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महाकुंभ को मृत्यु-कुंभ बताकर ममता ने बंगाल में बीजेपी को संजीवनी दे दी है!

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन्होंने कुंभ को लेकर ऐसा बहुत कुछ कह दिया, जिसे यदि भाजपा सही से कैश कर ले. तो कोई बड़ी बात नहीं कि आने वाले वक़्त में हम बंगाल के किले पर भगवा ध्वज फहरता हुआ देख सकते हैं.

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महाकुंभ को मृत्यु-कुंभ बताकर ममता ने बंगाल में बीजेपी को संजीवनी दे दी है!
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यूपी के प्रयागराज में महाकुंभ का सफल होना तमाम नेताओं की आंख की किरकिरी बन गया है. जिस दिन से प्रयागराज में भव्य महाकुंभ की शुरुआत हुई, इसके विरोध में एक से बढ़कर एक बयान सामने आए. कभी अखिलेश यादव इस आयोजन की आड़ लेकर सूबे की सरकार पर निशाना साधते दिखे. तो कभी अफजाल अंसारी, मल्लिकार्जुन खड़गे, लालू यादव, डीके शिवकुमार जैसे लोगों ने अपने बयानों से स्वतः इस बात की पुष्टि कर दी की उन्हें पच ही नहीं रहा कि कैसे प्रयागराज जैसी जगह पर करोड़ों लोग आकर शांति के साथ स्नान कर रहे हैं. और वापस अपने ठीहों की तरफ लौट जा रहे हैं.

सवाल होगा कि आखिर महाकुंभ का महिमामंडन करती ये बातें क्यों? जवाब है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जिन्होंने कुंभ को लेकर ऐसा बहुत कुछ कह दिया, जिसे यदि भाजपा सही से कैश कर ले. तो कोई बड़ी बात नहीं कि आने वाले वक़्त में हम बंगाल के किले पर भगवा ध्वज फहरता हुआ देख सकते हैं. 

दरअसल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाकुंभ के दौरान और इसमें जाने के लिए मची भगदड़ की घटनाओं का हवाला देते हुए इसे 'मृत्युकुंभ' कहा है. ममता बनर्जी ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा में यह कहकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज कर दीं कि, 'महाकुंभ अब मृत्यु कुंभ में बदल गया है.'

उन्होंने इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा. ममता ने कहा कि आप देश को बांटने के लिए धर्म को बेच रहे हैं. ममता बनर्जी द्वारा महाकुंभ से जुडी इन बातों को कहना भर था, इनका विरोध शुरू हो गया है.

चाहे वो भाजपा और संघ के नेता हों या फिर साधु-संत सभी ममता के इस बयान को सनातन विरोधी बता रहे हैं. कहा जा रहा है कि इस बयान को देकर ममता बनर्जी ने न केवल अपना हिंदू विरोधी चेहरा दिखाया है. बल्कि वो सीधे सीधे धर्म विशेष को रिझाने के लिए तुष्टिकरण की राजनीति कर रही हैं. 

बताते चलें कि ममता ने आरोप लगाया है कि वीआईपी लोगों को विशेष सुविधाएं दी जा रही हैं, जबकि गरीबों को आवश्यक सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है. वहीं उन्होंने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए उस पर 'देश को बांटने के लिए धर्म को बेचने' का आरोप लगाया है. 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने विधानसभा के बजट सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि, 'यह 'मृत्यु कुंभ' है. मैं महाकुंभ का सम्मान करती हूं और मैं पवित्र गंगा मां का भी सम्मान करती हूं. लेकिन इसके लिए कोई योजना नहीं है.कितने लोगों को बचाया गया है? अमीरों और वीआईपी लोगों के लिए 1 लाख रुपये तक के कैंप (टेंट) की व्यवस्था है. लेकिन गरीबों के लिए कुंभ में कोई व्यवस्था नहीं है.'

उन्होंने यह भी कहा कि मेले में भगदड़ की स्थिति 'आम बात है', ममता ने उचित प्रबंधों की आवश्यकता पर बल दिया और सवाल किया कि, आपने इतनी गंभीर घटना को इतना बढ़ा-चढ़ाकर क्यों पेश किया? उचित योजना बनाई जानी चाहिए थी. घटना के बाद कुंभ में कितने आयोग भेजे गए?'

ध्यान रहे ममता का ये बयान ठीक उस वक़्त आया है, जब यूपी के मुख्यमंत्री लगातार ये दावा कर रहे हैं कि, विरोधी कितना भी विरोध क्यों न कर लें. मगर प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ एक बेहद सफल आयोजन इसलिए भी है क्योंकि न केवल इससे राज्य का राजस्व बढ़ा है. बल्कि देश दुनिया के पर्यटक भी प्रयागराज के अलावा काशी अयोध्या जैसे तीर्थस्थलों की तरफ आकर्षित हुए हैं.

