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रूस-यूक्रेन जंग से मिली सीख... TATA और NIBE के साथ भारतीय सेना का बड़ा सौदा, जानें 840 नए अटैक ड्रोन्स की क्या है ताकत

भारतीय सेना ने TATA और NIBE के साथ 840 लॉन्ग-रेंज अटैक ड्रोन के लिए ₹1,577 करोड़ है. जानें कैसे ये स्वदेशी ड्रोन दुश्मन के ठिकानों को घर में घुसकर तबाह करेंगे.

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रूस-यूक्रेन जंग से मिली सीख... TATA और NIBE के साथ भारतीय सेना का बड़ा सौदा, जानें 840 नए अटैक ड्रोन्स की क्या है ताकत

TATA और NIBE के साथ भारतीय सेना का ₹1,577 करोड़ का बड़ा सौदा, AI PHOTO

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  • भारतीय सेना ने 840 लॉन्ग-रेंज अटैक ड्रोन के लिए टाटा और NIBE डिफेंस के साथ ₹1,577 करोड़ का करार किया है.
  • टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स इस ऑर्डर का 64% और NIBE डिफेंस 36% हिस्सा आपूर्ति करेगी.
  • इन ड्रोनों की रेंज 100 किलोमीटर से अधिक है और ये इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी काम करने में सक्षम हैं.
  • इन ड्रोनों का इस्तेमाल मुख्य रूप से सीमा पार दुश्मन के तोपखाने ठिकानों को निशाना बनाने के लिए होगा.

 

Indian Army Drone Deal: भारत ने अपने डिफेंस सेक्टर में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. 15 अगस्त 2026 को जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी समय भारतीय सेना भविष्य की लड़ाइयों के लिए एक बड़ी तैयारी पुख्ता कर रही थी.

सेना ने ₹1,577 करोड़ की लागत से 840 लॉन्ग-रेंज अटैक ड्रोन खरीदने के लिए दो प्रमुख भारतीय कंपनियों TATA Advanced Systems Limited और NIBE Defence के साथ कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं.

यह सौदा केवल हथियारों की खरीद नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि अब भारतीय सेना 'ट्रेडिशनल वॉरफेयर' से आगे बढ़कर 'प्रिसिजन' और 'ड्रोन-लेड वॉरफेयर' की ओर रुख कर चुकी है. आज के इस Explainer में हम समझेंगे कि ये ड्रोन क्या हैं, ये कैसे काम करते हैं और इनसे चीन-पाकिस्तान सीमा पर भारत की ताकत कितनी बढ़ जाएगी.

भारतीय सेना किस प्रकार की ड्रोन खरीद रही है?

भारतीय सेना ने अपनी मारक क्षमता को आधुनिक बनाने के लिए एक लंबी प्रक्रिया के बाद यह फैसला लिया है. कड़े ट्रायल्स और तकनीकी मूल्यांकन के बाद TATA को इस ऑर्डर का 64% हिस्सा मिला है क्योंकि वे सबसे कम बोली लगाने वाले रहे, जबकि बाकी 36% हिस्सा NIBE Defence को दिया गया है.

ये ड्रोन साधारण सर्विलांस ड्रोन नहीं हैं, बल्कि ये 'वन-वे अटैक ड्रोन' हैं, जिन्हें सैन्य भाषा में 'लोइटरिंग म्युनिशन्स' भी कहा जाता है. ये हवा में काफी देर तक मंडरा सकते हैं और जैसे ही दुश्मन का टारगेट मिलता है, ये उस पर आत्मघाती हमला कर उसे तबाह कर देते हैं.

क्यों चर्चा में है यह डील?

आजकल की जंगों में ड्रोन सबसे बड़े गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं. चाहे रूस-यूक्रेन का युद्ध हो या पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ड्रोन ने कम लागत में महंगे टैंकों और एयर डिफेंस सिस्टम को मटियामेट कर दिया है. भारतीय सेना ने इन्हीं अनुभवों से सबक लेते हुए यह बड़ा निवेश किया है.

इस डील की सबसे खास बात यह है कि सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' से मिली सीख को इसमें शामिल किया है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह महसूस किया गया था कि दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक हमलों के बीच भी कॉम्बैट क्षमता बनाए रखना कितना जरूरी है. इसीलिए इन नए ड्रोन्स को खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर से लड़ने के लिए डिजाइन किया गया है.

भारतीय सेना के नए ड्रोन की क्या है खासियत?

इन ड्रोन्स की तकनीक आपको हैरान कर देगी:

  • 100 किलोमीटर से ज्यादा की रेंज: ये ड्रोन सरहद के पार 100 किमी से अधिक गहराई तक जाकर दुश्मन के ठिकानों पर हमला कर सकते हैं.
  • एंटी-जैमिंग तकनीक: ये ऐसे माहौल में भी काम कर सकते हैं जहां दुश्मन भारी 'जैमिंग' या 'स्पूफिंग' कर रहा हो. इनकी सबसे बड़ी परीक्षा टेक-ऑफ के वक्त ही की गई, जहां इन्हें जैमिंग के बीच भी सफल उड़ान भरते देखा गया.
  • कम रिस्क, ज्यादा असर: इन ड्रोन्स की मदद से सेना को अपने जवानों या महंगे लड़ाकू विमानों को दुश्मन के इलाके में भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी. दूर बैठकर ही दुश्मन की आर्टिलरी गन्स और कमांड सेंटर्स को उड़ाया जा सकेगा.

किसे मिलेगा इन ड्रोन्स का जिम्मा?

इन ड्रोन्स को मुख्य रूप से भारतीय सेना की रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी को सौंपा जाएगा. सेना ने ड्रोन युद्ध के लिए पहले ही खास यूनिट्स बनाई हैं, जिन्हें 'शक्तिबाण' रेजिमेंट और 'दिव्यास्त्र' बैटरियां कहा जाता है. इन ड्रोन्स के आने से इन रेजिमेंट्स की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.

देश की सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा?

असल में, यह सौदा देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बहुत जरूरी है. यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय कंपनियों को मिला है. इससे देश में ही हथियार बनाने की क्षमता बढ़ेगी और विदेशों पर निर्भरता घटेगी. 

इसके अलावा, लड़ाकू विमान या मिसाइल के मुकाबले ये ड्रोन काफी सस्ते होते हैं, लेकिन इनका वार उतना ही खतरनाक होता है. इसकी मदद से भारतीय सेना सीमा पार की घुसपैठ और तोपखाने के हमलों का करारा जवाब दे पाएगी, और इसमें हमारे सैनिकों की जान का कोई खतरा भी नहीं होगा.

 

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