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यूक्रेन के लिए कैसी रहेगी अमेरिका समर्थित सुरक्षा गारंटी, क्या होगा असर?  

यूक्रेन में युद्ध समाप्त होने पर शांति सुनिश्चित करने के एक तरीके के रूप में सुरक्षा गारंटी की चर्चा लंबे समय से होती रही है. माना जा रहा है कि अमेरिकी समर्थन के बिना इसकी कल्पना की ही नहीं जा सकती. देखना दिलचस्प रहेगा कि ट्रंप इसके लिए क्या कदम उठाते हैं.

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यूक्रेन के लिए कैसी रहेगी अमेरिका समर्थित सुरक्षा गारंटी, क्या होगा असर?  
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लंबे वक्त से रूस के साथ चली आ रही जंग को खत्म करने की कोशिशों के बीच, यूक्रेन के लिए 'सुरक्षा गारंटी' किसी भी बातचीत में सबसे आगे रही है. पश्चिमी नेताओं ने यूक्रेन में किसी भी शांति समझौते की रक्षा और रूस को भविष्य में हमले से बचाने के लिए सुरक्षा गारंटी का वादा किया है. लेकिन इस बारे में कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है कि इसमें क्या शामिल हो सकता है और अमेरिका इसमें क्या योगदान दे सकता है.

जब सभी की नज़रें अलास्का में व्लादिमीर पुतिन के साथ डोनाल्ड ट्रंप की शिखर वार्ता से हटकर वाशिंगटन में वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ बातचीत पर टिक गईं, तो व्हाइट हाउस ने दावा किया कि रूस ने लड़ाई समाप्त होने पर अमेरिका द्वारा 'नाटो-शैली की सुरक्षा' प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की है.

हालांकि क्रेमलिन की ओर से कोई पुष्टि नहीं हुई है.  यूक्रेन, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी सहयोगियों का कहना है कि युद्धोत्तर सुरक्षा समझौते के विवरण को आने वाले दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा.

तो आखिर कैसी होगी सुरक्षा गारंटी?

यूक्रेन में युद्ध समाप्त होने पर शांति सुनिश्चित करने के एक तरीके के रूप में सुरक्षा गारंटी की चर्चा लंबे समय से होती रही है. मार्च से, जब ब्रिटेन और फ्रांस ने बड़े पैमाने पर यूरोपीय 'इच्छुक लोगों के गठबंधन' और संभावित शांति सेना का नेतृत्व किया था, कई लोगों ने दावा किया है कि अमेरिकी समर्थन के बिना यह अप्रभावी होगा.

अमेरिका ने अब तक अपनी भागीदारी के बारे में बार-बार कुछ कहने से इनकार किया है.

अभी बीते दिनों ही फॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय देश सुरक्षा समझौते में सैनिकों को 'अग्रिम रूप से' तैनात करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि, 'वे ज़मीन पर सैनिक तैनात करना चाहते हैं,'उन्होंने विशेष रूप से ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी का ज़िक्र किया.

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका ज़मीनी सैनिक नहीं भेजेगा. वहीं ब्रिटेन के पीएम स्टारमर ने कहा कि इच्छुक देशों का गठबंधन 'शत्रुता समाप्त होने' की स्थिति में 'एक आश्वासन बल की तैनाती की तैयारी' कर रहा है.

यही इस गठबंधन का मूल आधार था - विभिन्न यूरोपीय और सहयोगी देशों के सैनिकों को रूस को भविष्य में हमले करने से रोकने के लिए यूक्रेन में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया था. हालांकि, एक सरकारी मंत्री ने इस बात की पुष्टि करने से इनकार कर दिया कि क्या ब्रिटिश सैनिकों को यूक्रेन भेजा जाएगा.

पूरा मामला किस हद तक पेचीदा है सैन्य विश्लेषक सीन बेल की उस बात से समझ सकते हैं जिसमें उनका कहना है कि अंततः, केवल सैनिक ही व्लादिमीर पुतिन के लिए पर्याप्त निवारक नहीं होंगे. बेल के मुताबिक, 'यह सब विश्वसनीयता का मामला है और मुझे नहीं लगता कि ज़मीनी स्तर पर सैनिकों की तैनाती कोई विश्वसनीय जवाब है.'

रूस के साथ यूक्रेन की 1,000 मील लंबी सीमा पर सैनिकों को तैनात करने के लिए एक समय में लगभग 1,00,000 सैनिकों की आवश्यकता होगी, जिन्हें प्रशिक्षित, तैनात और बारी-बारी से तैनात करना होगा, कुल मिलाकर 3,00,000 सैनिकों की आवश्यकता होगी.

बेल का कहना है कि पूरी ब्रिटिश सेना इसका केवल 10% ही बना पाएगी, जबकि फ्रांस संभवतः 10% और योगदान दे सकेगा.

