डीएनए एक्सप्लेनर
Japan Air Force Attack on Madaras: चेन्नई (पहले मद्रास) के एन्नोर में एक आदमी को अपने प्लॉट की खुदाई के दौरान बम मिला, जिसे दूसरे विश्व युद्ध में जापान एयरफोर्स (Japan Air Force) की चेन्नई पर की गई बॉम्बिंग के दौरान का बताया जा रहा है.
Japan Air Force Attack on Madaras: तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई (पहले मद्रास) में एक शख्स को प्लॉट की खुदाई को दौरान ऐसी चीज मिली है, जिसने इस शहर (Chennai) में 82 साल पहले उपजे खौफ की यादों को ताजा कर दिया है. प्लॉट में खुदाई करते समय एक बम मिला है, जिसे दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान एयरफोर्स (Japan Air Force) की तरफ से तत्कालीन मद्रास (Madaras) पर की गई बॉम्बिंग का हिस्सा माना जा रहा है. एन्नौर (Ennore) के रामकृष्ण नगर में मिले इस बम को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और उसकी जांच शुरू कर दी है. बता दें कि दूसरे विश्व युद्ध (Second World War) के दौरान जापानी एयरफोर्स की बॉम्बिंग के कारण करीब 3 दिन तक मद्रास 'हॉरर टाउन' बना रहा था. चलिए आपको अब मिले बम और दूसरे विश्व युद्ध में की गई बॉम्बिंग की पूरी कहानी बताते हैं.
कैसे मिला चेन्नई में 82 साल पुराना बम
रामकृष्ण नगर निवासी मुस्तफा ने हाल ही में अपने इलाके में एक प्लॉट खरीदा था. उन्होंने प्लॉट पर घर बनवाने के लिए काम शुरू कराया, जिसके लिए फाउंडेशन पिलर्स की खुदाई चल रही थी. इसी दौरान जेसीबी मशीन किसी सख्त चीज से टकराई. इसके बाद सामने आई चीज मुस्तफा को असामान्य लगी तो उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी पुलिस को दी. एन्नौर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर चंद्रमोहन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंच गए और खुदाई में निकली चीज की जांच की. जांच में उन्होंने पाया कि यह एक बम है, जो संभवत: दूसरे विश्वयुद्ध (World War II) के दौरान इस्तेमाल किया गया था.
मौके पर बुलाया गया बम स्क्वॉयड
इंस्पेक्टर ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय तहसीलदार को दी. तहसीलदार सागायारानी भी मौके पर पहुंचे और बम की जांच करने के बाद उन्होंने अवाडी बम डिस्पोजल स्क्वॉयड को मौके पर बुलाया. बम स्क्वॉयड ने आकर बम को अपने कब्जे में ले लिया और आगे की जांच करने के लिए उसे अपने साथ ले गए. यह बम करीब 2 फुट लंबा है, जो देखने में किसी एरियल बम (हवाई जहाज से गिराया जाने वाला बम) जैसा लग रहा है. ऐसे में माना जा रहा है कि यह बम जापान एयरफोर्स ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान शहर पर किए हमले में गिराया होगा, लेकिन किसी कारण से यह बम नहीं फटा और सालों से ऐसे ही जमीन के नीचे दबा हुआ था. हालांकि इसमें कभी भी धमाका हो सकता था.
महीनों तक जापान के हमले के डर से 'हॉरर टाउन' बना रहा मद्रास
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापानी सेना ने अप्रैल, 1943 में दक्षिण एशिया में सिंगापुर, बर्मा और अंडमान-निकोबार पर कब्जा कर लिया था. इसके बाद मद्रास में हाई अलर्ट घोषित हो गया था, क्योंकि इसके करीब ही ब्रिटिश सेना का सबसे बड़ा आर्मी बेस Avadi में मौजूद था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल में ही मद्रास से 700 किलोमीटर दूर काकीनाड़ा और विशाखापत्तनम में जापानी वायुसेना ने बम अटैक किए थे. इसके बाद मद्रास में न्यूज सेंसरशिप लागू कर दी गई थी. रात के समय 'ब्लैकआउट' लागू कर दिया गया था, रात के समय मरीना बीच पर जाने पर बैन लगा दिया गया था और पूरे मद्रास शहर में लोगों को हवाई हमले के दौरान बचाने के लिए जगह-जगह ट्रेंच खोद दिए गए थे. घरों से शीशे की खिड़कियां हटवा दी गई थी और पेड़ों की कटाई-छंटाई पर बैन लगा दिया गया था. इसके चलते पूरा मद्रास 'हॉरर टाउन' जैसा लगने लगा था.
बदलना पड़ा था शहर को खाने-पीने का मिजाज
बर्मा पर जापानी हमले के बाद चावल की आपूर्ति में आई कमी और पूरे हिंद महासागर में जहाजों पर हमले के चलते मद्रास को अपने खानपान का मिजाज बदलना पड़ा था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस दौर में बड़े पैमाने पर उत्तरी भारत से ब्रिटिश सरकार ने गेहूं मंगाकर राशन के जरिये बंटवाया था, जिससे खाना बनाने की आदत लोगों को नहीं थी. जगह-जगह ब्रिटिश सरकार ने 'फ्री फूड मेकिंग कुकिंग डेमोस्ट्रेशन' कराए थे, जिनमें गेहूं से रोटी और अन्य डिश बनाना सिखाया जाता था. कहा जाता है कि रागी डोसा और गेहूं का डोसा उसी दौर में ईजाद किए गए थे.
जापान बम फेंककर चला गया, तीन दिन तक लोगों को पता ही नहीं था
कई महीने के इंतजार के बाद 11 अक्टूबर, 1943 को जापान ने मद्रास में एयर बॉम्बिंग की. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बॉम्बिंग के बारे में केवल प्रभावित इलाकों को छोड़कर मद्रास के बाकी इलाकों के लोगों को तीन दिन तक पता ही नहीं चला था, क्योंकि मानसूनी बारिश के कारण पूरा मद्रास भयानक बाढ़ से जूझ रहा था. बाढ़ के पानी के कारण एयर वॉर्निंग सायरन भी खराब हो गया था, जिसके चलते जापानी एयरफोर्स के आने पर अलर्ट का सायरन भी नहीं बजाया जा सका था. उस दौर में ना रेडियो चल रही थी, ना न्यूजपेपर छप रहे थे और बाढ़ के कारण बिजली भी नहीं थी. टेलीफोन बेहद कम होते थे और उनकी भी लाइनें बाढ़ के कारण ठप पड़ी हुई थी. इसके चलते जापानी एयरफोर्स की बॉम्बिंग की जानकारी लोगों को तीन दिन बाद उस समय हुई, जब बॉम्बिंग होने और कुछ लोगों के मरने की अफवाह उड़नी शुरू हुई. दावा किया गया कि बॉम्बिंग में 10 लोगों की मौत हुई है. हालांकि तत्कालीन ब्रिटिश वायसराय ने जापानी बॉम्बिंग से मामूली नुकसान होने और कुछ लोग के मरने की बात कहकर पूरा मामला टाल दिया था. इसी बॉम्बिंग में नहीं फटा बम अब जाकर प्लॉट की खुदाई में मिला है, जिसने उस शहर की 'हॉरर टाउन' वाली यादों को बुजुर्गों में फिर से ताजा कर दिया है.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.