डीएनए एक्सप्लेनर
कजाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए रूसी हथियारों पर ही निर्भर है. SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्ताना अपनी जरूरत के करीब 88 फीसदी हथियार रूस से आयात करता है. कजाकिस्तान रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) का एक प्रमुख सदस्य है, जो नाटो की तरह काम करता है.
मध्य एशिया में अभी रूस का ही सिक्का चलेगा. चीन ने सोवियत यूनियन से टूटे देशों का भरोसा जीतने की बहुत कोशिशें कर लीं, लेकिन वो देश अभी रूस के साथ ही रहना चाहते हैं. इसका सबसे ताजा उदाहरण कजाकिस्तान का है, जो अपनी वायुसेना के लिए फाइटर जेट्स खरीदना चाहता है. वो बीजिंग के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का भी हिस्सा है, लेकिन जब बात हथियारों की आती है तो भरोसा अपने पुराने सहयोगी मॉस्को पर ही जता रहा है. उसने मॉस्को के 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट Su-57 में दिलचस्पी दिखाई है.
रक्षा से जुड़ी वेबसाइट डिफेंस सिक्योरिटी एशिया डॉट कॉम ने रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि कजाकिस्तान को रूस से 2028 तक 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट Su-57E मिल सकते हैं. हालांकि इस रिपोर्ट पर दोनों पक्षों में से किसी की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. अगर ये डील पूरी हो जाती है तो कजाकिस्तान रूस के बाद 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान का संचालन करने वाला दूसरा पूर्व सोवियत देश बन जाएगा और अल्जीरिया के बाद दूसरा मॉस्को का ग्राहक देश होगा.
अगर रूस और कजाकिस्तान की डील पर मुहर लगती है तो ये मॉस्को की रणनीतिक जीत होगी क्योंकि इस क्षेत्र में चीन अपनी उपस्थिति बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रहा है. हाल ही में चीन ने उज्बेकिस्तान को अपने J-10C लड़ाकू विमान भी दिए हैं. इसके अलावा कजाकिस्तान के अंदर लाखों करोड़ों का निवेश भी करके रखा है, बावजूद इसके अस्ताना ने एक बार फिर रूस पर ही भरोसा जताया है. ये डील मध्य एशिया में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव के खिलाफ रूस की सिकुड़ती हुई स्थिति का बचाव करेगा.
रूस से 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट मिलने के बाद कजाकिस्तान अपना पुराना रूसी Su-27 बेड़ा बदलेगा, जिसे दुनिया के रणनीतिक रूप से सबसे बड़े भूभाग वाले राज्य में हवाई श्रेष्ठता और सटीक हमले के लिए डिजाइन किया गया है. कजाकिस्तान की वायुसेना के पास करीब 60-68 सक्रिय विमानों का बेड़ा है. इनमें 30 से 36 Su-30SM और 20 से 24 के आसपास Su-27 लड़ाकू विमान हैं. इनके अलावा 12 से 15 Su-25 ग्राउंड अटैक जेट भी हैं, जबकि MiG-29 के बेड़े को 2023 में ग्राउंडेड कर दिया गया है. सोवियत समय के 20 से 31 की संख्या में MiG-31 इंटसेप्टर को भी बिक्री के लिए पेश किया गया है, जिसकी वजह से वायुसेना अटैक जेट की कमी से जूझ रही है.
चीन की बढ़ती रक्षा उपस्थिति मध्य एशिया में रूस को चुनौती दे रही है. कजाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के चयन के फैसले को एक क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा में बदल दिया है क्योंकि बीजिंग ड्रोन और सहायक विमानों से आगे बढ़कर पारंपरिक रणनीतिक भीतरी इलाकों में एडवांस्ड लड़ाकू विमानों को बेचने की ओर बढ़ रहा है. अस्ताना ने चीनसे विंग लूंग ड्रोन, वाई-8 और वाई-9 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और के-8डब्ल्यू ट्रेनिंग विमान भी खरीदे हैं, जिससे बीजिंग के साथ उसके अच्छे रक्षा संबंध बन चुके हैं. ऐसे में अगर कजाकिस्तान रूस की बजाय चीनी फाइटर जेट को चुनता है तो ये मॉस्को के लिए बढ़ा झटका साबित होगा.
रिपोर्ट के अनुसार, 2016-2020 और 2021-2025 के बीच रूस के प्रमुख हथियारों के निर्यात में 64 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि वैश्विक बाजार हिस्सेदारी 21 प्रतिशत से घटकर 6.8 प्रतिशत हो गई, जिससे कजाकिस्तान का औद्योगिक और प्रतीकात्मक महत्व बढ़ गया. इसके बावजूद, रूस ने पांच साल की अवधि के दौरान कजाकिस्तान के हथियार आयात का लगभग 88 प्रतिशत हिस्सा आपूर्ति किया है.
-कजाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए रूसी हथियारों पर ही निर्भर है. SIPRI की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्ताना अपनी जरूरत के करीब 88 फीसदी हथियार रूस से आयात करता है.
-कजाकिस्तान रूस के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन कलेक्टिव सिक्योरिटी ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (CSTO) का एक प्रमुख सदस्य है. नाटो की तरह इस गठबंधन के नियमों के तहत यदि किसी सदस्य देश पर हमला होता है तो सभी देश मिलकर उसकी मदद करते हैं.
-कजाकिस्तान में जनवरी, 2022 में जब हिंसक दंगों की शुरुआत हुई तो कजाख राष्ट्रपति के बुलावे पर रूस ने अपनी सेना भेजी थी.
-रूस के साथ संधि के तहत कजाकिस्तान को रूसी हथियारों पर रियायत मिलती है, जो पश्चिमी हथियारों की तुलना में काफी सस्ते होते हैं.
-सोवियत यूनियन का हिस्सा रहने के कारण कजाकिस्तान की सेना का पूरा ढांचा, हथियार प्रणाली, सैन्य सिद्धांत और तकनीकी ट्रेनिंग पूरी तरह से सोवियत/रूसी प्रणालियों पर आधारित हैं.
-अगर कजाकिस्तान अचानक अमेरिकी या यूरोपीय हथियार खरीदने का फैसला करता है तो उसे अपनी पूरी सेना को नए सिरे से ट्रेनिंग देनी होगी.
-कजाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए 'संतुलन की नीति' अपनाता है. उसकी रूस के साथ करीब 7500 किमी की सीमा लगती है. मॉस्को को नाराज करना अस्ताना को महंगा साबित हो सकता है.
-चीन ने कजाकिस्तान में भारी निवेश किया है, वहीं अस्ताना रूस के साथ सैन्य संबंध बनाए रखता है. इसके अलावा तुर्किए और अमेरिका के साथ भी संबंधों का दायरा बढ़ा रहा है.
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