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ताइवान के बच्चों पर चीन का 'सॉफ्ट प्रहार', क्यों सस्ते टूर के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है बीजिंग?

चीन बेहद कम खर्च वाले एक्सचेंज टूर के जरिए ताइवान के स्कूली बच्चों और युवाओं को रिझा रहा है. जानिए कैसे सिचुआन से लेकर शिनजियांग तक फैले इस नेटवर्क से ताइवान की सुरक्षा को खतरा है.

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ताइवान के बच्चों पर चीन का 'सॉफ्ट प्रहार', क्यों सस्ते टूर के जरिए युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है बीजिंग?

ताइवान की नई पीढ़ी पर चीन की नजर, AI Photo

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  • चीन बेहद सस्ते और भारी सब्सिडी वाले 'एक्सचेंज टूर' के जरिए ताइवान के बच्चों आकर्षित कर रहा. 
  • साल 2022 से 2025 के बीच चीन जाने वाले प्राथमिक स्कूल के बच्चों की संख्या में 27 गुना से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है. 
  • ताइवान सरकार इन दौरों से राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पैदा होने वाले खतरों को लेकर चिंतित है.


Taiwan China Youth Exchange: ताइवान पर नियंत्रण पाने के लिए चीन की रणनीति अब सिर्फ सैन्य दबाव और लड़ाकू विमानों की धमकियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बीजिंग अब ताइवान पर नियंत्रण पाने के लिए 'सॉफ्ट पावर' का इस्तेमाल कर रहा है. हाल के वर्षों में चीन सरकार द्वारा भारी सब्सिडी वाले युवा एक्सचेंज प्रोग्रामों की शुरुआत की गई है, जिनमें ताइवान के स्कूली बच्चे, युवा और शिक्षक बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं.

इस बढ़ते रुझान ने ताइवान की सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. पहली नजर में ये कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पर्यटन जैसे लगते हैं, लेकिन इनके पीछे ताइवान की भावी पीढ़ी की सोच को बदलने और चीन के प्रति उनके मन से परायेपन को खत्म करने की सोची-समझी राजनीतिक साजिश छिपी है. 

क्या है चीन के सस्ते एक्सचेंज का पूरा खेल?

ताइवान में चीन के इन युवा एक्सचेंज कार्यक्रमों को सुरक्षा के लिए खतरा माना जा रहा है. इन प्रोग्रामों में सबसे आकर्षक बात इनका बेहद कम खर्च है. प्रतिभागियों को अक्सर केवल अपनी फ्लाइट टिकट का खर्च या नाममात्र की रजिस्ट्रेशन फीस देनी होती है. रहने, खाने, घूमने और लोकल ट्रांसपोर्ट का पूरा खर्च चीनी सरकारी संस्थाएं उठाती हैं.

अभी हाल ही में सिचुआन में पांडा दिखाने के लिए एक एक्सचेंज टूर का विज्ञापन महज 185 अमेरिकी डॉलर में दिया गया था, जिसमें बाकी सारा खर्च मुफ्त था. इसके अलावा, 'क्रॉस-स्ट्रेट यूथ नॉर्दर्न शिनजियांग टूर' नामक 8 दिन के दौरे के लिए स्थानीय बिचौलियों के जरिए ताइवानी शिक्षकों को शामिल किया गया था. इसमें केवल 125 अमेरिकी डॉलर की रजिस्ट्रेशन फीस देनी थी, जबकि रहने-खाने का सारा खर्च इसमें शामिल था.

ताइवान के किन बच्चों पर है चीन का नजर?

चीनी रडार पर कॉलेज के बड़े छात्र नहीं, बल्कि प्राइमरी स्कूल के मासूम बच्चे हैं. ताइवान की सबसे बड़ी जांच एजेंसी 'कंट्रोल युआन' का हालिया डेटा दिखाता है कि इन कार्यक्रमों में अब प्राइमरी स्कूल के छोटे बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है.

