डीएनए एक्सप्लेनर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और देश में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को मजबूत बनाने के लिए रूस से एक बड़ी गैस डील करने की तैयारी कर रहा है.
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में बिजली हो, गाड़ियों में पड़ने वाली CNG हो या फिर रसोई का सिलेंडर, एनर्जी यानी ऊर्जा की जरूरत दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार ईंधन की जरूरत है.
इसी सिलसिले में भारत अब रूस से नेचुरल गैस यानी प्राकृतिक गैस आयात करने की संभावना तलाश रहा है. दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर बातचीत जारी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस गैस डील से भारत को असली फायदा क्या होने वाला है? क्या इससे हमारे आपके घरों में आने वाली PNG और गाड़ियों में भरने वाली CNG के दाम कम होंगे?
अभी भारत अपनी जरूरत की ज्यादातर प्राकृतिक गैस चुनिंदा देशों, खासकर मिडिल ईस्ट के देशों से खरीदता है. जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर या मिडिल ईस्ट में कोई युद्ध, तनाव या समुद्री रास्तों में रुकावट आती है, तो भारत में गैस की सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडराने लगता है. रूस से गैस मिलने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि हमारे पास एक मजबूत विकल्प आ जाएगा.
जब भारत के पास एक से ज्यादा बड़े सप्लायर होंगे, तो किसी एक देश पर हमारी निर्भरता नहीं रहेगी. इसे आसान शब्दों में कहें तो भारत की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा बहुत ज्यादा मजबूत हो जाएगी. अगर किसी एक रास्ते या देश से सप्लाई रुकती भी है, तो रूस का विकल्प हमारे काम आएगा.
जब बाजार में किसी चीज को बेचने वाले ज्यादा लोग होते हैं, तो चीजें सस्ती मिलने की संभावना बढ़ जाती है. रूस से तरल प्राकृतिक गैस यानी LNG की बड़ी सप्लाई मिलने से बाजार में मुकाबला बढ़ेगा.

अगर रूस के साथ भारत की लंबी अवधि की डील कम कीमतों पर पक्की होती है, तो इसका सीधा असर घरेलू सिलेंडर, पाइप वाली रसोई गैस और गाड़ियों की CNG की दरों पर पड़ सकता है. आम उपभोक्ताओं को स्थिर और सही दामों पर गैस मिल सकती है.
प्राकृतिक गैस सिर्फ रसोई में ही इस्तेमाल नहीं होती, बल्कि खाद बनाने वाली कंपनियों, बिजली संयंत्रों, कांच और स्टील जैसी बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है. अगर भारत को सस्ती गैस मिलेगी, तो खाद बनाना सस्ता होगा, जिससे किसानों को फायदा पहुंचेगा. साथ ही फैक्ट्रियों की लागत कम होने से बाजार में दूसरी चीजें भी सस्ती हो सकती हैं.
भारत सरकार देश को प्रदूषण से मुक्त करने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए ग्रीन एनर्जी पर काफी जोर दे रही है. कोयले और डीजल-पेट्रोल के मुकाबले प्राकृतिक गैस बहुत कम प्रदूषण फैलाती है. सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में देश के कुल ऊर्जा इस्तेमाल में नेचुरल गैस की हिस्सेदारी को कई गुना बढ़ाया जाए.
इसके लिए पूरे देश में सिटी गैस नेटवर्क, नई पाइपलाइनें और CNG स्टेशन बिछाए जा रहे हैं. रूस से मिलने वाली गैस इस सपने को पूरा करने में एक बहुत बड़ा ईंधन साबित हो सकती है.
रूस से डील करने के जितने फायदे हैं, उतने ही कुछ अंतरराष्ट्रीय पेंच भी हैं जिन्हें भारत को बहुत संभालकर सुलझाना होगा:
रूस के साथ गैस डील भारत के लिए एक बड़ा और मास्टर स्ट्रोक कदम साबित हो सकता है. इससे न सिर्फ हमें भरोसेमंद और अतिरिक्त गैस मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दूसरे देशों से गैस की कीमत कम कराने में भी भारत का पलड़ा भारी रहेगा. अगर अमेरिका के प्रतिबंधों और पेमेंट के रास्तों को भारत समझदारी से संभाल लेता है, तो यह डील भारत के विकास और आम जनता की जेब, दोनों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगी.
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