डीएनए एक्सप्लेनर
बलूचिस्तान संसाधनों से भरपूर होने के बावजूद गरीब है. इसके संसाधनों की लूट से पंजाब प्रांत संपन्न होता गया है और बलूचिस्तान खुद बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित है. अब यहां पाकिस्तान की पकड़ कमजोर होती जा रही है.
पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े आंतरिक संकट से जूझ रहा है. देश के सबसे बड़े प्रांत बलूचिस्तान पर उसकी पकड़ लगभग खत्म हो चुकी है. खैबर-पख्तूनवा में टीटीपी के सामने पाक फौज खड़ी नहीं हो पा रही और इसके अवैध कब्जे वाले कश्मीर में भी जनता सड़कों पर है. बलूचिस्तान ने तो 11 अगस्त को अपनी स्वतंत्रता भी घोषित कर दी. यहां बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे सशस्त्र समूह लगातार पाकिस्तानी फौज और प्रशासन पर हमले कर रहे हैं. बलूचिस्तान भू-भाग के मामले में पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है. अगर ये पाकिस्तान से अलग होकर नया देश बनता है तो पाकिस्तान के लिए कितना बड़ा झटका होगा, आइये जानते हैं.
बलूचिस्तान को पाकिस्तान की लाइफ-लाइन भी कहते हैं. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बलूचिस्तान से जुड़े संसाधनों, राजस्व, व्यापारिक मार्गों और रणनीतिक संपत्तियों पर बहुत ज़्यादा निर्भर है. जैसे-जैसे बलूचिस्तान अपने इलाके और संसाधनों पर नियंत्रण मज़बूत कर रहा है, पाकिस्तान का हालत पतली होती जा रही है. दशकों से पाकिस्तान इस इलाके का शोषण करता आ रहा है. संसाधनों के मामले में बेहद संपन्न बलूचिस्तान एक गरीब प्रांत है क्योंकि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान ने एक गुलाम कॉलोनी की तरह किया है.
बलूचिस्तान पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और सामरिक रणनीति की रीढ़ माना जाता है. बलूचिस्तान के पास अरब सागर से लगती 770 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा है. ये तटरेखा पाकिस्तान को वैश्विक व्यापार मार्गों और फारस की खाड़ी के मुहाने तक पहुंच देती है. चीन के पैसे से विकसित किया जा रहा ग्वादर बंदरगाह बलूचिस्तान प्रांत में ही है. यह बंदरगाह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का मुख्य केंद्र है. यह चीन को सीधे अरब सागर तक पहुंच प्रदान करता है, इसके बदले पाकिस्तान को अरबों डॉलर मिलते हैं.
बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से अत्यधिक समृद्ध है. पाकिस्तान यहां से कई बहुमूल्य खनिज और उत्पाद प्राप्त करता है. बलूचिस्तान का सुई गैस क्षेत्र से दशकों तक पूरे पाकिस्तान की औद्योगिक और घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया गया. बलूचिस्तान में दुनिया के सबसे बड़े तांबे और सोने के भंडार भी हैं. यहां पहाड़ों में क्रोमाइट, जिप्सम, कोयला, संगमरमर के भंडार हैं. स्पात निर्माण और सीमेंट उद्योग के लिए भी लिए पाकिस्तान बलूचिस्तान पर ही निर्भर है.
पाकिस्तान को बलूचिस्तान से सूखे मेवे और फल भी मिलते हैं. यहां सेब, अंगूर, चेरी, बादाम, अनार और खजूर का उत्पादन खूब होता है. दुनिया के अन्य देशों को मछली और झींगे के निर्यात में भी बलूचिस्तान के तटीय इलाकों का बड़ा योगदान है. देखा जाए तो बलूचिस्तान ने ही पाकिस्तान के औद्योगिक विकास को गति दी है.
बलोच नेता मीर यार बलोच ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा है कि आर्थिक सच्चाई को नजरंदाज करना अब नामुमकिन होता जा रहा है. बलूचिस्तान गणराज्य अपने इलाके और संसाधनों पर नियंत्रण मजबूत कर रहा है. इससे पाकिस्तान की बिना मंजूरी के बलूचिस्तान की दौलत निकालने और उसका फायदा उठाने की क्षमता को लगातार चुनौती मिल रही है.
मीर यार बलोच ने कहा है, बलूचिस्तान के सहयोग और मंजूरी के बिना, पाकिस्तान की आर्थिक जीवन-रेखाएं पहले की तरह काम नहीं कर पाएंगी. अगर वे राजस्व और संसाधन आखिरकार बंद हो जाते हैं, तो पाकिस्तानी सैन्य तंत्र को उस वित्तीय क्षमता का भारी नुकसान उठाना पड़ेगा जिसका इस्तेमाल वह लंबे समय से अपने सुरक्षा ढांचे को बनाए रखने और उग्रवादी व जिहादी नेटवर्क को समर्थन देने के लिए करता रहा है.
बलोच नेता मीर यार बलोच ने कहा है कि अपनी किस्मत खुद तय करने वाला बलूचिस्तान अपनी विशाल प्राकृतिक संपदा, रणनीतिक तटरेखा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को अपने लोगों की खुशहाली में बदल सकता है. पाकिस्तान इन संसाधनों का इस्तेमाल संघर्ष और अस्थिरता को बढ़ावा देने के लिए करता है. उन्होंने कहा है कि बलूचिस्तान के संसाधन बलूचिस्तान के हैं. इसकी दौलत का इस्तेमाल इसके लोगों, इसकी संप्रभुता और क्षेत्र में शांति के लिए होना चाहिए, न कि सैन्यवाद, चरमपंथ या अस्थिरता फैलाने के लिए.