साल 2022 में चीन जाने वाले ताइवानी प्राइमरी स्कूल के बच्चों की संख्या सिर्फ 38 थी, जो साल 2025 में 27 गुना से भी अधिक बढ़कर 1,045 हो गई. जूनियर हाई के छात्रों की संख्या भी 2022 में शून्य थी, जो बढ़कर 1,021 हो गई.
वहीं, सीनियर हाई के छात्रों की संख्या 676 से बढ़कर 1,021 हुई, जबकि यूनिवर्सिटी छात्रों की संख्या 2,196 से दोगुनी से अधिक बढ़कर 5,745 तक पहुंच गई. इसके अलावा,  साथ जाने वाले शिक्षकों की संख्या भी 661 से लगभग दोगुनी होकर 1,281 हो गई.

छोटे बच्चों को निशाना बनाने के पीछे चीन की सोची-समझी रणनीति है. वे इन दौरों के दौरान परोसे जाने वाले बारीक राजनीतिक संदेशों को परख या समझ नहीं पाते. इसके साथ ही, ताइवान की नई पीढ़ी वर्तमान में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे टिकटॉक और श्याओहोंगशू का अत्यधिक इस्तेमाल कर रही है. इससे चीनी कल्चर से उनकी दूरी कम हो रही है और उन्हें चीनी संस्कृति पराई नहीं, बल्कि अपनी सी लगने लगती है.

'रेड टूरिज्म' का क्या है खतरनाक खेल?

इन दौरों में केवल दर्शनीय स्थलों की सैर नहीं कराई जाती, बल्कि इसमें 'रेड टूरिज्म' यानी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) के इतिहास से जुड़े स्थलों का दौरा भी शामिल होता है. यात्रा के दौरान ताइवानी बच्चों की तस्वीरों का इस्तेमाल बाद में प्रोपेगैंडा के लिए किया जाता है.

ताइवान यूथ एसोसिएशन के महासचिव चांग यु-मेंग के अनुसार, इन टूरों में अधिक सीधा राजनीतिक संदेश और निगरानी भी शामिल हो सकती है. खबरों के मुताबिक, चीनी ग्रुप काउंसलर ताइवानी छात्रों की रोजमर्रा की गतिविधियों को नोट करते हैं और अपने सीनियर्स को रिपोर्ट देते हैं.

क्या कहता है ताइवान का कानून?

ताइवान सरकार इन दौरों को रोकना चाहती है, लेकिन उसके सामने कानूनी अड़चनें हैं. ताइवान का कानून 'ताइवान और मेनलैंड क्षेत्र के संबंधों को नियंत्रित करने वाला अधिनियम' की धारा 33-1 ताइवानी नागरिकों, शिक्षकों या संस्थाओं को चीनी सरकार, सेना या कम्युनिस्ट पार्टी के संगठनों के साथ बिना अनुमति के राजनीतिक सहयोग करने से रोकती है.

लेकिन चीन के स्थानीय बिचौलिए इस कानून की खामियों का फायदा उठाते हुए चीनी आयोजक स्कूलों के बजाय सीधे शिक्षकों या सामाजिक समूहों से उनके निजी सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए संपर्क करते हैं. जब कोई शिक्षक निजी तौर पर बच्चों को इकट्ठा करके चीन ले जाता है, तो स्कूल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लग पाती.

कानून के अनुसार, धारा 33-1 के उल्लंघन पर कार्रवाई तभी हो सकती है जब शिकायत दर्ज हो. शिकायत मिलने के बाद ही अधिकारी जांच शुरू कर सकते हैं. ताइवान के शिक्षा मंत्रालय ने साल 2019 में 'मेनलैंड Education Exchange Activity Platform' बनाया था. लेकिन अधिकांश स्कूल इस प्लेटफॉर्म पर अपनी रिपोर्ट दर्ज नहीं करते हैं जिसकी वजह से पूरी जानकारी नहीं मिल पाती है. 
 

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