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ऑनलाइन पेमेंट करते हैं तो सावधान! ठगों ने 8 महीने में 107 करोड़ का लगाया चूना, सबसे ज्यादा इस तरीके से हो रहे साइबर फ्रॉड

भारत में जिस तेजी से ऑनलाइन पेमेंट बढ़ रही है उसी तेजी से साइबर ठगी भी बढ़ रही है. पिछले आठ महीनों में भारत के लोगों ने साइबर ठगी में 107 करोड़ रुपये गंवाए हैं.

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ऑनलाइन पेमेंट करते हैं तो सावधान! ठगों ने 8 महीने में 107 करोड़ का लगाया चूना, सबसे ज्यादा इस तरीके से हो रहे साइबर फ्रॉड
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Cyber Thagi India : भारत में ऑनलाइन पेमेंट तेजी से बढ़ रहे हैं. Statista की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में भारत में लगभग 164 अरब डिजिटल भुगतान दर्ज किए गए. जिस तेजी से डिजिटल पेमेंट्स बढ़ रहे हैं उसी तेजी से ऑनलाइन ठगी भी बढ़ रही है. केंद्र सरकार ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में दिसंबर 2024 तक कार्ड, ऑनलाइन माध्यमों से और डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी के कारण लोगों को कुल 107 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बीते सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-दिसंबर अवधि में धोखाधड़ी के 13,384 मामले सामने आए, जिनमें आम लोगों को 107.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. चौधरी ने आगे कहा कि देश में डिजिटल भुगतान लेन-देन बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान धोखाधड़ी सहित अन्य प्रकार की धोखाधड़ी के मामले भी पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं. उन्होंने बताया कि 2022-23 में 69.68 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने वाले धोखाधड़ी के ऐसे 6,699 मामले सामने आए थे. 

साइबर ठगी के रूप अनेक
इस ऑनलाइन ठगी का प्रमुख कारण कहीं न कहीं जागरूकता की कमी है. ठगों से बचने के लिए ये जानना जरूरी है कि साइबर ठगी हो किन रूपों में रही है.  डिजिटल युग में साइबर अपराधियों के ठगी करने के तरीके लगातार बदलते जा रहे हैं. वर्तमान समय में कुछ खास प्रकार की ठगी सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है, जिनमें लोगों को आसानी से शिकार बनाया जा रहा है.

डिजिटल अरेस्ट स्कैम
इसमें साइबर अपराधी खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर व्यक्ति को फर्जी कानूनी मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं और जुर्माना या शुल्क के नाम पर पैसे ऐंठते हैं. ये डिजिटल अरेस्ट कई बार डिजिटल हरामेंट बन जाता है. यह नए प्रकार की साइबर ठगी है.
 
ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड
- फिशिंग (Phishing): ईमेल, मैसेज या फोन कॉल के जरिए लोगों को नकली वेबसाइट पर ले जाकर उनके बैंक डिटेल्स चुराना. -OTP फ्रॉड: साइबर अपराधी खुद को बैंक अधिकारी बताकर ओटीपी पूछ लेते हैं और अकाउंट खाली कर देते हैं.

व्हाट्सएप और सोशल मीडिया ठगी
- बॉस बनकर ठगी: कंपनियों के कर्मचारियों को उनके 'बॉस' के नाम से मैसेज भेजकर पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता है.
- फ्रॉड लिंक: व्हाट्सएप पर फेक लॉटरी, गिफ्ट या ऑफर लिंक भेजकर लोगों की निजी जानकारी चुराई जाती है.

केवाईसी अपडेट स्कैम
- बैंक, पेटीएम, गूगल पे जैसी सेवाओं की फर्जी KYC अपडेट कॉल्स करके अकाउंट हैक कर लिया जाता है.

नौकरी और वर्क-फ्रॉम-होम ठगी
- नकली कंपनियां आकर्षक वेतन वाली नौकरियों का ऑफर देकर रजिस्ट्रेशन या सिक्योरिटी फीस मांगती हैं.
- लोगों को ऑनलाइन डेटा एंट्री या फ्रीलांसिंग जॉब देकर धोखा दिया जाता है.

निवेश और क्रिप्टोकरेंसी घोटाले
- अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा डलवाया जाता है.
- क्रिप्टोकरेंसी में दोगुना पैसा करने का दावा करके पैसे लूटे जाते हैं.

इंस्टेंट लोन ऐप ठगी
- कई फर्जी मोबाइल ऐप्स कम ब्याज दर पर लोन देने का वादा करती हैं और बाद में ज्यादा ब्याज वसूलने के लिए ब्लैकमेल करती हैं.

ऑनलाइन शॉपिंग और ओएलएक्स स्कैम
- नकली ई-कॉमर्स वेबसाइट्स सस्ते दाम पर सामान बेचने का झांसा देती हैं और पैसा लेने के बाद डिलीवरी नहीं होती.
- ओएलएक्स जैसी साइट्स पर सामान बेचने के बहाने यूपीआई स्कैम किए जाते हैं. 

कैसे बचें इस साइबर ठगी से?
सरकार और संस्थाओं द्वारा लगातार साइबर ठगी को लेकर जागरुक किए जाने के बावजूद लोग इसके शिकार बन जाते हैं, क्योंकि ठगी करने वाले जालसाज हर बार कुछ अलग तरीके अपनाते हैं. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक मन की बात कार्यक्रम में कहा था कि अगर आपके पास डिजिटल अरेस्ट के लिए कॉल आता है तो पहले रुकें, सोचें और फिर एक्शन लें. हड़बड़ी में कोई काम न करें. यहां कुछ तरीके बताए जा रहे हैं जिनसे आप साइबर ठगी से बच सकते हैं:

  • किसी भी अनजान नंबर से आए कॉल या मैसेज पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी न दें. 
  • यदि कोई व्यक्ति खुद को सरकारी अधिकारी बताता है, तो उसकी पहचान की सत्यता जांचें.
  • संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें: अज्ञात स्रोतों से प्राप्त लिंक या अटैचमेंट्स को खोलने से बचें।
  • अपने ऑनलाइन खातों के लिए मजबूत और ऐसा पासवर्ड रखें जो दूसरा समझ न पाए.  
  • साइबर सुरक्षा से जुड़े अपडेट्स को देखते रहें.  
  • अगर आप साइबर धोखाधड़ी का शिकार होते हैं तो हेल्पलाइन नंबर 1930 पर रिपोर्ट करें. 
  • सोशल मीडिया पर दिख रहे आकर्षक विज्ञापन के लालच में न आएं
  • केंद्र सरकार ने साइबर अपराध से निपटने के लिए व्यापक और समग्र नीति अपनाने के लिए इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) का गठन किया है. यह सेंटर देश में हर तरह के साइबर अपराध से निपटने का काम करता है.
     

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