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Explained: UP में ₹25,446 करोड़ की सौगात से बनेंगे गंगा और वरुणा एलिवेटिड कॉरिडोर, जानें किन इलाकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

केंद्र सरकार ने वाराणसी के लिए करीब ₹25,445.96 करोड़ की लागत वाली दो मेगा नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. इन दोनों प्रोजेक्ट के तहत लगभग 89.26 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे. जानें इससे किन इलाकों को होगा फायदा...

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Explained: UP में ₹25,446 करोड़ की सौगात से बनेंगे गंगा और वरुणा एलिवेटिड कॉरिडोर, जानें किन इलाकों को होगा सबसे ज्यादा फायदा

वाराणसी में दो मेगा एलिवेडेट कॉरिडोर को मंजूरी. (Image: AI)

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  • वाराणसी को मिले दो मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर
  • ₹25,445.96 करोड़ की लागत से बनेंगे दोनों कॉरिडोर
  • लगभग 89.26 किलोमीटर होगी कॉरिडोर की लंबाई
  • हाइब्रिड एन्युटी मॉडल से बनेंगे दोनों कॉरिडोर

अगर आप वाराणसी में रहते हैं या अक्सर इस शहर में आते-जाते हैं तो आने वाले कुछ सालों में इस शहर के अंदर और इसके आसपास का सफर पहले की तुलना में काफी आसान हो सकता है. केंद्र सरकार ने वाराणसी के लिए करीब ₹25,445.96 करोड़ की लागत वाली दो मेगा नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. इन दोनों प्रोजेक्ट के तहत लगभग 89.26 किलोमीटर लंबे दो एलिवेटेड कॉरिडोर बनाए जाएंगे. सरकार का दावा है कि इनके बनने के बाद ट्रैफिक जाम कम होगा, यात्रा का समय घटेगा और शहर के प्रमुख धार्मिक, शैक्षणिक, औद्योगिक और परिवहन केंद्रों तक पहुंच पहले से बेहतर हो जाएगी.

क्या है हाइब्रिड एन्युटी मॉडल जिससे बनेंगे दोनों कॉरिडोर?

इन दोनों प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है. इनका निर्माण NHAI, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के जरिए करेगा. इस मॉडल में निर्माण की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनी संभालती है और सरकार प्रोजेक्ट की लागत का एक हिस्सा निर्माण के दौरान और बाकी बची हुई राशि तय अवधि में किस्तों के जरिए देती है.

वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर का पूरा रूट क्या है?

पहला प्रोजेक्ट वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर का है. यह 43.218 किलोमीटर लंबा होगा और इसकी अनुमानित लागत ₹10,998.32 करोड़ है. यह कॉरिडोर NH-31 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा. इस प्रोजेक्ट में एलिवेटेड सड़क, फ्लाईओवर, लूप, रैंप और सर्विस रोड का निर्माण किया जाएगा. इसे 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाएगा जिससे लंबी दूरी का ट्रैफिक शहर की भीड़भाड़ से बाहर रह सके.

केंद्र सरकार के अनुसार, वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद एनएच-31 और काशी रेलवे स्टेशन के बीच यात्रा का समय करीब 40 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा. इससे काशी रेलवे स्टेशन, वाराणसी जंक्शन, वाराणसी सिटी स्टेशन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, रामनगर बंदरगाह, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, शहर के प्रमुख घाटों और चंदौली इलाके तक पहुंच भी आसान होगी. सिर्फ आपका समय नहीं बचेगा बल्कि आपकी जेब पर ईंधन का खर्च भी कम होगा.

गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का रूट क्या है?

दूसरा प्रोजेक्ट गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर का है. यह 46.039 किलोमीटर लंबा छह लेन का एलिवेटेड कॉरिडोर होगा, जिसकी अनुमानित लागत ₹14,447.64 करोड़ है. यह NH-19 को वाराणसी रिंग रोड से जोड़ेगा और गंगा नदी के समानांतर विकसित किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट में एक केबल-स्टे ब्रिज, एक्स्ट्राडोज्ड फुट-ओवर ब्रिज-कम-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड का भी निर्माण किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का मकसद शहर के अंदर से गुजरने वाले ट्रैफिक का दबाव कम करना और गंगा तट के प्रमुख इलाकों तक बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है.

सरकार का अनुमान है कि गंगा एलिवेटेड कॉरिडोर बनने के बाद इस मार्ग पर औसत यात्रा समय करीब 60 मिनट से घटकर लगभग 20 मिनट रह जाएगा. वहीं एनएच-19 से काशी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में लगने वाला समय लगभग 50 मिनट से घटकर 25 मिनट हो सकता है. इससे शहर के भीतर आने-जाने वाले लोगों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है.

इस मेगा एलिवेटेड कॉरिडोर से किसे होगा फायदा?

इन दोनों प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा वाराणसी और आसपास के जिलों में रहने वाले लोगों को मिलेगा. रोजाना नौकरी, कारोबार, पढ़ाई या किसी और काम से आने-जाने वाले लोगों का समय बचेगा और ट्रैफिक जाम की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए भी यात्रा पहले की तुलना में आसान होगी क्योंकि काशी विश्वनाथ धाम, नमो घाट और दूसरे प्रमुख घाटों, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, रामनगर किला और शहर के कई प्रमुख स्थलों तक पहुंच बेहतर हो जाएगी.

इन प्रोजेक्ट से व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. वाराणसी जंक्शन, काशी स्टेशन, दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और रामनगर स्थित अंतर्देशीय जलमार्ग (IWAI) टर्मिनल के बीच तेज और निर्बाध संपर्क स्थापित होगा. इससे माल परिवहन अधिक तेज और किफायती होगा, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के व्यापारिक और औद्योगिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है.

सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से केवल ट्रैफिक व्यवस्था ही नहीं सुधरेगी, बल्कि पर्यटन, तीर्थाटन, व्यापार, निवेश और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. वाराणसी देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक शहरों में से एक है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं. ऐसे में आधुनिक सड़क नेटवर्क बनने से शहर की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के विकास को भी नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.

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