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Explained: भारतीय सेनाओं के लिए जल्द ही लागू होगी 'थिएटर कमांड' योजना, जानिए कैसे बदल जाएगा पूरा सैन्य ढांचा

वर्तमान में भारत की थल सेना, नौसेना और वायु सेना अपना-अपना काम अलग-अलग करती हैं. सभी सेनाएं अलग-अलग ट्रेनिंग करती हैं और अलग-अलग योजना बनाती हैं. 'थिएटरइजेशन' इस व्यवस्था को पूरी तरह बदल देगा. अब तीनों सेनाओं के ऑपरेशन को एक ही कमांडर निर्देशित करेगा.

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Explained: भारतीय सेनाओं के लिए जल्द ही लागू होगी 'थिएटर कमांड' योजना, जानिए कैसे बदल जाएगा पूरा सैन्य ढांचा

भारत को तीन मुख्य थिएटर कमांड में बांटने की योजना है. (AI इमेज)

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  • 'थिएटरइजेशन' की योजना इसी साल लागू हो सकती है.
  •  सेनाओं को 'यूनिफाइड थिएटर कमांड' के अंडर लाने की तैयारी पूरी.
  • भारत के बड़े भूगोल को देखते हुए इसे तीन मुख्य थिएटर कमांड में बांटने की योजना है.

India's theatre command plan: लगभग 20 सालों की लंबी चर्चा और योजना के बाद, भारत की तीनों सेनाओं को एकीकृत करने वाला ऐतिहासिक सैन्य सुधार 'यूनिफाइड थिएटर कमांड' अब अंतिम मंजूरी के बेहद करीब पहुंच गया है. भारत की सेनाओं को 'यूनिफाइड थिएटर कमांड' के अंडर लाने का फैसला युद्ध लड़ने के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है. एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, 'थिएटरइजेशन' से जुड़ी फाइल अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पास फैसले के लिए पहुंचने वाली है.  इस योजना की प्रस्तुति जुलाई में 'कारगिल विजय दिवस' के बाद होगी. 'थिएटर कमांड' क्यों जरूरी है और इससे क्या फायदा होगा, आइये जानते हैं विस्तार से. 

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'थिएटर कमांड' क्या है?

भारत की तीनों सेनाएं अभी स्वतंत्र रूप से काम करती हैं. थल सेना, नौसेना और वायु सेना के पास कुल मिलाकर 17 अलग-अलग सिंगल-सर्विस कमांड हैं. युद्ध की स्थिति में भी सेनाएं अलग-अलग कमांडरों से निर्देश लेती हैं. लेकिन थिएटर कमांड का मतलब है एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र के लिए तीनों सेनाओं के संसाधनों को एक ही कमांड और कमांडर के अधीन लाना. थिएटर कमांड बन जाने के बाद एक ही कमांडर के नेतृत्व में सैनिक, लड़ाकू विमान और युद्धपोतों जैसे संसाधन होंगे. एक फोर स्टार जनरल थिएटर कमांड का नेतृत्व करेगा. युद्ध या आपातकाल की स्थिति में इससे तुरंत और प्रभावी फैसले लेने में आसानी होगी. 

कैसी होगी 'थिएटर कमांड' की संरचना?

भारत के बड़े भूगोल को देखते हुए इसे तीन मुख्य थिएटर कमांड में बांटने की योजना है. इसके तहत उत्तरी थिएटर कमांड, पश्चिमी थिएटर कमांड और मैरीटाइम थिएटर कमांड बनाए जाएंगे. उत्तरी थिएटर कमांड का कंट्रोल सेना को दिया जा सकता है जो चीन से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा और सैन्य अभियानों का जिम्मा संभालेगी. पश्चिमी थिएटर कमांड  पूरी तरह से पाकिस्तान सीमा और उससे जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को संभालेगा और यह एयर फोर्स के जिम्मे आ सकता है. मैरीटाइम थिएटर कमांड भारत के विशाल तटीय क्षेत्रों, हिंद महासागर और समुद्री सुरक्षा से जुड़े नौसैनिक और सैन्य ऑपरेशन्स को देखेगा. चार नए फोर-स्टार पद बनाए जाने का भी प्रस्ताव है जो वर्तमान सेना प्रमुखों के समकक्ष होंगे.  इसमें एक नया पद वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का भी होगा. 

'थिएटर कमांड' की जरूरत क्यों है?

इस सुधार की सिफारिश साल 1999 के कारगिल युद्ध के बाद गठित कमेटियों ने की थी. माना गया कि तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बेहतर करने के लिए 'थिएटर कमांड' जरूरी हैं.  लेकिन इसे लागू करने में दो दशक से अधिक का समय लगा. इसके लिए लंबा मंथन चला. सभी सेनाओं की राय ली गई. भारतीय वायुसेना के पास संसाधन सीमित हैं. इनके बंटवारे को लेकर भी काफी सोच विचार किया गया है. पिछले 20 महीनों में पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान द्वारा तैयार किए गए खाके में इन चिंताओं को सुलझाने का प्रयास किया गया है. 

'थिएटर कमांड' बनाने का फैसला तेजी से बदलती भू-राजनीति और युद्ध के बदलते तरीकों को देखते हुए भी लिया गया. चीन ने बहुत पहले ही अपनी सेना को 'थिएटर कमांड' में बदल दिया है. इससे पीएलए का का रिस्पॉन्स टाइम बहुत तेज हो गया है. बजट भी एक बड़ा फैक्टर है. तीनों सेनाएं जब मिलकर काम करेंगी, तो हथियारों और रसद की खरीद में दोहराव कम होगा. इससे श के रक्षा बजट का सही उपयोग हो सकेगा.  मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए चार दिवसीय संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर) के बाद इस सैन्य सुधार की प्रक्रिया को और तेज गति मिली. अब अगर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) इस प्रस्ताव को पास कर देती है, तो भारत दुनिया के चुनिंदा शक्तिशाली देशों के क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनकी सेनाएं अलग-अलग काम करने के बजाय एकीकृत ज्वाइंट कमांड के तहत काम करती हैं. अभी तक ऐसी सैन्य संरचना अमेरिका और चीन के पास ही है. 

कैसे बदल जाएगा युद्ध लड़ने का तरीका

भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल पी आर शंकर इसे समझाते हुए बताते हैं कि 'थिएटर कमांड' बनने के बाद तीनों सेनाएं अपनी अलग-अलग रणनीति नहीं बनाएंगी. तीनों सेनाएं मिलकर काम करेंगी. युद्ध के मैदान में सेना और वायुसेना के संसाधन एक साथ तैनात होंगे. एक ही थियेटर कमांडर ये तय करेगी कि कहां सेना का इस्तेमाल करना है और कहां वायुसेना का. आज के समय में युद्ध केवल जमीन, आसमान और पानी तक सीमित नहीं हैं. इसमें  स्पेस, साइबर भी शामिल हो गए हैं. भविष्य में जमीनी हमला, हवाई हमला, मिसाइल हमला और नेवी की मूवमेंट, सब एक कमांडर के फैसले पर होगा. वास्तव में ऑपरेशनल मामलों में थियेटर कमांडर सबसे ताकतवर सैन्य अधिकारी होगा. 

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