डीएनए एक्सप्लेनर
AI Used in IRCTC Ticket Booking: तत्काल रेलवे टिकट को बुकिंग एजेंट्स ने अपनी कमाई का धंधा बना लिया था. इसके लिए वे तमाम तरह के हथकंडे अपना रहे थे, जिससे बेचारा आम आदमी टिकट बुक कराने से महरूम हो जाता था. अब इस पर रेलवे ने AI की मदद से डिजिटल स्ट्राइक की है.
AI Used in IRCTC Ticket Booking: रेलवे टिकट बुकिंग करना माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने से भी ज्यादा कठिन काम है. आप यदि टिकट बुक करा पाएं तो खुद को 'लकी' कह सकते हैं, क्योंकि तमाम कोशिशों के बावजूद रेलवे टिकट बुकिंग (Railway Ticket Booking) के पीछे दलालों का खेल खत्म ही नहीं खत्म ही नहीं हो पाता था. खासतौर पर तत्काल रेलवे टिकट (Tatqal Railway Ticket) के जरिये सफर करना तो आम आदमी के लिए सपना ही बन गया है, क्योंकि इनकी बुकिंग खुलते ही दलाल एक्टिव हो जाते हैं और एक 'गंदे काम' के जरिये महज 2 मिनट में सारी सीट बुक करा लेते थे. साथ ही वे ऐसा काम करते हैं, जिससे पूरा IRCTC प्लेटफॉर्म ही सुबह 10 बजे ठप हो जाता था, लेकिन अब इंडियन रेलवे (Indian Railway) ने दलालों के इस धंधे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) की मदद से डिजिटल स्ट्राइक (Digital Strike) की है. इस स्ट्राइक के बाद IRCTC पर 3.5 करोड़ नकली अकाउंट बंद कर दिए गए हैं. रेलवे का दावा है कि इससे दलालों को बड़ी संख्या में बाहर कर दिया गया है और ऐसी तैयारी भी कर ली गई है कि आगे वे अपने 'गंदे काम' के जरिये ना तो वेबसाइट ठप कर पाएंगे और ना ही फर्जी टिकट बुक करा पाएंगे.
चलिए आपको 5 पॉइंट्स में बताते हैं कि इंडियन रेलवे ने क्या कार्रवाई की है और कैसे दलालों पर अंकुश लगाने की तैयारी की गई है.
1. किस तरह चल रहा था फर्जीवाड़ा
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) के प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन टिकट बुकिंग होती है. जब आप किसी अनधिकृत एजेंट को टिकट बुक कराने के लिए कहते हैं तो वह दर्जनों फर्जी प्रोफाइल से इस प्लेटफॉर्म पर एकसाथ लॉगिन करता है. इसके लिए फर्जी ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल होता है. इन सभी प्रोफाइल से वह आपको टिकट को बुक करने की एकसाथ कोशिश करता है. इससे आपका टिकट बुक होने के चांस उतने फीसदी बढ़ जाते हैं, जितने नकली प्रोफाइल वह एजेंट यूज कर रहा है. इससे एक ही आईडी से टिकट बुक करने की कोशिश कर रहे आम आदमी के लिए चांस उतने ही फीसदी घट जाते हैं यानी आखिर में आमतौर पर एजेंट की तरफ से कराई जा रही टिकट बुकिंग ही सफल होती है.
2. वन टाइम यूज ईमेल का करते हैं उपयोग
एजेंट इस तरह की टिकट बुकिंग के लिए वन टाइम यूज ईमेल ID का इस्तेमाल करते हैं. यह Disposable होती है, जो महज एक बार ही इस्तेमाल की जाती है. ऐसे ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल इस काम में किया जाता है. ईमेल आईडी पर OTP लेकर एजेंट फर्जी प्रोफाइल को IRCTC वेबसाइट पर वैरीफाई कर देते हैं और वह एक्टिव हो जाता है. इसके बाद वह उस प्रोफाइल को टिकट बुकिंग में लगा देता है.
3. क्या होता है इससे नुकसान
इस तरह से टिकट बुक कराने पर एकतरफ तो आम पैसेंजर के लिए बुकिंग में नंबर आने के चांस बेहद कम हो जाते हैं. दूसरी तरफ यह 'गंदा काम' बुकिंग वेबसाइट को भी ओवरलोड करके उसे डाउन कर देती है. मान लीजिए आपके टिकट के लिए एजेंट ने 20 फर्जी प्रोफाइल बनाए. आप जैसे 1,000 यात्री ऐसे एजेंट्स के पास चले गए और सभी एकसाथ टिकट बुक कराने लगे तो टिकट महज 1,000 लोगों का बुक हो रहा है, लेकिन उसके कारण सिस्टम पर लोड 20,000 लॉगिन का बढ़ जाता है. इससे सिस्टम स्लो हो जाता है और कई बार हैवी ट्रैफिक के कारण वेबसाइट डाउन हो जाती है. इतने सारे अकाउंट एक साथ चलाने के लिए एजेंट्स बॉटस का भी इस्तेमाल करते हैं, जिससे IRCTC वेबसाइट पर ट्रैफिक जाम और ज्यादा बढ़ जाता है.
4. AI से बाहर किए गए बॉट्स
Indian Railway ने IRCTC प्लेटफॉर्म में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) को इनबिल्ट किया है. इन्हें बॉट डिटेक्शन तकनीक के साथ लागू किया गया है. यह तकनीक फर्जी प्रोफाइल, डिस्पोजेबल ईमेल आईडी और बॉट्स को पहचानकर उन्हें बुकिंग से पहले ही ब्लॉक कर देती है. इसकी मदद से ही 3.5 करोड़ फर्जी यूजर ID को पिछले एक साल के दौरान IRCTC ने अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है.
5. यह हो गया है इसका लाभ
IRCTC की इस कवायद के चलते उसके प्लेटफॉर्म पर लोड बहुत घट गया है. पहले जहां रोजाना 60 से 65,000 नई यूजर आईडी प्लेटफॉर्म पर आती थी. अब यह संख्या महज 10 से 12,000 रह गई है. इससे बुकिंग सिस्टम का लोड घटा है और वहां अब तेजी से टिकट बुक हो पा रहे हैं. इस सिस्टम ने 7,000 से ज्यादा फर्जी ईमेल ID को भी ब्लॉक कर दिया है. इससे अब प्लेटफॉर्म पर आम आदमी को टिकट बुक कराने में ज्यादा मदद मिल रही है.
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