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क्या Russia ने करवाया Azerbaijan Airlines Plane Crash? हैरान करने वाले दावों ने शुरू की नई बहस

Azerbaijan Airlines Plane Crash: कजाकिस्तान में विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से 38 लोगों की मौत हो गई तथा 29 लोग घायल हो गए. हादसा क्यों हुआ अब इसके पीछे तमाम कारण गिनाए जा रहे हैं. ऐसे में दावा ये भी हो रहा है कि रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने अपना निशाना बनाया था.

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क्या Russia ने करवाया Azerbaijan Airlines Plane Crash? हैरान करने वाले दावों ने शुरू की नई बहस
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Azerbaijan Airlines Plane Crash: क्या अब वो वक़्त आ गया है जब अलग-अलग कारणों के चलते दो देशों के बीच लड़ाई, मैदान पर न होकर डिजिटल या ये कहें कि तकनीक के बल पर होगी और हजारों लोगों को इसकी कीमत चुकानी होगी? हो सकता है वर्तमान राजनीतिक सामाजिक परिदृश्य में ये सवाल लोगों को थोड़ा अटपटा लगे.  मगर जब हम उन रिपोर्ट्स को सुनते हैं, जो रॉयटर्स ने अज़रबैजान एयरलाइंस प्लेन क्रैश के मद्देनजर प्रसारित की हैं. तो इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि तकनीक और युद्ध के लिहाज से आने वाला वक़्त भयावह है.

दरअसल रॉयटर्स के जुड़े एक दो नहीं बल्कि चार सूत्रों ने यह कहकर पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया है कि, अज़रबैजान एयरलाइंस के जिस विमान की दुर्घटना हुई और जिसमें 38 लोग मारे गए , उसे रूसी वायु रक्षा प्रणाली ने अपना निशाना बनाया था.

बता दें कि एम्ब्रेयर 190 पैसेंजर जेट बीते दिनों अज़रबैजान की राजधानी बाकू से उत्तरी काकेशस में रूसी शहर ग्रोज़नी के लिए उड़ान भर रहा था, जब उसने अपना रास्ता बदल लिया.

यह विमान कैस्पियन सागर के पार पूर्व की ओर उड़ान भरने के बाद उतरने का प्रयास करते समय कजाकिस्तान के अक्तौ से लगभग दो मील दूर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 38 लोग मारे गए और अन्य सभी 29 जीवित बचे लोग घायल हो गए.

बताया जा रहा है कि विमान रूस के उस क्षेत्र से निकला था, जहां मास्को ने हाल के महीनों में यूक्रेनी ड्रोन हमलों के खिलाफ वायु रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया है. ऑनलाइन प्रसारित मोबाइल फोन फुटेज में विमान को जमीन पर गिरने से पहले एक तेज ढलान पर उतरते हुए दिखाया गया.

अन्य फुटेज में विमान के धड़ का एक हिस्सा पंखों से अलग होते हुए और विमान का बाकी हिस्सा घास में उल्टा पड़ा हुआ दिखाया गया. विमान के नीचे गिरने से पहले एक यात्री द्वारा फिल्माए गए फुटेज में लोगों को विमान के केबिन में ऑक्सीजन मास्क उतारते हुए और प्रार्थना करते हुए सुना जा सकता है.

एक अज़रबैजानी सूत्र ने रॉयटर्स से बात करते हुए कहा है कि जांच के प्रारंभिक परिणामों से पता चला है कि विमान पर रूसी पैंटिर-एस वायु रक्षा प्रणाली द्वारा हमला किया गया था, और ग्रोज़नी में प्रवेश करते समय इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों द्वारा इसके संचार को पंगु बना दिया गया था.

वहीं सूत्र ये ये भी कहा कि, 'कोई भी यह दावा नहीं करता कि यह जानबूझकर किया गया था.' 'हालांकि, स्थापित तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, बाकू को उम्मीद है कि रूसी पक्ष अज़रबैजानी विमान को मार गिराने की बात कबूल करेगा.'

मामले पर किस हद तक अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं? इसका अंदाजा एक अमेरिकी अधिकारी की उस बात से लगाया जा सकता है जिसमें उसने भी इसी आकलन करते हुए, रॉयटर्स को बताया है कि शुरुआती संकेत हैं कि रूसी विमान-रोधी प्रणाली इसमें शामिल हो सकती है.

यूरोन्यूज ने अज़रबैजानी सरकार के सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया कि ग्रोज़्नी के ऊपर ड्रोन हवाई गतिविधि के दौरान विमान पर रूसी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल दागी गई थी.

नेटवर्क के अनुसार, विमान के बीच उड़ान के दौरान मिसाइल के फटने से छर्रे विमान पर लगे, जबकि तस्वीरों में मलबे को नुकसान दिखाई दे रहा है. 

सूत्रों ने बताया कि क्षतिग्रस्त विमान को किसी भी रूसी हवाई अड्डे पर उतरने की अनुमति नहीं दी गई, जबकि पायलटों ने आपातकालीन लैंडिंग के लिए अनुरोध किया था, और इसे अक्तौ की ओर उड़ान भरने का आदेश दिया गया.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अभी बीते दिनों ही इस बात को दोहराया कि दुर्घटना के कारणों की जांच समाप्त होने से पहले अटकलें लगाना गलत होगा.

इस बीच, कजाख क्षेत्रीय परिवहन अभियोजक अबाइलेबेक ओरदाबायेव ने कहा कि उनकी जांच अभी तक इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है कि रूसी वायु रक्षा शामिल थी या नहीं.रूसी, अज़रबैजानी और कजाकिस्तान के अधिकारियों ने सभी ने दुर्घटना की जांच की मांग की है.

रूस के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण, रोसावियात्सिया ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी से पता चलता है कि विमान में पक्षी के टकराने के बाद आपात स्थिति पैदा होने के बाद पायलटों ने विमान को अक्तौ की ओर मोड़ दिया.

ध्यान रहे कि अज़रबैजान राष्ट्रीय शोक दिवस मना रहा है. मुल्क में झंडे झुकाए गए और यातायात रोक दिया गया, और देश भर में मौन के एक क्षण के दौरान जहाजों और ट्रेनों से सिग्नल बजाए गए.

बहरहाल अब जबकि ये हादसा हो चुका है और तीस से ऊपर लोग मर चुके हैं. मामले की बारीकी से जांच होनी चाहिए और यदि इसके लिए रूस दोषी पाया गया.  तो वो तमाम मुल्क जो अपने को मानवाधिकारों के अगुआ कहते हैं.

ऐसे मुल्कों को न केवल अज़रबैजान के साथ खड़ा होना चाहिए. बल्कि उनकी कोशिश ये भी रहे कि इसका मुंहतोड़ जवाब रूस और वहां के मुखिया व्लादिमीर पुतिन को मिले और वो इस निंदा से कुछ सबक ले सकें. 

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