यादा उत्पादन करने पर बाजार में सप्लाई बढ़ जाती है और कीमतें फिर गिरने लगती हैं.
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट की अनुसार एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगांव एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) के डायरेक्टर जायदत्ता होल्कर ने बताया कि पिछले 4-5 महीनों में प्याज के दाम दोगुने हो गए हैं. अभी मंडी में प्याज की आवक कम है. ऐसे में कीमतें कुछ और सप्ताह तक ज्यादा बनी रह सकती है.
उन्होंने बताया कि खरीफ प्याज की फसल अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से मंडियों में आना शुरू हो जाता है. इससे बाजार में सप्लाई बढ़ने पर कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद रहती है.
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने दिल्ली-NCR में NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडारों के माध्यम से प्याज 35 रुपये प्रति किलो की सब्सिडी वाली कीमत पर बेचने की शुरुआत की है. तमिलनाडु, बिहार और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के ज्यादा खपत वाले शहरों में भी ऐसी बिक्री बढ़ाने की योजना है.
केंद्र सरकार ने नासिक के सरकारी स्टोरेज सेंटरों से देश के बड़े शहरों तक प्याज पहुंचाने के लिए 'कांदा एक्सप्रेस' नाम से विशेष मालगाड़ियों का संचालन शुरू किया है. 28 अगस्त को कांदा एक्सप्रेस के जरिए दिल्ली में 453.65 टन प्याज पहुंचाई गई. इसके बाद 31 अगस्त को चेन्नई में 840 टन प्याज पहुंचाई गई. NAFED और NCCF सड़क मार्ग से भी कई शहरों में करीब 1000 टन प्याज भेजे हैं.