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IFS Nidhi Tewari, Success Story: आईएफएस निधि तिवारी और डॉक्टर सुशील जायसवाल की पहली मुलाकात बीएचयू की लैब में हुई थी. यहीं से दोनों का प्यार परवान चढ़ा और 2006 में शादी कर ली.
अक्सर कहा जाता है कि शादी के बाद महिलाओं का करियर बनाने का सपना खत्म हो जाता है. शादी के बाद उनकी जिंदगी पति, सास-ससुर और बच्चों की सेवा और उनकी जिंदगी संवारने में ही गुजर जाती है. लेकिन IFS निधि तिवारी (Nidhi Tewari) ने यह बात गलत साबित करके दिखाई. उन्होंने शादी के बाद न सिर्फ यूपीएससी परीक्षा पास की, बल्कि देश के सबसे पावरफुल व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निजी सेक्रेटरी बनकर दिखाया.
वाराणसी की महमूरगंज की रहने वाली निधि तिवारी का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. बनारस की गलियों में खेलते, घाटों पर शाम की आरती देखते बड़ी हुई निधि ने कभी सोचा नहीं था कि वह एक दिन उस मुकाम पर पहुंच जाएंगी. उनकी लव स्टोरी भी काफी दिलचस्प रही है. निधि की लव स्टोरी की कहानी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से शुरू हुई.
दरअसल, साल 2004 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बायोकेमिस्ट्री से B.Sc पास करने के बाद निधि तिवारी वाराणसी आ गई थीं. 2005 में उन्होंने बीएचयू में M.Sc बायोकेमिस्ट्री में एडमिशन लिया. बीएचयू में वो हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने लगीं. BHU में पढ़ाई के दौरान उनकी मुलाकात सुशील जायसवाल से हुई. जायसवाल मेडिकल के छात्र थे. दोनों की मुलाकात लैब में हुई थी. धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और कुछ समय बाद एक-दूसरे के करीब आने लगे.
निधि तिवारी, सुशील जायसवाल को पहली नजर में ही प्यार करने लगी थीं, लेकिन उन्होंने अपने दिल का इजहार नहीं किया था. वहीं जायसवाल भी निधि के पसंद करने लगे थे. दोनों के बीच मुलाकात बढ़ने लगी और फिर दिसंबर 2006 में वो दिन आया जब दोनों शादी रचा ली. शादी के बाद सुशील जायसवाल एमबीबीएस और एमडी करके डॉक्टर बन गए.
निधि तिवारी ने वैज्ञानिक बनने की तैयारी शुरू कर दी. साल 2007 में उनका चयन भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) मुंबई में हो गया और वे महाराष्ट्र चली गईं. लेकिन उनका सपना ब्यूरोक्रेसी में कुछ बड़ा करने का था. 2008 में उनके बेटे का जन्म हुआ. इसके बाद उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया. 2008 में उन्होंने यूपीएससी की पहली परीक्षा दी और असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर चयनित हो गईं.
दो साल तक निधि तिवारी असिस्टेंट कमिश्नर पद पर नौकरी करती रहीं. लेकिन इससे भी उनका मन नहीं भरा और 2011 फिर से यूपीएससी की तैयारी करने दिल्ली आ गईं. साल 2013 में उन्होंने UPSC परीक्षा पास की और 96वीं रैंक हासिल की. निधि IFS (भारतीय विदेश सेवा) के लिए चुनी गईं. 2017 में उन्हें विदेश मंत्रालय में डेस्क पोस्टिंग मिली.
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