Advertisement

क्या बंद होने वाली है कोटा फैक्ट्री है? पिछले सालों के मुकाबले 40-50 फीसदी कम एडिमशन, क्यों नहीं आना चाहते छात्र

कोटा में एडमिशन लेना छात्रों का बड़ा सपना होता है. लेकिन पहले के मुकाबले यहां छात्र कम होते जा रहे हैं.

Latest News
क्या बंद होने वाली है कोटा फैक्ट्री है? पिछले सालों के मुकाबले 40-50 फीसदी कम एडिमशन, क्यों नहीं आना चाहते छात्र
Add DNA as a Preferred Source

कोटा राजस्थान का वो शहर है जहां लाकों लोग आंखों में सपने लिए यहां पहुंचते हैं. लाखों बच्चे हर साल यहां एडमिशन लेने पहुंचते हैं. लेकिन हाल ही में पिछले साल के मुकाबले यहां छात्रों के एडमिशन में 40-50 फीसदी कमी दर्ज की गई है. 56-वर्षीय महावीर सिंह सालों से कोटा के व्यस्त इलाकों में ऑटो-रिक्शा चला रहे हैं. उनके लिए दोपहर 1:30 बजे के बाद से शुरू होने वाला समय एक समय में सबसे व्यस्त समय हुआ करता था. लेकिन, उनका कहना है कि अब कोटा पहले जैसा नहीं रहा. इस साल कुछ अलग है. सड़कें शांत हैं, कोचिंग सेंटरों में बहुत कम स्टूडेंट्स हैं, कई हॉस्टल खाली हैं और मेस मालिक अपना गुजारा चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. यहां तक ​​कि रियल एस्टेट का बिजनेस जो कभी तेजी से बढ़ रहा था वो भी धीमा पड़ रहा है.

खाली हो रहीं कोटा की गलियां 

महावीर, कोरल पार्क इलाके में अपने भरी ऑटो-रिक्शा को याद करते हैं, 'पिछले साल ही, मुझे आराम करने का एक पल भी नहीं मिला था. मैं बिना ब्रेक के पूरे दिन गाड़ी चलाता था, लेकिन अब मुझे पहले जितने ग्राहक नहीं मिल रहे हैं. कमाई भी आधी हो गई है. हमारा परिवार बच्चों पर निर्भर है. अगर वो यहां आना बंद कर देंगे, तो हम जिंदा कैसे रहेंगे?'

महामारी में ऑनलाइन एजुकेशन में बढ़ोतरी 

कोविड-19 महामारी के कारण दो साल तक पूरी तरह बंद रहने के बाद, कोटा में 2022 में दाखिलों में अचानक वृद्धि देखी गई, उस साल देश भर से 2,00,000 से अधिक एस्पिरेंट्स दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के इश शहर में दाखिला लेने पहुंचे. 

टीचर्स ने बताया कि महामारी के दौरान, बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों का मूल्यांकन काफी हल्का किया गया, जिसके कारण आईआईटी या मेडिकल कॉलेज में सीट पाने की उम्मीद में उनमें से काफी संख्या में छात्र कोटा आए. लेकिन इसके बाद कोविड-महामारी और लॉकडाउन ने भारत में एक प्रणाली को जन्म दिया, जिसका नाम है ऑनलाइन एजुकेशन. शिक्षकों का मानना ​​है कि ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म के आने से पारंपरिक कोचिंग मॉडल पर काफी बढ़ा असर पड़ा है. फिजिक्स वाला और अनएकेडमी सहित कई प्लेटफॉर्म ने कई फैकल्टी मेंबर्स के साथ ऑनलाइन कोर्स तैयार करना शुरू कर दिया और क्लास शुरू कीं जो या तो मुफ्त थे या मामूली कीमत पर उपलब्ध थे. ऐसे में सुविधा को देखते हुए छात्रों का रुख ऑनलाइन क्लास की तरफ ज्यादा हो गया. 

ये भी पढ़ें-प्यार, धोखा-मर्डर! दिल्ली, मेरठ से लेकर जयपुर तक बर्बरता की दास्तान, दिल दहला देने वाली मोहब्बत की खौफनाक कहानियां

कोटा बन रहा सुसाइड सिटी 

हाल ही में रिपोर्ट्स में दावा किया गया गया है कि शहर के छात्र मेंटल प्रेशर फील करते हैं, जिसकी वजह से आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं. राजीव नगर में अपने दफ्तर में बैठे नवीन मित्तल ने कहा, 'अगर आप NCRB के डेटा और अन्य संगठनों के आंकड़ों को देखें, तो पाएंगे कि कोटा छात्रों की आत्महत्या के मामले में शीर्ष 50 शहरों में भी नहीं है. फिर भी, पिछले दो साल में हमारे शहर की नेगेटिव इमेज ने माता-पिता के बीच भय पैदा कर दिया है, जिससे वह अपने बच्चों को यहां भेजने से हिचक रहे हैं.' साथ ही, 'आप मुझे बताइए, प्रेशर कहां नहीं है? हज़ारों लोगों के सामने खेलने वाला क्रिकेटर भी दबाव का अनुभव करता है. यह सिर्फ कोटा तक सीमित नहीं है.'

आधिकारिक डेटा के अनुसार, पिछले साल कोटा में 28 बच्चों ने अपनी जान ली थी और इस साल अब तक 13 मामले सामने आ चुके हैं. आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या ने राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया, जिसके कारण छात्रों को दबाव और तनाव से निपटने में मदद करने के उद्देश्य से कई पहल की गईं. इनमें 24/7 हेल्पलाइन, काउंसलिंग, रविवार को 'फन-डे' घोषित करना और छत के पंखों पर स्प्रिंग डिवाइस लगाना शामिल है, जिन्हें 'एंटी-सुसाइड' डिवाइस कहा जाता है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगलफेसबुकxइंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement