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Syria में Assad के 'भाई' ने Jolani के सच का कुछ इस तरह Postmortem किया है! 

एचटीएस के नेता जोलानी का दावा है कि उन्होंने अपने अतीत को त्याग दिया है और अब वे बहुलवाद और सहिष्णुता को अपना रहे हैं। वहीं सीरिया के तानाशाह बशर अल असद के चचेरे भाई रिबाल अल असद ने जोलानी के इन दावों को ख़ारिज कर तमाम बड़ी बातें कही हैं. 

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Syria में Assad के 'भाई' ने Jolani के सच का कुछ इस तरह Postmortem किया है! 
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सीरिया में विद्रोही संगठन  हयात तहरीर अल शाम (HTS) से हुए संघर्ष में सत्ता गंवाने के बाद बशर अल असद को लेकर तरह तरह की बातें हो रही हैं. सवाल हो रहा है कि एचटीएस जिसका आधार ही कट्टरपंथ और रूढ़िवादिता रह चुका है. मुल्क पर कैसे और किस तरह राज करेगा? अभी इन सवालों के जवाब मिले भी नहीं थे कि बशर अल असद के चचेरे भाई रिबाल अल असद का एक बयान खूब सुर्ख़ियों में है. रिबाल ने कहा है कि सीरिया के नए नेताओं पर अपने चरमपंथी अतीत से मुंह मोड़ने और देश को एकजुट करने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता.

रिबाल ने हयात तहरीर अल शाम (HTS) के बारे में अपने आकलन में तीखी आलोचना की है. और दावा किया है कि यह पहले से ही प्रतिशोध की हत्याएं कर रहा है. HTS नेता अबू मोहम्मद अल जोलानी का जिक्र करते हुए, उन्होंने एक इंटरनेशनल न्यूज वेबसाइट से बात की है और दावा किया है कि, 'उस आदमी के सिर पर 10 मिलियन डॉलर हैं. वह ISIS का सदस्य था और फिर वह सीरिया में अल कायदा का नेता बना.  

वेबसाइट से हुई अपनी बातों में रिबाल ने ये भी माना है कि उन्होंने (जोलानी ने) सीरिया में उतने ही अत्याचार किए जितने शासन ने किए. रिबाल ने इसकी तुलना अफगानिस्तान के तालिबान द्वारा खुद को सुधारने के दावों के मद्देनजर की. 

रिबाल ने सवाल करते हुए कहा कि, क्या आपको लगता है कि लाखों अत्याचार करने वाले लोग अब कहेंगे कि हम सत्ता में हैं और वे बदल जाएंगे? वहीं उन्होंने ये भी पूछा कि क्या आपको हमास याद है जब वे गाजा में इमारतों की छतों से सभी पीएलओ लोगों को फेंकने के बाद सत्ता में आए थे. उन्होंने कहा कि एचटीएस के दावे भी कुछ कुछ ऐसे ही हैं. 

चूंकि उदारवादी बनने के बावजुद एचटीएस की पूरी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है. इसलिए तमाम आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए संगठन की तरफ से कहा गया है कि वह आगे बढ़ गया है और सीरिया के सभी अल्पसंख्यक समूहों के साथ उचित व्यवहार करेगा.

समूह के नेता अबू मोहम्मद अल जोलानी ने अभी बीते दिनों ही तमाम मीडिया आउटलेट्स से बात करते हुए इस बात का जिक्र किया था कि, डर शासन की उपस्थिति से था. देश विकास और पुनर्निर्माण की ओर बढ़ रहा है. यह स्थिरता की ओर बढ़ रहा है.

बताते चलें कि एचटीएस प्रमुख जोलानी इराक के इस्लामिक स्टेट का पूर्व सदस्य है. जो 2016 में संबंध तोड़ने से पहले सीरिया में अलकायदा के सहयोगी समूह का नेतृत्व करता था. जोलानी को आज भी अमेरिका ने आतंकवादी घोषित किया हुआ है. लेकिन उसने अलकायदा से अपने पूर्व संबंधों से खुद को दूर करने की कोशिश में कई साल बिताए हैं.

अभी हाल ही में जोलानी ने दावा किया था कि उसने अपने अतीत को त्याग दिया है और अब वो बहुलवाद और सहिष्णुता के मार्ग पर है. हालांकि, रिबाल अल असद ने दावा किया कि समूह, जिसने एक सप्ताह पहले ही सीरिया में राष्ट्रपति असद को हटाने के लिए अभियान चलाया था - पहले से ही हत्याएं कर रहा है.

रिबाल के मुताबिक,'हम सीरिया में वह नहीं देखना चाहते जो 45 साल पहले ईरान में हुआ था, जहां शाह के शासन - जो एक तानाशाह था, को मुल्लाओं ने बदल दिया था. रिबाल ने कहा कि इससे सिर्फ ईरान में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लोग पीड़ित हुए हैं.

रिबाल के अनुसार उन्होंने नौ साल की उम्र में सीरिया छोड़ दिया था. उन्होंने इस बात से इनकार किया कि उनके पिता नरसंहारों में शामिल थे और कहा कि जब वे 1990 के दशक में सीरिया लौटे थे, तब ही बशर से उनकी अनबन हो गई थी.

रिबाल ने यह भी स्वीकार किया कि, मैंने उनका (बशर का) विरोध किया. कुछ महीने बाद उन्होंने दमिश्क अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मेरी हत्या करने की कोशिश की.

जैसी बातें रिबाल ने की हैं उन्होंने राष्ट्रपति असद को सत्ता के लिए भूखे और 'परेशान' व्यक्ति के रूप में भी चित्रित किया और कहा कि वे अपने भाई के अंतिम संस्कार में बहुत खुश थे - जिनकी कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और जो उनसे पहले नेता बनने वाले थे.

एक घटना को याद करते हुए रिबाल ने वेबसाइट को बताया कि, उनके भाई का हाल ही में निधन हुआ था और जब मैं अंतिम संस्कार में था, तो वहां भी बशर का व्यवहार बहुत असामान्य था. वो हाथ हिला हिलाकर लोगों का अभिवादन कर रहे थे.  

ध्यान रहे कि अभी बीते दिनों ही राष्ट्रपति असद ने रूस भागने के बाद अपनी पहली टिप्पणी जारी की. बयान में कहा गया कि वह 8 दिसंबर को दमिश्क छोड़कर रूस चले गए.

अपनी सफाई में बशर ने यह भी माना कि जिस समय विद्रोही सीरिया के अलग अलग शहरों पर कब्ज़ा कर रहे थे. उन्होंने किसी भी समय पद छोड़ने या शरण लेने के बारे में नहीं सोचा. बशर के मुताबिक कार्रवाई का एकमात्र तरीका आतंकवादी हमले के खिलाफ लड़ाई जारी रखना था.

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