डीएनए एक्सप्लेनर
प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों में इस फॉर्मूले को तेजी से लागू किया जा रहा है.
आजकल जब आप पेट्रोल पंप पर जाते होंगे, तो आपको पेट्रोल की मशीनों पर E10 या E20 लिखा हुआ जरूर दिखता होगा. इसे देखकर मन में सवाल आता है कि आखिर ये माजरा क्या है? क्या हमारी कार या बाइक इस नए पेट्रोल के लिए तैयार है? दरअसल, यह पूरा खेल 'पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंडिंग' यानी पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए आज पूरी दुनिया इस फॉर्मूले पर काम कर रही है. आपको बताते हैं कि ये क्या है, दुनिया में कहां-कहां पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंडिंग चल रही है और आपकी गाड़ी इसके लिए कितनी तैयार है.
पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का चलन कोई नया नहीं है. दुनिया के कई बड़े देश सालों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इथेनॉल असल में गन्ने, मक्के या अनाज से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिक्स किया जाता है. अगर दुनिया पर नजर डालें-
अब बात करते हैं अपने भारत की. भारत सरकार ने अपने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम के तहत तय समय से पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E20 पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है. अब देश के ज्यादातर हिस्सों में E20 पेट्रोल मिलने लगा है.
ऐसा नहीं है कि सरकार का मन किया और रातों-रात पेट्रोल का फॉर्मूला बदल दिया गया. इसके पीछे एक लंबा और कड़ा सरकारी नियम-कानून होता है. भारत में जब भी कोई नया फ्यूल वेरिएंट लाना होता है, तो मुख्य रूप से तीन संस्थाएं मिलकर काम करती हैं-
बाजार में उतारने से पहले इस फ्यूल का कड़ा इंजन टेस्ट होता है ताकि देखा जा सके कि इससे गाड़ी के माइलेज या परफॉर्मेंस पर क्या असर पड़ रहा है. पर्यावरण पर इसके प्रभाव की जांच होती है और पेट्रोल पंपों के पाइप, टैंक और नोजल को भी नए फ्यूल के हिसाब से बदला जाता है. इसके बाद ही यह हमारे और आपके लिए उपलब्ध होता है.

अब आते हैं सबसे जरूरी सवाल पर. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना पर्यावरण के लिए तो अच्छा है, लेकिन इंजन के लिए यह थोड़ा पेचीदा होता है. इथेनॉल की एक आदत होती है कि यह नमी को जल्दी सोखता है और कुछ धातुओं या प्लास्टिक को धीरे-धीरे सड़ाने लगता है. साथ ही, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल में एनर्जी थोड़ी कम होती है, जिससे माइलेज पर भी मामूली असर पड़ सकता है.
यही वजह है कि वाहन निर्माता कंपनियां अब अपनी गाड़ियों में बड़े बदलाव कर रही हैं. नए नियमों का पालन करने के लिए कंपनियां अब अपनी गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में ऐसे पाइप, टैंक लगा रही हैं जिन पर इथेनॉल का कोई असर न हो. गाड़ियों के कंप्यूटर यानी ईसीयू को इस तरह से री-कैलिब्रेट किया जा रहा है कि वह हवा और इस नए ईंधन के मिश्रण को सही से संभाल सके.
अगर आपकी गाड़ी साल 2023 या उसके बाद बनी है, तो वह E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह तैयार है. कंपनियां अब ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भी ला रही हैं जिनमें विशेष सेंसर लगे होते हैं, जो खुद पहचान लेते हैं कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल है और उसी हिसाब से इंजन को एडजस्ट कर लेते हैं. तो अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर E20 लिखा देखें, तो घबराएं नहीं, बस अपनी गाड़ी का मैन्युअल देख लें या डीलर से समझ लें कि आपकी गाड़ी किस वेरिएंट के लिए कंपैटिबल है.