डीएनए एक्सप्लेनर
यूरोप के कई देश भीषण गर्मी और जंगलों की भयंकर आग की चपेट में हैं। फ्रांस में आग लगाने के आरोप में सैकड़ों गिरफ्तारियां हुई हैं। हर मुमकिन कोशिश के बाद भी यह आग बुझ क्यों नहीं पा रही है? आइए जानते हैं इसके पीछे क्या है असली वजह
Europe Wildfires Explainer In Hindi: यूरोप के साल 2026 में एक बड़े संकट का सामना कर रहा है. जहां एक ओर रिकॉर्ड तोड़ गर्मी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं दूसरी ओर महाद्वीप के आधे दर्जन से अधिक देशों के जंगलों में लगी भीषण आग ने भारी तबाही मचा रखी है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि फ्रांस जैसे देशों में इस आग के पीछे प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ 'मानवीय साजिश' या लापरवाही भी सामने आ रही है.
फिलहाल पूरा यूरोप न केवल धधक रही लपटों से जूझ रहा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन के गंभीर परिणामों का भी सामना कर रहा है, तो आइए जानते हैं कि इस आग से अब तक कितना नुकसान हुआ है.
यूरोप के कई देशों फ्रांस, क्रोएशिया, जर्मनी, ग्रीस और स्पेन के जंगलों में भीषण आग लगी हुई है. यह स्थिति एक रिकॉर्ड तोड़ 'हीटवेव' के बीच पैदा हुई है, जिसमें लगभग 15 करोड़ लोग 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान में रहने को मजबूर हैं. पश्चिमी यूरोप में औसत तापमान 1961-1990 के सामान्य स्तर से लगभग 8 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है. अब यह आग इतनी बढ़ गई है कि इसने घरों, ऐतिहासिक स्मारकों और पर्यटन स्थलों को अपनी चपेट में ले लिया है.
फ्रांस में इस गर्मी के सीजन में अब तक 474 लोगों को आग लगाने के संदेह में गिरफ्तार किया जा चुका है. इनमें से करीब 70% लोग ऐसे हैं जिन्होंने जानबूझकर आग लगाई. गिरफ्तार किए गए लोगों में 183 नाबालिग भी हैं. इसके अलावा, बोर्डो एयरपोर्ट के पास लगी आग के मामले में एक 15 साल के लड़के को भी पकड़ा गया है.
यूरोप की सरकारें और इमरजेंसी सर्विसेज इस संकट से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर जुटी हैं. फ्रांस के लैंडेस इलाके से 525 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. इसके अलावा क्रोएशिया में 1,200 और जर्मनी में 2,000 से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है. स्पेन में सेना ने ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए मठों से पुरानी कलाकृतियों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया है.
वहीं, जर्मनी में दमकलकर्मियों की मदद के लिए सेना के टैंक और हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं. यूरोपीय संघ (EU) के मुताबिक, पूरे महाद्वीप में जंगलों की आग बेकाबू हो चुकी है. कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने मध्य और पूर्वी यूरोप के बड़े इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है.
इस भीषण संकट का आम लोगों और पर्यटकों पर बहुत बुरा असर पड़ा है. क्रोएशिया के एक रिसॉर्ट में आग लगने से 1 व्यक्ति की मौत हो गई और 40 लोग घायल हुए हैं. ब्रिटेन के स्टोक-ऑन-ट्रेंट में भी आग से कई घर जलकर राख हो गए. उधर ग्रीस में, समुद्र तटों पर फंसे सैकड़ों पर्यटकों को नावों की मदद से बचाया गया है. खतरे को देखते हुए कई मशहूर रिसॉर्ट्स में एंट्री बंद कर दी गई है.
विशेषज्ञों को डर है कि भयंकर गर्मी और धुएं के कारण हजारों लोगों की जान जा सकती है. एक और बड़ी चुनौती जर्मनी में आ रही है, जहां जंगलों में दूसरे विश्व युद्ध के पुराने बम दबे हुए हैं. उनके फटने के डर से दमकलकर्मी सीधे आग बुझाने अंदर नहीं जा पा रहे हैं. जिसके वजह वहां मौजूद लोगों में भारी डर बना हुआ है.