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कौन है सज्जन कुमार, क्यों हुए थे सिख विरोधी दंगे, क्या है वो केस जिसमें 41 साल बाद मिली है उसे उम्र कैद

Sajjan Kumar Sentenced: सज्जन कुमार पूर्व कांग्रेस सांसद हैं, जो 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामलों में आरोपी है. इन्हीं से जुड़े बाप-बेटे को जिंदा जलाने के मामले में सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई गया है.

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कौन है सज्जन कुमार, क्यों हुए थे सिख विरोधी दंगे, क्या है वो केस जिसमें 41 साल बाद मिली है उसे उम्र कैद
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Sajjan Kumar Sentenced: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े एक मामले में फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दंगों के दौरान बाप-बेटे को जिंदा जलाकर मारने के मामले में आरोपी सज्जन कुमार को 41 साल बाद उम्रकैद की सजा सुनाई है. हालांकि पीड़ित पक्ष और दिल्ली पुलिस ने सज्जन कुमार के लिए फांसी की सजा मांगी थी. अभियोजन ने इसे रेयरेस्ट ऑफ रेयर की कैटेगरी में मानने की मांग कोर्ट से की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह सिख विरोधी दंगों से जुड़ा दूसरा मामला है, जिसमें सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इससे पहले दिल्ली कैंट इलाके में भड़की हिंसा से जुड़े मामले में भी सज्जन कुमौर को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी. 

सरस्वती विहार में हुई हिंसा से जुड़े केस में सुनाई गई है अब सजा
सज्जन कुमार कांग्रेस का पूर्व सांसद है. उसे ही सिख विरोधी दंगों को अंजाम देने वाला मास्टरमाइंड माना जाता है. सज्जन कुमार को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सरस्वती विहार इलाके में 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े केस में उम्रकैद की सजा सुनाई है. दंगों के दौरान सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया गया था. सरस्वती विहार में 1 नवंबर 1984 को हुई इस हत्या में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने IPC की धारा 147, 148, 149, 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436 और 440 के तहत सज्जन कुमार को मास्टरमाइंड बनाते हुए केस दर्ज किया था.

16 साल तक नहीं मिला था सज्जन के खिलाफ गवाह
इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) ने की थी. जांच में 1 नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार इलाके में हुई हिंसा के दौरान भीड़ की अगुवाई सज्जन कुमार द्वारा करने की बात साबित हुई थी. एसआईटी ने यह भी माना थाी कि सज्जन कुमार के उकसाने पर ही भीड़ सरस्वती विहार में सिखों के घर में घुसी थी और वहां लूटपाट करने के साथ ही लोगों से मारपीट भी की थी. इसी दौरान सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया गया था. पुलिस ने इस मामले में जिसे गवाह बनाया था, उसने 16 साल बाद सज्जन कुमार के इस हिंसा में शामिल होने की पुष्टि की थी. हालांकि सज्जन कुमार के वकील ने इसका ही आधार बनाते हुए अपने मुवक्किल को निर्दोष बताया था. सज्जन कुमार ने भी 1 नवंबर 2023 को कोर्ट में इस मामले में गवाही में खुद को निर्दोष बताया था.

अभियोजन ने बताया था निर्भया केस से भी ज्यादा संगीन मामला
इस मामले में अभियोजन की तरफ से कोर्ट में दी गई दलीलों में इसे निर्भया केस से भी ज्यादा संगीन मामला बताया गया था, जिसमें समुदाय विशेष के लोगों को टारगेट करके किलिंग की गई थी. सिख विरोधी हिंसा को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए अभियोजन ने इस मामले में सज्जन कुमार को फांसी की सजा सुनाए जाने की मांग की थी. 

चायवाले से सांसद तक पहुंचा था सज्जन कुमार
दिल्ली में 23 सितंबर, 1945 को सज्जन कुमार एक गरीब परिवार में जन्मा था. बचपन में चाय बेचकर गुजारा करने वाले सज्जन ने धीरे-धीरे कांग्रेस में अपनी घुसपैठ करनी शुरू की. 1970 के दशक में इमरजेंसी के दौर में सज्जन कुमार तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी के करीब आ गए, जिन्हें उस समय 'सुपर PM' कहा जाता था. संजय गांधी के समर्थन से सज्जन कुमार ने दिल्ली नगरपालिका का चुनाव जीता. इसके बाद 1980 में लोकसभा चुनाव में सज्जन कुमार को दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे ब्रह्माप्रकाश के खिलाफ कांग्रेस ने टिकट दिया. इस चुनाव में जीतकर सांसद बनने के साथ सज्जन कुमार को रुतबा पूरे देश में जम गया था. संजय गांधी ने अपने पांच सूत्रीय कार्यक्रम में सज्जन कुमार को अहम जिम्मेदारी दी थी. हालांकि संजय गांधी के असमय हवाई जहाज क्रैश में हुए निधन से सज्जन कुमार को झटका लगा, लेकिन इससे वे प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के करीब आ गए थे.

क्या था 1984 के सिख विरोधी दंगे
साल 1984 में 31 अक्टूबर को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को उनके ही सिख बॉडीगार्ड्स ने पीएम आवास के अंदर ही गोलियों से छलनी कर दिया था. यह हत्या जून, 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सिख चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरावाला को पकड़ने के लिए भारतीय सेना को घुसने की इजाजत देने के विरोध में की गई थी. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत पूरे देश में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे. बड़े पैमाने पर सिखों की हत्याएं की गई थीं या फिर उन्हें मारपीट कर अधमरा कर दिया गया था. इन दंगों में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की संलिप्तता का दावा किया गया था. इनमें से ही सज्जन कुमार भी एक थे. इन दंगों के पीड़ितों में से बहुत सारे लोगों को आज तक भी न्याय नहीं मिला है और उनके केस अदालतों में लंबित हैं.

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