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Petrol-Ethanol Blending: क्या आपकी कार नए पेट्रोल के लिए है तैयार? कहां-कहां सफल रहा ये फॉर्मूला

प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए भारत समेत दुनिया के कई बड़े देशों में इस फॉर्मूले को तेजी से लागू किया जा रहा है.

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Petrol-Ethanol Blending: क्या आपकी कार नए पेट्रोल के लिए है तैयार? कहां-कहां सफल रहा ये फॉर्मूला

क्या हर इंजन झेल पाएगा नया फ्यूल? (AI Image)

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  • भारत ने देश के अधिकांश हिस्सों में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है
  • ब्राजील इसमें सबसे आगे है जहां E27 और E100 से चलने वाली गाड़ियां मौजूद हैं
  • अमेरिका, कनाडा और यूरोप के कई देशों में भी E10 व E15 जैसे ईंधन मानक बन चुके हैं
  • साल 2023 या उसके बाद बनी गाड़ियां E20 पेट्रोल के लिए सुरक्षित और तैयार हैं

आजकल जब आप पेट्रोल पंप पर जाते होंगे, तो आपको पेट्रोल की मशीनों पर E10 या E20 लिखा हुआ जरूर दिखता होगा. इसे देखकर मन में सवाल आता है कि आखिर ये माजरा क्या है? क्या हमारी कार या बाइक इस नए पेट्रोल के लिए तैयार है? दरअसल, यह पूरा खेल 'पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंडिंग' यानी पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का है. प्रदूषण कम करने और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए आज पूरी दुनिया इस फॉर्मूले पर काम कर रही है. आपको बताते हैं कि ये क्या है, दुनिया में कहां-कहां पेट्रोल-इथेनॉल ब्लेंडिंग चल रही है और आपकी गाड़ी इसके लिए कितनी तैयार है.

दुनिया के कितने देशों में चल रहा ये फॉर्मूला?

पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का चलन कोई नया नहीं है. दुनिया के कई बड़े देश सालों से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं. इथेनॉल असल में गन्ने, मक्के या अनाज से बनने वाला एक तरह का अल्कोहल है, जिसे पेट्रोल में मिक्स किया जाता है. अगर दुनिया पर नजर डालें-

  • ब्राजील इस रेस में सबसे आगे है. वहां के सामान्य पेट्रोल में भी करीब 27% तक इथेनॉल (E27) मिलाया जाता है.
  • यही नहीं, वहां ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भी धड़ल्ले से चलती हैं जो 100% इथेनॉल (E100) से चलती हैं.
  • अमेरिका में भी E10 पेट्रोल स्टैंडर्ड बन चुका है और वहां E15 और फ्लेक्स फ्यूल के लिए E85 भी मिलता है.
  • कनाडा, थाईलैंड, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय यूनियन के देश भी पर्यावरण को बचाने के लिए E5 और E10 जैसे ईंधनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं.

भारत में क्या है स्थिति?

अब बात करते हैं अपने भारत की. भारत सरकार ने अपने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम के तहत तय समय से पहले ही 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E20 पेट्रोल का लक्ष्य हासिल कर लिया है. अब देश के ज्यादातर हिस्सों में E20 पेट्रोल मिलने लगा है.

कैसे बाजार में एंट्री मारते हैं ये नए फ्यूल वेरिएंट्स?

ऐसा नहीं है कि सरकार का मन किया और रातों-रात पेट्रोल का फॉर्मूला बदल दिया गया. इसके पीछे एक लंबा और कड़ा सरकारी नियम-कानून होता है. भारत में जब भी कोई नया फ्यूल वेरिएंट लाना होता है, तो मुख्य रूप से तीन संस्थाएं मिलकर काम करती हैं-

  • BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स)- यह संस्था नए पेट्रोल की क्वालिटी, उसकी शुद्धता और मानक तय करती है.
  • पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय- यह तय करता है कि रिफाइनरियों से लेकर पेट्रोल पंपों तक यह नया तेल सुरक्षित तरीके से कैसे पहुंचेगा.
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय- यह सुनिश्चित करता है कि सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियां इस नए तेल से सुरक्षित रहें.

बाजार में उतारने से पहले इस फ्यूल का कड़ा इंजन टेस्ट होता है ताकि देखा जा सके कि इससे गाड़ी के माइलेज या परफॉर्मेंस पर क्या असर पड़ रहा है. पर्यावरण पर इसके प्रभाव की जांच होती है और पेट्रोल पंपों के पाइप, टैंक और नोजल को भी नए फ्यूल के हिसाब से बदला जाता है. इसके बाद ही यह हमारे और आपके लिए उपलब्ध होता है. 

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क्या आपकी कार इस नए पेट्रोल के लिए तैयार है? 

अब आते हैं सबसे जरूरी सवाल पर. पेट्रोल में इथेनॉल मिलाना पर्यावरण के लिए तो अच्छा है, लेकिन इंजन के लिए यह थोड़ा पेचीदा होता है. इथेनॉल की एक आदत होती है कि यह नमी को जल्दी सोखता है और कुछ धातुओं या प्लास्टिक को धीरे-धीरे सड़ाने लगता है. साथ ही, पेट्रोल के मुकाबले इथेनॉल में एनर्जी थोड़ी कम होती है, जिससे माइलेज पर भी मामूली असर पड़ सकता है. 

कंपनियां कैसे करती हैं गाड़ियों में बदलाव?

यही वजह है कि वाहन निर्माता कंपनियां अब अपनी गाड़ियों में बड़े बदलाव कर रही हैं. नए नियमों का पालन करने के लिए कंपनियां अब अपनी गाड़ियों के फ्यूल सिस्टम में ऐसे पाइप, टैंक लगा रही हैं जिन पर इथेनॉल का कोई असर न हो. गाड़ियों के कंप्यूटर यानी ईसीयू को इस तरह से री-कैलिब्रेट किया जा रहा है कि वह हवा और इस नए ईंधन के मिश्रण को सही से संभाल सके.

अगर आपकी गाड़ी साल 2023 या उसके बाद बनी है, तो वह E20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह तैयार है. कंपनियां अब ऐसी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां भी ला रही हैं जिनमें विशेष सेंसर लगे होते हैं, जो खुद पहचान लेते हैं कि पेट्रोल में कितना इथेनॉल है और उसी हिसाब से इंजन को एडजस्ट कर लेते हैं. तो अगली बार जब आप पेट्रोल पंप पर E20 लिखा देखें, तो घबराएं नहीं, बस अपनी गाड़ी का मैन्युअल देख लें या डीलर से समझ लें कि आपकी गाड़ी किस वेरिएंट के लिए कंपैटिबल है.

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