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Waqf Amendment Bill: लोकसभा में वक्फ बिल पर लगी मंजूरी की मुहर, क्या इसके जरिये मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगा पाएगी BJP?

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल पर विपक्षी दलों के विरोध के बावजूद लोकसभा में करीब 12 घंटे लंबी मैराथन बहस के बाद इसे मंजूरी मिल गई है. ऐसे में इस बिल को लेकर भाजपा के राजनीतिक मकसद की चर्चा फिर शुरू हो गई है.

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Waqf Amendment Bill: लोकसभा में वक्फ बिल पर लगी मंजूरी की मुहर, क्या इसके जरिये मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगा पाएगी BJP?
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Waqf Amendment Bill: संसद में करीब 12 घंटे लंबी मैराथन बहस के बाद बुधवार (2 अप्रैल) को आखिरकार वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा की मंजूरी मिल गई है. इस बिल के विरोध में विपक्षी दलों ने तमाम दलीलें पेश की हैं, लेकिन उनके विरोध के बावजूद यह बिल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा गठबंधन की सरकार पारित कराने में सफल रही है. सदन में इसके समर्थन में जहां 288 वोट पड़े, वहीं इसके विरोध में 232 वोट आने से विपक्ष की इस मुद्दे पर एकजुटता भी साफ दिखाई दी है. ऐसे में एक बार फिर यह चर्चा शुरू हो गई है कि इस बिल को पारित कराने के पीछे भाजपा का मकसद क्या है? भाजपा इस बिल को लगातार आम मुस्लिम के मन की बात कह रही है, तो क्या इससे भाजपा विपक्षी दलों के मुस्लिम वोट बैंक में कुछ सेंध लगाने में सफल हो पाएगी? 

पहले वक्फ का मतलब जान लेते हैं
अरबी भाषा के 'वकुफा' से उर्दू भाषा का वक्फ शब्द बना है. वकुफा का मतलब रोकना या प्रतिबंधित करना होता है. इसी आधार पर वक्फ का मतलब 'संरक्षित करना' होता है. इस्लाम में वक्फ शब्द का अर्थ खुदा के नाम पर परोपकार के उद्देश्य से जन उपयोग के लिए दान दी गई संपत्ति को संरक्षित करने से है. देश में इस समय 32 राज्य वक्फ बोर्ड संचालित हैं, जिनके पास करीब 8 लाख एकड़ जमीन है. इस संपत्ति की अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये है. वक्फ बोर्ड के पास सेना और भारतीय रेलवे के बाद देश में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा जमीन है.

वक्फ कानून कब बना और अब क्या संशोधन हुआ है
अंग्रेजों ने 1913 में वक्फ बोर्ड का गठन किया, जिसे मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 के जरिये कानूनी रूप दिया गया. आजादी के बाद वक्फ अधिनियम, 1954 के जरिये वक्फ बोर्ड को रेगुलेशन किया गया. इसे वक्फ अधिनियम, 1995 के जरिये संशोधित कर ज्यादा ताकतवर बनाया गया और फिर संशोधन के जरिये वक्फ अधिनियम, 2013 से इसे और ज्यादा अधिकार दे दिए गए. इन्हीं कानूनों में सुधार के लिए वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 को मोदी सरकार लाई है. इसका मकसद वक्फ संपत्तियों पर हो रहे कब्जे, इनके रेगुलेशन और मैनेजमेंट की समस्याओं और किसी भी संपत्ति को बिना सुनवाई के वक्फ घोषित कर देने जैसे आरोपों का समाधान करना है. 

'एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ' सिद्धांत को लचीला बनाने का मकसद
राज्य वक्फ बोर्डों में 'एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ' सिद्धांत के आधार पर कामकाज हो रहा है. इसके लिए वक्फ अधिनियम की धारा 40 के दुरुपयोग का आरोप है, जिससे किसी की निजी संपत्ति को वक्फ घोषित कर दिया जाता है और फिर सुनवाई भी नहीं होती है. एक बार वक्फ घोषित की गई संपत्ति को दोबारा गैर-वक्फ घोषित नहीं किया जा सकता है. इससे बड़े पैमाने पर मुकदमे लंबित हैं. साथ ही मालिकाना हक के विवाद पैदा हो रहे हैं. वक्फ की जमीनों पर अवैध कब्जे भी बड़ी संख्या में हैं. इन्हीं सब समस्याओं का समाधान भी वक्फ संशोधन बिल के जरिये करने का दावा मोदी सरकार कर रही है. 

क्या आम मुस्लिम वक्फ कानून में संशोधन के पक्ष में?
भाजपा का दावा है कि आम मुस्लिम वक्फ कानून में संशोधन के पक्ष में है, क्योंकि सबसे ज्यादा परेशानी उन्हें ही उठानी पड़ रही है. भाजपा के मुताबिक, वक्फ बोर्डों ने सबसे ज्यादा मुस्लिमों की संपत्तियां ही कब्जाई हैं. इससे आम मुस्लिम वक्फ बोर्ड के समर्थन में नहीं है. हालांकि दो दिन पहले हुई ईद की नमाज को देखें तो भाजपा की यह बात पूरी तरह सही नहीं लगती है. कई शहरों में बड़े पैमाने पर मुस्लिम तबके के लोगों ने वक्फ संशोधन बिल के विरोध में काली पट्टियां बांधकर नमाज पढ़ी है. 

फिर भाजपा के लिए कैसे बनेगी इससे मुस्लिम वोटबैंक की राह?
मुस्लिमों ने वोट देने के मामले में हमेशा भाजपा का विरोधी पलड़ा ही थामा है. साल 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के समय आई CSDS की रिपोर्ट में कहा गया था कि 83 फीसदी मुस्लिमों ने भाजपा के बजाय सपा को वोट दिया था. यह ट्रेंड लोकसभा चुनाव-2024 में भी दिखा था, जब सपा 37 सीट यूपी में जीतने में सफल रही थी. इस लिहाज से देखा जाए तो मुस्लिम खेमे में भाजपा के लिए दरवाजे खुलते नहीं दिखे हैं. ऐसे में भाजपा के लिए वक्फ बिल के जरिये मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश कितनी कारगर होगी? यदि इस सवाल का जवाब भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता व वरिष्ठ पत्रकार अवनीश त्यागी देते हैं. अवनीश त्यागी के मुताबिक,'तीन तलाक कानून आने से पहले भी इसी तरह का माहौल था. यदि आप इंसानियत के लिहाज से देखें तो तीन तलाक कानून मुस्लिम औरतों को हक में था. आज यह बात मुस्लिम औरतें समझ भी रही हैं. यही हाल वक्फ का भी है. वक्फ बोर्ड चंद लोगों के व्यापारिक फायदे का जरिया बना हुआ है. यह असल मकसद से दूर हो गया है. कुछ खास लोगों को कब्जे के कारम यह गरीबों-महिलाओं को हित के काम से दूर हो गया है. किसी भी संपत्ति को वक्फ की कह दिया जाता है. कोई सुनवाई भी नहीं है. यहां मुजरिम ही अपील सुन रहा है.' 

अवनीश त्यागी आगे कहते हैं,'आप ही बताइए, क्या कोई चीज संविधान से, सुप्रीम कोर्ट से भी ऊपर हो सकती है? वक्फ के पास 9 लाख एकड़ जमीन है. अपील कहीं होनी नहीं है. आप डीएम, जज के पास नहीं जा सकते. ऐसे में ये सिस्टम (वक्फ संशोधन बिल) लाना जरूरी था. इसका लाभ आने वाली नस्लों को पता लगेगा. विपक्षी दल कठमुल्लापन की राजनीति कर रहे हैं. ये संविधान को एकतरफ रखकर शरीयत की बात करने लगते हैं. दरअसल जो सुधार अब हो रहा है, वो आजादी के बाद ही हो जाना चाहिए था. अब राजनीतिक फायदे के लिए एक वर्ग विशेष की वोट के भूखे लोगों को इन सुधारों से दर्द हो रहा है. ये बात आम आदमी भी समझ रहा है.'