महाकुंभ को मृत्यु कुंभ कहना बनेगा चुनावी मुद्दा 

जैसा कि हम सभी जानते हैं बंगाल के किले पर कब्ज़ा बीजेपी का वो सपना है, जिसके लिए वो किसी भी सीमा तक जा सकती है. पूर्व में चाहे वो संदेशखाली का मुद्दा रहा हो, संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या रही हो. या फिर आरजी कार मेडिकल कॉलेज का मामला जिस तरह भाजपा ने बंगाल के लॉ एंड आर्डर की बखिया उधेड़ी वो ये बताने के लिए क़ाफी है कि बंगाल जीतने के लिए भाजपा हर वो जतन करती है जिसका उद्देश्य सूबे में ममता की छवि को धूमिल करना है. 

बंगाल के मामले में दिलचस्प ये है कि लाख जतन करने के बावजूद भाजपा अभी सूबे में वो पैठ नहीं बना पाई है जिसकी उसे चाह थी. लेकिन अब जबकि ममता सीधे सीधे कुंभ पर हमलावर हुईं हैं तो भाजपा यदि चाहे तो बंगाल में अपनी रैलियों और गोष्ठियों के जरिये जनता को ये बता सकती है कि ममता एक ऐसी राजनेता हैं जो हिंदू हितों और सनातन के खिलाफ हैं.  

यदि भाजपा का ये नैरेटिव सही होता है या ये कहें कि तीर निशाने पर लगता है. तो यक़ीनन आगामी चुनावों में बंगाल में वो हो सकता है जो बड़े बड़े राजनीतिक पंडितों को उलझन में डाल सकता है. 

ममता के आरोपों पर क्या कह रही है भाजपा 

जिक्र ममता के बयान पर भाजपा के पलटवार का हुआ है तो हमारे लिए ये बता देना भी बेहद जरूरी है कि राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इसे हिंदुओं पर हमला बताया और लोगों से इसका कड़ा विरोध करने का आग्रह किया है. 

निलंबित होने के बाद विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अधिकारी ने कहा कि, 'मैं हिंदू समुदाय, संत समुदाय से कड़ा विरोध दर्ज कराने की अपील करता हूं.

वहीं उन्होंने ये अपील भी की है कि, महाकुंभ पर इस हमले के खिलाफ जनता अपनी आवाज उठाएं. अधिकारी ने लोगों से यह भी कहा है कि अगर आप सच्चे हिंदू हैं तो राजनीति से ऊपर उठें और ममता बनर्जी के इन शब्दों का कड़ा विरोध करें.

मुस्लिम तुष्टिकरण से जोड़कर देखा जा रहा है ममता का बयान!

आलोचक इस बात को भी मान रहे हैं कि ममता ने कुंभ से जुड़ा यह बयान सिर्फ इसलिए दिया ताकि वो मुस्लिम वोटर्स को अपने पाले में कर लें. बात बंगाल में मुस्लिम वोटर्स की चली है तो हमारे लिए यह बता देना भी जरूरी हो जाता है कि 2011 की जनगणना के अनुसार, पश्चिम बंगाल में 24.6 मिलियन से ज़्यादा मुसलमान हैं, जो राज्य की आबादी का 27% हिस्सा हैं.

पश्चिम बंगाल में मुसलमानों का बड़ा हिस्सा जातीय मूल निवासी बंगाली मुसलमान हैं, जिनकी संख्या लगभग 22 मिलियन से ज़्यादा है और जो राज्य की आबादी का 24.1% हिस्सा हैं (ज़्यादातर वे ग्रामीण इलाकों में रहते हैं).

2.6 मिलियन की संख्या में अप्रवासी उर्दू बोलने वाले मुस्लिम समुदाय भी मौजूद हैं, जो राज्य की आबादी का 2.9% हिस्सा हैं और ज़्यादातर राज्य के शहरी इलाकों में रहते हैं.

माना जाता है कि बंगाल में मुसलमानों की एक बड़ी आबादी ममता बनर्जी के साथ है.  और चाहे कुछ भी हो जाए ये सिर्फ तृणमूल को ही वोट करती है.  

क्या ममता के बयान को कैश करने में कामयाब हो पाएगी भाजपा ?

कुल मिलाकर महाकुंभ पर अपने बयान से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गेंद को भाजपा के पाले में डाल दिया है. बाकी दिल्ली फ़तेह करने के बाद जैसा भाजपा का मनोबल है, हमें ये कहने में कोई गुरेज नहीं है कि इस बार भाजपा चूकने वाली नहीं है और वो तृणमूल और ममता का पूरा हिसाब करेगी.

यदि ऐसा हो गया तो बंगाल में वो हो जाएगा जो वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के लिए एक हसीन सपने की तरह है. 

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