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Explainer: लड़ाकू विमान से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाएगा भारत! जानिए क्या है ET-LDHCM प्रोग्राम

बिजली जैसी रफ्तार और 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह हाइपरसोनिक मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट करियर को लंबी दूरी से ही निशाना बना सकती है. ET-LDHCM ब्रह्मोस से तीन गुना ज्यादा तेज होगी.

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Explainer: लड़ाकू विमान से लॉन्च होने वाली  हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाएगा भारत! जानिए क्या है ET-LDHCM प्रोग्राम

ET-LDHCM ब्रह्मोस से तीन गुना ज्यादा तेज होगी. (AI इमेज)

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  • भारत हवा से लॉन्च होने वाली  हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने की दिशा में आगे बढ़ा.
  • एडवांस्ड डुअल-मोड रैमजेट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से बनाई जाएगी ET-LDHCM.
  • ET-LDHCM  9,900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हमला कर सकती है.

Extended Trajectory Long Duration Hypersonic Cruise Missile: भारत का मिसाइल कार्यक्रम पहले से ही काफी उन्नत है. देश की सेनाओं के पास अग्नि, प्रलय, ब्रह्मोस और के-4 जैसी मिसाइलें हैं. अब भारत भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के विकास पर भी काम कर रहा है. डीआरडीओ 'एक्सटेंडेड ट्रेजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल' (ET-LDHCM) प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहा है. 'प्रोजेक्ट विष्णु' के तहत विकसित की जा रही 
ET-LDHCM भारत की सबसे उन्नत और घातक मिसाइलों में एक होगी. ये कार्यक्रम बेहद ही गोपनीय है. इस कार्यक्रम को लेकर ओपन सोर्स डेटा से जो जानकारी मिली है उसमें सामने आया है कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन इस मिसाइल के हवा से दागे जाने वाले वर्जन पर भी काम शुरू करने वाला है.

ET-LDHCM आखिर है क्या?

'एक्सटेंडेड ट्रेजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल' भारत की भविष्य की मिसाइल है. यह एक ऐसा हथियार है जिसे 1,500 किलोमीटर दूर के लक्ष्य को तबाह करने के लिए विकसित किया जा रहा है. खास बात ये है कि ET-LDHCM एक हाइपरसोनिक मिसाइल होगी जो 'मैक 8' यानी लगभग 9,900 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दुश्मन के ठिकानों पर हमला करेगी. ऐसी मिसाइल अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास ही हैं. ET-LDHCM को ताकत स्क्रैमजेट इंजन से मिलेगी. 

हवा से लॉन्च की जाने वाली ET-LDHCM  क्या है?

इंडियन डिफेंस रिसर्च विंग की एक रिपोर्ट के अनुसार, डिफेंस साइंटिस्ट एक्सटेंडेड ट्रेजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल को हवा से लॉन्च होने वाले मिसाइल में भी बदलने की कोशिश कर रहे हैं. उस कोशिश का उद्देश्य ये है कि  ET-LDHCM को भविष्य में भारतीय वायु सेना के फाइटर एयरक्राफ्ट से लॉन्च किया जा सके. ऐसा हथियार भारत की लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा. माना जा रहा है कि हवा से लॉन्च होने वाली हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में एडवांस्ड डुअल-मोड रैमजेट प्रोपल्शन का इस्तेमाल हो सकता है. इस तरह की तकनीक में एक ही प्रोपल्शन सिस्टम में रैमजेट और स्क्रैमजेट दोनों तकनीकों को मिक्स किया जाता है. इस खास तकनीक के इस्तेमाल से ET-LDHCM के एयर वर्जन की स्पीड भी बढ़ जाएगी और रेंज में भी इजाफा होगा. ET-LDHCM के एयर वर्जन को  Su-30MKI, राफेल, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और तेजस मार्क-2 से लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया जाएगा. 

कैसे गेम चेंजर बनेगी ET-LDHCM?

ET-LDHCM का रणनीतिक महत्व बहुत ज्यादा है. इसे जमीन, हवा और समुद्र से लॉन्च करने की क्षमता हासिल करने के बाद भारतीय सेनाओं की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी. खास बात ये है कि ET-LDHCM 1,000 से 2,000 किलोग्राम वजन वाले पारंपरिक या परमाणु वॉरहेड, दोनों ले जाने में सक्षम होगी. यह दुश्मन के सबसे मुश्किल एयर डिफेंस सिस्टम को भी भेद सकती है. ये मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ने के लिए डिजाइन की गई है. साथ ही यह उड़ान के दौरान दिशा बदलने में भी सक्षम है. ET-LDHCM भारत की अब तक की सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस से रफ्तार के मामले में तीन गुना तेज होगी. इसकी रेंज भी ब्रह्मोस से लगभग दो गुनी होगी. 

क्या-क्या कर सकती है ET-LDHCM?

बिजली जैसी रफ्तार और 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली यह हाइपरसोनिक मिसाइल दुश्मन के युद्धपोतों और एयरक्राफ्ट करियर को लंबी दूरी से ही निशाना बना सकती है. यह जमीन पर मौजूद स्थिर लक्ष्यों जैसे कमांड सेंटर, रडार केंद्र, हथियार भंडार और एयर बेस को तबाह कर सकती है. हवा से लॉन्च होने वाली 'एक्सटेंडेड ट्रेजेक्टरी लॉन्ग ड्यूरेशन हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल' और भी ज्यादा खतरनाक होगी क्योंकि इसे अपनी सीमा में काफी अंदर रहते हुए लॉन्च किया जा सकता है. ET-LDHCM को चीन की बढ़ती सैन्य ताकत का सामना करने के लिए सबसे अहम हथियार माना जा रहा है. 

कितना खास है 'प्रोजेक्ट विष्णु'?

स्क्रैमजेट तकनीक को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग का सबसे मुश्किल काम माना जाता है. भारत अब इस तकनीक पर भी महारत हासिल करने के बेहद करीब है. 'प्रोजेक्ट विष्णु' के तहत रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन एक नहीं बल्कि 12 अलग-अलग तरह के हाइपरसोनिक हथियार विकसित कर रहा है. DRDO का ये कार्यक्रम भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की खास जरूरतों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया जा रहा है. इस पूरे प्रोग्राम के तहत हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल, ब्रह्मोस मिसाइल का यह हाइपरसोनिक वर्जन, एंटी-हाइपरसोनिक डिफेंस सिस्टम और हाइपरसोनिक ड्रोन और डिकॉय विकसित किए जाएंगे. 

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