किस तरह मिलेगा भाजपा को इस कवायद का लाभ
अवनीश त्यागी मानते हैं कि वक्फ कानून पर इस कवायद का लाभ भाजपा को जरूर मिलेगा. उनके मुताबिक,'वक्फ कानून से सबसे ज्यादा प्रभावित ग्राम पंचायतें हुई हैं. कोई भी पटवारी-लेखपाल वर्ग विशेष से आया और पंचायत की जमीनों को वक्फ के नाम लिख गया. इसकी सुनवाई भी नहीं हो सकती. पंचायतों के पास ऊसर की जमीनें नहीं बची हैं. अब इस पर लगाम लेगी, अवैध कब्जे हटेंगे तो विकास योजनाओं के लिए जमीनें निकलकर आएंगी. पंचायतों को लाभ होगा तो ग्रामीणों को भी लाभ होगा. इसका 100 फीसदी राजनीतिक लाभ हमारी पार्टी को मिलेगा.'

'भाजपा को लाभ हो या ना हो, उसके सहयोगियों को नुकसान होगा'
वरिष्ठ पत्रकार हरवीर सिंह का इस मुद्दे पर अलग नजरिया है. हरवीर मानते हैं कि वक्फ बिल से भाजपा को मुस्लिम वोट बैंक का लाभ मिलेगा या नहीं, लेकिन उसके सहयोगी दलों को जरूर नुकसान हो सकता है. इन दलों को कोर वोटबैंक में मुस्लिम भी शामिल हैं. उन्होंने कहा,'वक्फ बिल सही है या गलत, ये व्यापक डिबेट का इश्यू है. भाजपा की लगातार कोशिश है कि मुस्लिमों में उन्हें लेकर जो धारणा है, उसे बदला जा सके. ऐसे में उन्हें हर मुद्दे पर यह दिखाना पड़ता ही है कि हम सबके साथ हैं. लेकिन ना उनके पास कोई मुस्लिम सांसद है और ना मंत्री ही  मुस्लिम है. ऐसे में सिर्फ वक्फ बिल से मुस्लिम नर्म हो जाएगा, ये मुश्किल ही है. इस (बिल) से मुस्लिमों को कैसे फायदा होगा? ये भी साबित करने की बात है.' 

हरवीर यह जरूर मानते हैं कि मौजूदा वक्फ बिल में संशोधन की जरूरत है. उन्होंने कहा,'पूरे देश में वक्फ संपत्तियां हैं, जिनका बैनेफिट पहले से ही पॉलीटिक्ल सिस्टम भी लेता रहा है. इसलिए इन संपत्तियों को लेकर ट्रांसपेरेंसी की जरूरत तो है, लेकिन इसके लिए पूरे देश में बड़ी डिबेट की जरूरत है. इसमें ये नहीं लगना चाहिए कि बहुमत ने अपनी मनमानी करके कोई कानून बना लिया है. यदि आपकी (भाजपा की) नीयत साफ है तो इस पर पूरे देश में विस्तृत बहस करानी चाहिए. भाजपा के सहयोगी दलों चाहे TDP हो, JDU हो या पासवान की LJP हो, सभी के कोर वोट बैंक में मुस्लिम वोटर्स भी हैं, जो इस मुद्दे पर उनसे छिटक सकते हैं. इसलिए मेरे ख्याल से भाजपा को वक्फ बिल से मुस्लिम वोट बैंक में घुसने का मौका मिले या नहीं मिले, उसे राजनीतिक फायदा हो या ना हो, लेकिन सहयोगियों को नुकसान हो जाएगा. इसलिए ऐसा नहीं लगना चाहिए कि परपीड़ा करके भाजपा ने यह काम करा लिया है. पहले देश में बहस आयोजित करके नफा-नुकसान बताए जाएं और फिर ऐसा कानून लाना चाहिए.'

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