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Russia-Ukraine War को ख़त्म करने के लिए Trump ने आईडिया अच्छा दिया, लेकिन...

रूस यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर दावोस में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी बात की है. उन्होंने सऊदी अरब से रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अपने तेल की कीमतों को कम करने को कहा है। ट्रंप की इस बात ने एक नई डिबेट को आंच दे दी है हुए प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है.

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Russia-Ukraine War को ख़त्म करने के लिए Trump ने आईडिया अच्छा दिया, लेकिन...
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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध ख़त्म होगा? या फिर इसकी आड़ में दुनिया के तमाम देश अपने को खेमों में बांट लेंगे? जैसे सवाल हर उस शख्स के जेहन में हैं जो शांति का पैरोकार है और अमन सुकून की बातें करता है. मगर वो लोग जिन्हें, इस युद्ध से सीधा फायदा मिल रहा है. कभी नहीं चाहेंगे कि लड़ाई ख़त्म हो. एक ऐसे वक़्त में जब रूस यूक्रेन युद्ध के तहत पूरा विश्व विनाश का गवाह बन चुका हो. अमेरिका इस लड़ाई के खात्मे के लिए आगे आया है. स्विट्ज़रलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति ने ओपेक पर दबाव बनाने का वादा किया. 

ट्रंप का दावा था कि तेल की कीमत में गिरावट से यूक्रेन पर रूस का पूर्ण आक्रमण समाप्त हो जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) से तेल की कीमत कम करने के लिए कहेंगे, उन्होंने कहा कि इससे यूक्रेन पर रूस का पूर्ण आक्रमण 'तुरंत' समाप्त हो जाएगा.

ट्रंप के अनुसार, 'अभी कीमत इतनी अधिक है कि युद्ध जारी रहेगा, आपको तेल की कीमत कम करनी होगी और युद्ध समाप्त करना होगा. ध्यान रहे कि ओपेक में इराक, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित 12 तेल समृद्ध देश शामिल हैं, जो सामूहिक रूप से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 40% हिस्सा हैं.

एक समूह के रूप में उनकी विशाल ताकत का मतलब है कि वे उत्पादन को बढ़ाकर या घटाकर तेल की कीमत को नाटकीय रूप से प्रभावित कर सकते हैं. ट्रंप ने सऊदी अरब और ओपेक पर तेल की कीमतें कम करने के लिए दबाव डालने का वादा किया, यह सुझाव देते हुए कि सैन्य सहायता के बजाय आर्थिक उपाय संघर्ष को समाप्त करने की कुंजी हो सकते हैं.

हाल ही में शपथ ग्रहण करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति ने युद्ध को समाप्त करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सीधे जुड़ने की इच्छा भी व्यक्त की. हालांकि उन्होंने इस बारे में विवरण नहीं दिया है कि वे शांति वार्ता कैसे करेंगे, ट्रम्प ने जोर देकर कहा है कि 'यूक्रेन एक समझौता करने के लिए तैयार है'.

ट्रम्प की रणनीति की संभावना स्पष्ट नहीं है. रूस ने लगभग तीन साल पहले यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू होने के बाद से अमेरिका और यूरोपीय प्रतिबंधों का सामना किया है. तेल रूस का अमेरिका को सबसे बड़ा निर्यात था, लेकिन 2023 में यह व्यापार शून्य हो गया.

इस बीच, ईरान ओपेक का सदस्य और रूस का सहयोगी दोनों है, और माना यही जा रहा है कि ईरान ट्रंप की प्रस्तावित योजना के खिलाफ़ जा सकता है. हालांकि, ट्रंप घरेलू तेल और गैस के लिए अमेरिका में ड्रिलिंग की एक नई लहर का आदेश देने का भी प्रस्ताव कर रहे हैं, जिससे वैश्विक कीमतों में भी गिरावट आ सकती है और रूस पर दबाव पड़ सकता है.

बीते दिन अपने रात्रिकालीन संबोधन में, यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमर ज़ेलेंस्की ने कई बड़ी बातें की हैं और ऐसा बहुत कुछ कहा है जो बताता है कि रूस हर हाल में इस युद्ध को जारी रखना चाहता है. ज़ेलेंस्की ने कहा कि, 'ऊर्जा संसाधन और विशेष रूप से तेल शांति और वास्तविक सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कुंजी हैं.'

वहीं उन्होंने ये भी कहा कि, 'ऊर्जा संसाधनों के मामले में यूरोप को रूस के साथ नहीं, बल्कि अमेरिका और दुनिया के अन्य भागीदारों के साथ अधिक काम करने की आवश्यकता है.'

ध्यान रहे कि इस सप्ताह की शुरुआत में, ट्रम्प ने यह भी धमकी दी थी कि अगर पुतिन युद्ध को समाप्त करने के लिए कोई समझौता नहीं करते हैं, तो वे रूस पर 'उच्च स्तर के कर, शुल्क और प्रतिबंध' लगा देंगे.

क्रेमलिन ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि ट्रम्प की योजनाओं के अनुसार यूक्रेन में समझौता संभव नहीं होगा, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि, युद्ध तेल की कीमतों पर निर्भर नहीं करता है.

इसके बजाय, पेसकोव ने मास्को के कथन को दोहराया कि यूक्रेन पर उनका पूर्ण आक्रमण उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कथित 'खतरे' से उपजा है. उन्होंने कहा कि पुतिन ट्रम्प से संपर्क करने के लिए तैयार हैं.

बहरहाल अब जबकि ट्रंप मध्यस्थता का मूड बना ही चुके हैं. तो देखना दिलचस्प रहेगा कि रूस और यूक्रेन के बीच में संधि होती है या नहीं. बाकी बात डोनाल्ड ट्रंप की चल रही है तो युद्ध को लेकर ये जो अनोखा आईडिया उन्होंने दिया है उसे लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

मामले पर लगातार प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. यदि उन प्रतिक्रियाओं को देखें और उनका अवलोकन करें तो कहा यही जा रहा है कि अब युद्ध की समाप्ति इस बात पर निर्भर करेगी कि इस पूरे मसले पर अमेरिका और ट्रंप का रुख क्या रहता है. 

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