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क्या Champions Trophy के बसंत में दर्शकों, मीडिया कवरेज का पतझड़ झेल रहा है WPL? 

Champions Trophy और महिला प्रीमियर लीग (WPL )एक साथ हो रहे हैं. लेकिन विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे सितारों के सामने क्या क्रिकेट का बल्ला थामने वाली महिलाएं और WPL सुर्खियां बटोर पा रहे हैं? यह प्रश्न अपने आप में बहुत बड़ा और जरूरी है.

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क्या Champions Trophy के बसंत में दर्शकों, मीडिया कवरेज का पतझड़ झेल रहा है WPL? 
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Champions Trophy न सिर्फ भारत बल्कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया समेत विश्व के तमाम देशों में लोगों के बीच कौतूहल का विषय है. चाहे वो मेन स्ट्रीम मीडिया हो या फिर सोशल मीडिया, कहीं भी रुख कर लिया जाए तो चैंपियंस ट्रॉफी के प्रति लोगों का उत्साह देखने वाला है. मगर क्या क्रिकेट के नाम पर सिर्फ चैंपियंस ट्रॉफी का ही आयोजन हो रहा है? ये सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि WPLया ये कहें कि महिला प्रीमियर लीग के रूप में क्रिकेट का एक और दिलचस्प टूर्नामेंट चल रहा है.  मगर दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि, उसे वो कवरेज न तो मीडिया दे रहा है.  न ही उसे लेकर सोशल मीडिया पर किसी तरह के कोई ट्रेंड की शुरुआत हुई है.  

ध्यान रहे कि महिला प्रीमियर लीग (WPL) के तीसरे सीज़न में पांच टीमों के बीच टूर्नामेंट शुरू हुए एक हफ़्ते से ज़्यादा हो गया है.  लेकिन जिस तरह WPL चर्चाओं से दूर है. कहना गलत नहीं है कि महिला क्रिकेट को लेकर सच्चाई यही है.

सुनने में भले ही ये कड़वा हो, मगर भारत जैसे देश में जहां लोग क्रिकेट को जीते हैं. यदि वहां भी WPLसुर्खियों में जगह नहीं बना पाता तो स्वतः इस बात की पुष्टि हो जाती है कि महिला क्रिकेट को जनता के बीच लोकप्रिय होने में अब भी लंबा वक़्त लगेगा.

शायद आपको यह बातें अटपटी लगें. आप इसे मिथ्या की संज्ञा देते हुए यह कह दें कि WPL को लेकर हमारे द्वारा अनर्गल बातें की जा रही हैं. मगर सच्चाई तब सामने आ जाती है जब हम स्वघोषित क्रिकेट लवर्स से यह सवाल करते हैं कि WPL में ख़िताब अपने नाम कौन करेगा? ऐसी स्थिति में अधिकांश लोग अपनी बगलें झांकते हुए नजर आएंगे. 

हो सकता है कि किसी क्रिकेट लवर से जवाब यह भी मिले कि, 'हम ये सब नहीं देखते.' सिर्फ़ निराशाजनक होने से ज़्यादा, जवाब में एक और गंभीर मुद्दा झलकता है- देश में महिला क्रिकेट के लिए सम्मान की कमी.

ध्यान रहे कि पिछले दिसंबर में, जब चैंपियंस ट्रॉफी का कार्यक्रम घोषित किया गया, तो इसने पुरुषों के क्रिकेट के लिए एक व्यस्त कैलेंडर की शुरुआत की, जिसमें दो महीने तक चलने वाला इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) भी शामिल था. इससे अधिकारियों को WPL के शेड्यूल को लेकर परेशानी हुई, क्योंकि IPL मार्च से मई तक अपने सामान्य समय पर चलता था.

यह सुनिश्चित करना हमेशा एक चुनौती थी कि WPL किसी भी हाई-प्रोफाइल पुरुष टूर्नामेंट से न टकराए. अंत में, चैंपियंस ट्रॉफी शुरू होने से पहले पांच WPL मैच पुरुष क्रिकेट के साथ ओवरलैप किए बिना हुए. हालांकि, BCCI ने यह सुनिश्चित करके एक स्मार्ट कदम उठाया कि जिस दिन भारतीय पुरुष टीम खेल रही थी, उस दिन कोई WPL गेम शेड्यूल न हो.

अब, कल्पना करें कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और मुंबई इंडियंस (MI) उसी दिन खेल रहे हैं, जब विराट कोहली ने पाकिस्तानी गेंदबाजों पर हावी होकर भारत को दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शानदार जीत दिलाई. दोनों टूर्नामेंट एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने के बावजूद, यह अनुमान लगाना आसान है कि अधिकांश दर्शक कौन सा मैच देखना पसंद करेंगे.

जैसे हालात हैं यह कहना भी गलत नहीं है कि WPL को वास्तव में सफल बनाने के लिए, BCCI को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस अवधि के दौरान कोई भी प्रमुख पुरुष क्रिकेट शेड्यूल न हो - जिससे उसे सांस लेने और गहरी सांस लेने की जगह मिल सके.

विषय बहुत सीधा है.  WPL के तहत अब तक तमाम टूर्नामेंट्स हो चुके हैं. लेकिन जिस तरह अब तक हमें उनकी कोई जानकारी नहीं है. कहीं न कहीं यह पुष्टि हो जाती है कि क्रिकेट उसमें भी महिला क्रिकेट के प्रति हमारे नजरिये में खोट है.  

अगर सच में हम अपने को क्रिकेट के लिए दीवाना समझते हैं, अपने को क्रिकेट लोवर कहते हैं तो हमें इस बात को भी समझना होगा कि WPL भी IPL की तरह ही रोमांचकारी है. भले ही इसमें अभी तक विराट कोहली या रोहित शर्मा जैसे नामी-गिरामी लोग न हों, लेकिन स्मृति मंधाना, हरमनप्रीत कौर और एलीस पेरी जैसे सितारों के साथ, यह रोमांच के साथ साथ हमें भरपूर एंटरटेनमेंट देता है.

महिला क्रिकेट की लोकप्रियता भी एक बड़ा विषय है इसलिए पूर्व BCCI सचिव और वर्तमान ICC अध्यक्ष जय शाह ने खुलासा किया कि WPL को टीवी पर तीन करोड़ दर्शकों ने देखा - जो कि 150% की चौंका देने वाली वृद्धि है.

ध्यान रहे इस साल के अंत में, भारत बहुप्रतीक्षित महिला वनडे विश्व कप की मेज़बानी करेगा. ऐसे में  WPL के प्रचार और प्रसार को इसलिए भी किया जाना चाहिए क्योंकि इसके बाद ही भारतीय महिला क्रिकेट को दिशा और दशा दोनों मिलेगी.

बहरहाल हम फिर इस बात को कहेंगे कि भारत जैसे देश में महिला क्रिकेट एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है.

ऐसे में भविष्य में विश्व कप में स्मृति मंधाना के मैदान में उतरने से टीआरपी में उछाल आएगा? लोग उनके या किसी और महिला खिलाड़ी के नाम के नारे लगाएंगे? इसका फैसला तो वक़्त करेगा. लेकिन जो वर्तमान है वो इस बात की पुष्टि कर देता है कि महिला क्रिकेट के लिहाज से बीसीसीआई को अभी और मेहनत करने की जरूरत है.  

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