डीएनए एक्सप्लेनर
मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच चीन ने आर्कटिक के जरिए 'आइस सिल्क रोड' शुरू किया है. जानिए कैसे यह नया रूट स्वेज नहर और होर्मुज का विकल्प बनकर ग्लोबल ट्रेड को बदल सकता है.
China Ice Silk Road: मिडिल ईस्ट में बारूद की गंध और समुद्रों में जारी तनाव ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है. एक तरफ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, तो दूसरी तरफ लाल सागर में जहाजों पर हमले हो रहे हैं. ऐसे माहौल में चीन ने एक ऐसा रास्ता निकाला है जिसे 'गेम चेंजर' माना जा रहा है. चीन ने आर्कटिक महासागर के जरिए यूरोप तक एक नया शिपिंग रूट तैयार किया है, जिसे ‘आइस सिल्क रोड’ नाम दिया गया है.
यह मामला अभी चर्चा में इसलिए है क्योंकि मिडिल ईस्ट के 'चोकपॉइंट्स' (जैसे होर्मुज और स्वेज नहर) लगभग ठप पड़ चुके हैं. चीन का दावा है कि यह नया रास्ता न केवल सुरक्षित है, बल्कि समय की भी भारी बचत करता है.
चीन की एक कंटेनर शिपिंग कंपनी, 'सी लीजेंड' ने आधिकारिक तौर पर आर्कटिक के जरिए यूरोप तक के इस नए रूट की घोषणा की है. यह रूट चीन के पूर्वी तट पर स्थित निंगबो से शुरू होता है जो आर्कटिक सर्कल को पार करता हुआ रूस के 'नदर्न सी रूट' (NSR) से गुजरता है और अंत में इंग्लैंड के फेलिक्सस्टो तक पहुंचता है.
चीन इस रास्ते पर पिछले साल से ही टेस्ट रन कर रहा था. अक्टूबर 2025 में हुए एक परीक्षण में पाया गया कि इस रास्ते से यूरोप पहुंचने में सिर्फ 20 दिन लगते हैं.
मिडिल ईस्ट में चल रहे संकट ने दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों को 'नो-गो जोन' बना दिया है 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग बंद कर दिया है.यह रास्ता दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई संभालता है.
वहीं, यमन के हूती विद्रोही लगातार उन जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिनका संबंध सऊदी अरब या उसके सहयोगियों से है. इससे बाब अल-मंडेब और स्वेज नहर का रास्ता बेहद खतरनाक हो गया है. इन हालातों की वजह से ऑयल और गैस व्यापार बाजार गहरे संकट में हैं और ऐसे समय में चीन का यह नया मार्ग एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है.
आर्कटिक का यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए एक 'शॉर्टकट' की तरह काम करता है. सामान्य तौर पर, स्वेज नहर के रास्ते चीन से यूरोप जाने में करीब 40 दिन का समय लगता है, जबकि अफ्रीका के चक्कर काटकर (केप ऑफ गुड होप के रास्ते) जाने में लगभग 50 दिन लगते हैं. लेकिन चीन के इस 'आइस सिल्क रोड'के ज़रिए यह सफर मात्र 18 से 21 दिनों में पूरा हो सकता है.
समय की बचत के साथ-साथ आर्कटिक में तापमान बहुत कम रहता है. 'सी लीजेंड' के अधिकारियों के अनुसार, यह रास्ता लिथियम-आयन बैटरी और फोटोवोल्टिक (सोलर) प्रोडक्ट्स जैसे 'हीट-सेंसिटिव' सामानों के लिए बेस्ट है, क्योंकि इन्हें ठंडा रखने की जरूरत होती है.
यह रास्ता रूस के 'नॉर्दर्न सी रूट' (NSR) से होकर गुजरता है, जिस पर जहाजों की आवाजाही के परमिट जारी करने का अधिकार सिर्फ रूस के पास है. यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और चीन के बीच बढ़ती नजदीकी ने चीन को इस रास्ते का एक्सेस आसानी से दिला दिया है.
भले ही यह रास्ता सुनने में बहुत अच्छा लगे, लेकिन इसमें कुछ बड़ी रुकावटें भी हैं यह रास्ता साल भर खुला नहीं रह सकता. यह केवल गर्मियों के महीनों में ही इस्तेमाल किया जा सकता है जब बर्फ पिघलती है. सर्दियों में बर्फ इतनी मोटी हो जाती है कि जहाजों का निकलना नामुमकिन होता है.
बता दें कि फरवरी 2026 में नाटो ने 'आर्कटिक सेंट्री' नाम से एक सैन्य मिशन शुरू किया है ताकि इस क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोका जा सके. इस पर ग्रीन ग्रुप्स का मानना है कि आर्कटिक में जहाजों की आवाजाही बढ़ने से बर्फ और तेजी से पिघलेगी, जो क्लाइमेट चेंज के लिए खतरनाक है.