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Explained: संसद के मानसून सत्र में सरकार ला सकती है ये पांच विधेयक, परिसीमन बिल पर सबकी नजर, विपक्ष घेराबंदी करने की तैयारी में

बीस जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में सरकार कई विधेयक पास कराने की तैयारी में है. विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोल सकता है. विपक्ष संसद में नीट प्रश्नपत्र लीक, पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नाविकों की मौत और पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने जैसे मुद्दे उठा सकता है.

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Explained: संसद के मानसून सत्र में सरकार ला सकती है ये पांच विधेयक, परिसीमन बिल पर सबकी नजर, विपक्ष घेराबंदी करने की तैयारी में

संसद के मानसून सत्र में कई विधेयक पेश करेगी सरकार. (File Photo- ANI)

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  • संसद के मानसून सत्र में कई विधेयक पेश करेगी सरकार.
  • सरकार आगामी मानसून सत्र में आयकर (संशोधन) विधेयक पेश करने की योजना बना रही है. 
  • महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन और परिसीमन विधेयक भी ला सकती है सरकार.

Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई, सोमवार से शुरू हो रहा है. यह सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा. सरकार इस मानसून सत्र में 5 नए विधेयक पेश कर सकती है. इसके अलावा  2 पहले से लंबित विधेयकों को पारित कराने का प्रयास भी किया जाएगा. संसद के मानसून सत्र से पहले शुक्रवार, 17 जुलाई को कर्तव्य भवन में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के मंत्रियों के समूह की एक महत्वपूर्ण बैठक भी हुई. इसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेता शामिल हुए. इस बैठक में केंद्रीय मंत्रियों और राजग के सहयोगी दलों के नेताओं ललन सिंह, जयंत चौधरी, और के राममोहन नायडू ने भी हिस्सा लिया.  बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद सत्र के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन की रणनीति पर चर्चा की गई. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बैठक की अध्यक्षता की.

सरकार पेश कर सकती है ये पांच नए विधेयक

जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026: 1969 के मूल अधिनियम में एक बार फिर बदलाव किया जा रहा है. इससे पहले भी 2023 में इसमें संशोधन हुआ था. इसके तहत देश में जन्म और मृत्यु के देरी से होने वाले पंजीकरण के नियमों को और अधिक कड़ा बनाया जाएगा. 

राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026: इस नए संशोधन के जरिए भारत के राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को भी राष्ट्रगान 'जन गण मन' के समान ही वैधानिक सुरक्षा दी जाएगी. इसके लागू होने के बाद वंदे मातरम के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसका अपमान करने पर कानूनी रूप से दंड का प्रावधान होगा.

आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026:  यह विधेयक पिछले महीने सरकार द्वारा लाए गए एक अध्यादेश की जगह लेगा. इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर टैक्स छूट देकर वैश्विक पूंजी को आकर्षित करना और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों व सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बीच रुपये को मजबूती देना है.

सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, 2026: यह विधेयक भी इस विषय पर पहले से लागू एक अध्यादेश को बदलने के लिए लाया जा रहा है, ताकि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या को लेकर वैधानिक व्यवस्था की जा सके.

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026:  यह 2006 के मूल MSME अधिनियम को बदलते परिदृश्य के अनुसार ढालने के लिए लाया जा रहा है. इस क्षेत्र में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने और भरोसा-आधारित नियम स्थापित करने के लिए ये विधेयक लाया जा रहा है. 

ये लंबित विधेयक पास कराए जा सकते हैं

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इसे  FCRA Amendment Bill के नाम से भी जाना जाता है. यह काफी विवादास्पद विधेयक है, जिसे मार्च 2026 में ही पेश किया गया था. इसका उद्देश्य एनजीओ (NGOs) को मिलने वाले विदेशी फंड के इस्तेमाल को विनियमित करना है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित न करे. नियमों का उल्लंघन करने वाले NGOs पर कड़ी कार्रवाई का नियम भी इसमें है. विपक्ष सबसे ज्यादा इसी विधेयक को लेकर हमलावर है. 

विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: दिसंबर 2025 में लोकसभा में पेश होने के बाद इसे दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा गया था. इस सत्र में समिति की रिपोर्ट पेश की जाएगी. यह विधेयक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाते हुए UGC, AICTE और NCTE को भंग कर एक एकीकृत नियामक आयोग बनाने का प्रस्ताव रखता है.

सरकार संसद में परिसीमन विधेयक भी ला सकती है

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी सत्र में सरकार संसद में पारित कराने के लिए महिला आरक्षण विधेयक में संशोधन और परिसीमन विधेयक भी ला सकती है. राजग के सूत्रों ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को छोड़कर अन्य विपक्षी दलों के समर्थन से जरूरी दो-तिहाई बहुमत मिलने का भरोसा जताया है. सरकार सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों की संख्या 50 प्रतिशत तक बढ़ाने के कई विकल्पों पर काम कर रही है, ताकि दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके. इसके साथ ही वह महिला आरक्षण कानून से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के नए मसौदे को लागू करने की तैयारी कर रही है.

यह मसौदा दक्षिणी राज्यों की उन चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है, जिनके अनुसार जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से लोकसभा में उनका राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है. पहला विधेयक 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित नहीं हो सका था, क्योंकि सरकार इसे पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई थी.

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