डीएनए एक्सप्लेनर
ISI कुछ ऐसा प्लान कर रही है जिससे आतंकी हमलों को ग्लोबल जिहाद का रूप दिया जा सके और पाकिस्तान पर सीधा आरोप न लगे. भारत के जवाब देने के तरीके से डरकर ये नई रणनीति अपनाई गई है.
पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) दशकों से आतंकी संगठनों के साथ मिलकर भारत को हजार घाव देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. लेकिन, मई 2025 में जब पहलगाम हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान के अंदर सुरक्षित समझे जाने वाले आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया तब पाकिस्तान सहम गया. 'ऑपरेशन सिंदूर' ने पाकिस्तान को अपनी आतंकी रणनीति में बड़े बदलाव करने पर मजबूर कर दिया. अब ISI और पाकिस्तानी फौज ने भारत के खिलाफ अपनी आतंकी रणनीति में बदलाव किए हैं. इसके लिए इस्लामाबाद के आबपारा में मौजूद ISI हेडक्वार्टर में एक खास 'कश्मीर स्टडी ग्रुप' भी बनाया गया है.
रक्षा मामलों की वेबसाइट डिफेंस डॉट इन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISI हेडक्वार्टर में बने 'कश्मीर स्टडी ग्रुप' की सिफारिशों के आधार पर पाकिस्तान ने अपनी आतंकी रणनीति में कई बदलाव किए हैं. पाकिस्तान अब सबूतों को छिपाने और पाकिस्तान में मौजूद आतंकी संगठनों और भारत में हुए आतंकी हमलों के बीच सीधा संबंध साबित करना मुश्किल बनाने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तानी सेना की कोशिश है कि भारत के अंदर आतंकी हमले जारी रहें लेकिन, भारतीय जांच एजेंसियां इन हमलों का पाकिस्तान से कोई कनेक्शन न साबित कर पाएं.
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ऐसा भारत की ओर से मिलने वाली कड़ी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय दबाव से बचने के लिए कर रहा है. ISI ने अपने तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल लिया है और कोशिश की जा रही है कि अगर आतंकी हमलों का जवाब भारत ने सैन्य तरीके से दिया तो खुद को पीड़ित और भारत को आक्रमणकारी बताया जा सके.
अब तक पाकिस्तान का मानना था कि किसी आतंकी हमले के जवाब में भारत सैन्य कार्रवाई करता भी है तो ये एलओसी पर 2 से 4 किमी के इलाके में ही सीमित रहेगा. इसीलिए पाकिस्तानी सेना हर आतंकी हमले के बाद कैंपों को नियंत्रण रेखा से हटा देती थी और आतंकियों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया जाता था. लेकिन, ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान की इस रणनीति का गुब्बारा फोड़ दिया. भारत ने मुरीदके और बहावलपुर में भी आतंकी कैंपों पर हमले किए.
इसके अलावा भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि सीमा पार से होने वाले किसी भी आतंकी हमले को केवल आतंकी घटना नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ 'युद्ध की कार्रवाई' माना जाएगा. ऑपरेशन सिंदूर में आतंकी ढांचे को पहुंचे नुकसान और भारत के इस नए सिद्धांत से डरकर, पाकिस्तान ने सुराग मिटाने के लिए यह नई रणनीति अपनाई है.
भारत में हमले का प्लान बनाने वाले हैंडलर्स पहले इस्लामाबाद, कराची या रावलपिंडी से निर्देश देते थे. अब आईएसआई ने अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के नेटवर्क की मदद से अपने हैंडलर तंत्र को बदल दिया है. पाकिस्तान की कोशिश भारतीय युवाओं को ही आतंकी हमलों के लिए भर्ती करने की है. भारतीय युवाओं को निशाना बनाने वाले हैंडलर्स अब पाकिस्तान में न बैठकर सीरिया, इराक या अफ्रीकी देशों से काम कर रहे हैं. इससे यदि भारतीय जांच एजेंसियां किसी हमले के मास्टरमाइंड की जांच करती हैं, तो उसकी लोकेशन पाकिस्तान के बजाय मध्य पूर्व या अफ्रीका में मिलेगी. जांच में नाम भी पाकिस्तान बेस्ड लश्कर ए तैयबा या जैश ए मोहम्मद की नहीं बल्कि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों का आएगा.
नवंबर 2025 में दिल्ली में हुआ कार ब्लास्ट इसका सबसे सटीक उदाहरण है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस हमले के तार 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' से जुड़े थे. यूएन की 'एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम' की रिपोर्ट में पिछले नवंबर में लाल किले के पास हुए धमाके के लिए 'आधिकारिक तौर पर एक्यूआईएस को जिम्मेदार ठहराया गया था. इस हमले में 11 लोगों की जान गई थी.
ISI अब भारत में आतंकी हमलों के लिए 'लोन वुल्फ' अटैक मॉडल अपनाने पर जोर दे रही है. इसके लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं का ऑनलाइन ब्रेनवॉश किया जा रहा है. ऐसे हमलावर सीधे किसी आतंकी संगठन से नहीं जुड़े होते, जिससे भारत के लिए जांच की कड़ी को वापस पाकिस्तान तक जोड़ना कठिन हो जाएगा.
पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भारी दबाव भी है. यदि भारत प्रत्यक्ष रूप से यह साबित कर देता है कि हमला पाकिस्तान प्रायोजित है, तो पाकिस्तान पर वैश्विक प्रतिबंधों का खतरा मंडराने लगता है. ISI को ये भी पता है कि भारत और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिद्दीन के संचालन के तरीकों और मैनुअल को अच्छे से पहचानती हैं. इसलिए ISI कुछ ऐसा प्लान कर रही है जिससे आतंकी हमलों को ग्लोबल जिहाद का रूप दिया जा सके और पाकिस्तान पर सीधा आरोप न लगे.