कई यूरोपीय देश यूक्रेन से अपनी निकटता और आगे रूसी आक्रमण के जोखिम के कारण एक व्यापक बल के लिए अपने सैनिकों का त्याग करने में असमर्थ महसूस करेंगे.अमेरिका की तरह इटली ने भी कहा है कि वह अपने सैनिक भेजने के लिए तैयार नहीं है.

बेल आगे कहते हैं, 'आपको आवश्यक संख्याएं मिलने के आस-पास भी नहीं हैं. और अगर आप ऐसा कर भी पाते हैं, तो रूस के सामने एक ही देश में नाटो की सभी अग्रिम पंक्ति की सेनाओं को तैनात करना वास्तव में खतरनाक होगा. और चीन, उत्तर कोरिया, ईरान या रूस को अपनी मनमानी करने की छूट मिल जाएगी.'

'अनुच्छेद 5 जैसी सुरक्षा'

जब अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने दावा किया कि पुतिन अलास्का शिखर सम्मेलन के दौरान सुरक्षा गारंटी पर सहमत हुए थे, तो उन्होंने इसे 'अनुच्छेद 5 जैसा' या 'नाटो-शैली' बताया. बता दें कि अनुच्छेद 5 नाटो के संस्थापक सिद्धांतों में से एक है और कहता है कि इसके 32 सदस्य देशों में से किसी पर भी हमला उन सभी पर हमला माना जाएगा.

1949 में अपनी स्थापना के बाद से इसका इस्तेमाल केवल एक बार किया गया है.  (2001 के 9/11 हमलों के जवाब में अमेरिका द्वारा. )

रूस ने बार-बार ज़ोर दिया है कि यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए और 2022 में कीव पर हमले के अपने मूल कारणों में इसके होने के जोखिम का हवाला दिया है.

नाटो महासचिव मार्क रूट ने कहा है कि यूक्रेन की सदस्यता पर विचार नहीं हो रहा है, लेकिन एक वैकल्पिक 'अनुच्छेद 5-प्रकार' व्यवस्था व्यवहार्य हो सकती है.

यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह के विशेष सुरक्षा समझौते और औपचारिक नाटो सदस्यता में क्या अंतर होगा. बेल का कहना है कि इस पर बातचीत - और यूक्रेनी क्षेत्र का आत्मसमर्पण - युद्ध समाप्त करने में दो सबसे कठिन कदम होंगे.

लेकिन वह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि ये दोनों ही इच्छुक देशों के गठबंधन द्वारा अब तक की गई पेशकश को 'असली रूप' प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

बेल आगे कहते हैं, 'यह उन चीज़ों को खोजने की कोशिश होगी जो यूक्रेन की सुरक्षा के लिए पश्चिमी प्रतिबद्धता को स्थायी बनाएं.'

अमेरिकी वायुशक्ति, खुफिया जानकारी और एक बेहतर यूक्रेनी सेना

सुरक्षा समझौते के अन्य संभावित विकल्पों में हवाई सहायता, समुद्री क्षेत्र निषेध, खुफिया जानकारी साझा करना और सैन्य आपूर्ति शामिल हैं. बेल ने कहा है कि यूक्रेन के ऊपर उड़ान निषेध या ब्लैक सी के पार समुद्री क्षेत्र निषेध लागू करना 'नाटो की ताकत के अनुकूल होगा,'  ऐसा इसलिए क्योंकि अकेले अमेरिकी वायु और नौसैनिक क्षमताएं रूस से कहीं आगे हैं.

बहरहाल मामले के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका 'मदद करने को तैयार है... खासकर, शायद हवाई मार्ग से', जिसकी पुष्टि बाद में उनकी प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने पत्रकारों से करते हुए की कि अमेरिकी हवाई सहायता एक 'विकल्प और संभावना' है.

बेल ने आगे कहा कि भविष्य में किसी भी रूसी आक्रमण की चेतावनी देने के लिए कीव के साथ अमेरिकी खुफिया जानकारी साझा करना भी किसी भी संभावित निवारक बल के लिए एक 'बड़ी ताकत' होगी.

ज़ेलेंस्की ने इस हफ़्ते कहा कि यूक्रेन पहले ही यूरोपीय धन की मदद से 90 अरब डॉलर (66.6 अरब पाउंड) के अतिरिक्त अमेरिकी हथियार खरीदने की पेशकश कर रहा है.

बेल का कहना है कि किसी भी सुरक्षा समझौते में अन्य सैन्य उपकरणों, रसद और प्रशिक्षण को शामिल किया जा सकता है ताकि यूक्रेन आने वाले वर्षों में अपनी बेहतर रक्षा कर सके.

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