डीएनए एक्सप्लेनर
BSF in Operation Sindoor: पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने के लिए जब भारतीय सेना (Indian Army) पाकिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक कर रही थी. उसी समय पाकिस्तानी सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) पड़ोसी देश की घुसपैठ को नाकाम बना रही थी, जिसमें महिला जवानों की भूमिका अहम रही.
BSF in Operation Sindoor: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) चलाकर पाकिस्तान के छक्के छुड़ा दिए हैं. इस ऑपरेशन के दौरान जब भारतीय सेना (Indian Army) पाकिस्तान के अंदर एयर स्ट्राइक से वहां की सेना (Pakistan Army) के छक्के छुड़ा रही थी, उस समय पाकिस्तान से सटी सीमा पर बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने भी जबरदस्त बहादुर दिखाते हुए हर तरह की घुसपैठ की कोशिश नाकाम कर दी. 7 से 10 मई तक चले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जवानों की बहादुरी की बहुत सारी कहानियां अब तक सामने आ रही हैं. इन्हीं में BSF की उन 7 महिलाओं की भी कहानी है, जिन्होंने सीमा पर चौकियों में मोर्चा जमाकर ना केवल घुसपैठ को नाकाम किया बल्कि दुश्मन को अपनी चौकियों से भागने पर भी मजबूर कर दिया. इनमें ही बीएसएफ की वे 7 महिला जवान भी शामिल हैं, जिन्होंने 3 दिन और 3 रात तक दो अहम बॉर्डर चेकपोस्ट पर हैवी आर्टिलरी फायरिंग का सामना करते हुए भारतीय सरजमीं पर दुश्मन को कदम नहीं रखने दिया.
ये हैं पाकिस्तानियों को डराने वालीं जांबाज महिला बीएसएफ जवान
पहली बार BSF ने एक्टिव वॉर के दौरन महिला जवानों को फॉरवर्ड पोस्ट पर तैनाती दी थी. महिला जवानो ने पुरुषों से भी ज्यादा बेहतरीन काबिलियत दिखाते हुए अखनूर सेक्टर में दुश्मन के छक्के छुड़ा दिए. इन 7 महिला जवानों में असिस्टेंट कमांडेंट नेहा भंडारी, मंजीत कौर, मलकीत कौर (पंजाब), स्वप्ना राठ, शंपा बसाक (पश्चिम बंगाल), सुमी जेस्स (झारखंड) और ज्योति बनियन (ओडिशा) शामिल थीं. इनमें से नेहा भंडारी समेत चार महिलाएं 2023 में बीएसएफ का हिस्सा बनी है, जबकि मंजीत और मलकीत 17 साल से बीएसएफ में सेवा दे रही हैं.
अखनूर सेक्टर में तैनात थीं ये 7 महिलाएं
तीन साल पहले BSF की असिस्टेंट कमांडेंट बनीं नेहा भंडारी के नेतृत्व में 6 जांबाज महिला जवान जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में दो फॉरवर्ड बॉर्डर चेकपोस्ट संभाल रही थीं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इन महिला जवानों ने अपनी चौकियों की दुश्मन की गोलीबारी से हिफाजत की और इस दौरान पाकिस्तानी चौकियों को ध्वस्त करके उसके सिपाहियों के छक्के भी छुड़ा दिए. नेहा को इस बेहतरीन नेतृत्व के लिए शुक्रवार (30 मई) को भारतीय सेना प्रमुख यानी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (General Upendra Dwivedi) ने भी सम्मानित किया है. BSF Jammu की नेहा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान असाधारण साहस दिखाने और नेतृत्व संचालन के लिए जनरल द्विवेदी ने कमांडेशन डिस्क देकर सम्मानित किया. बीएसएफ के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल एसएस मंड ने भी इन महिला जवानों की बहादुरी को सराहा है.
On 30 May 2025, COAS General Upendra Dwivedi, PVSM, AVSM, felicitated Assistant Commandant Neha Bhandari of BSF Jammu with the Commendation Disc for her exceptional courage and operational proficiency during Operation Sindoor. She gallantly commanded a forward deployed BSF… pic.twitter.com/6PDPfTZzQB
— BSF JAMMU (@bsf_jammu) May 30, 2025
पुरुषों जैसी ट्रेनिंग, पुरुषों को ही दी चुनौती
असिस्टेंट कमांडेंट नेहा भंडारी ने बताया कि हमें भी पुरुष जवानों जैसी ही कठिन ट्रेनिंग दी गई है. हमने ऑपरेशन सिंदूर में एक भी इंच पीछे नहीं हटने का फैसला आगे बढ़कर लिया था. उन्होंने अपने सीनियर्स के सामने महिला जवानों को पीछे नहीं हटाए जाने की जिद की. इस पर अधिकारियों ने उन्हें ही अपनी कंपनी की कमान संभालने और घुसपैठ रोकने का मौका दिया.
पाकिस्तान के सैनिक चौकियां छोड़कर भागे
पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सियालकोट से भारतीय इलाके में जबरदस्त भारी गोलीबारी कर रखी थी. इसके बावजूद नेहा ने अपनी साथियों के साथ पीछे हटने से इंकार कर दिया. महिला जवानों ने जांबाजी के साथ फ्लैट ट्रैजेक्टरी और रीजनल वैपन्स का ऐसा इस्तेमाल किया कि पाकिस्तानी सैनिक अपनी चौकियां छोड़कर भाग गए. नेहा के माता-पिता भी सीआरपीएफ (CRPF) में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
अपने फैसले खुद लिए महिला जवानों ने
नेहा भंडारी के नेतृत्व में न केवल महिला जवानों ने अपनी चौकी रक्षा की बल्कि उन्होंने हथियारों और तोपों के इस्तेमाल के फैसले भी खुद ही लिए. बीएसएफ के डीआईजी वरिंदर दत्ता के मुताबिक, नेहा ने बीएसएफ जवानों के साथ ही सेना की अतिरिक्त टुकड़ियों का भी नेतृत्व किया. उन्होंने हथियारों और तोपों के इस्तेमाल के फैसले स्वतंत्र रूप से लिए. यह किसी महिला अधिकारी के एक्टिव वॉर में भाग लेने का पहला मौका है. इस दौरान BSF ने सांबा, कठुआ और जम्मू् सेक्टर की 70 से ज्यादा चौकियां और तीन टैरर लॉन्चपैड नष्ट किए थे, जिसमें नेहा और उनकी टीम का भी योगदान रहा है.
गुजरात में भी 800 से ज्यादा महिला बीएसएफ में तैनात
जम्मू-कश्मीर के अलावा गुजरात में भी बड़ी संख्या में महिला जवानों की तैनाती बीएसएफ में रही है. शनिवार (31 मई) को BSF Gujarat के IG अभिषेक पाठक ने गांधीनगर में कहा,'गुजरात में 800 से ज्यादा महिला बीएसएफ जवान तैनात हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ये सभी महिला जवान सीमा पर तैनात रही हैं. मैं खासतौर पर असिस्टेंट कमांडेंट अमनदीप और असिस्टेंट कमांडेंट नीति यादव का नाम लूंगा. दोनों महिला अफसरों ने अपनी कंपनियों का कच्छ के रण में सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण माने जाने वाले सर क्रीक एरिया (Creek Area) में कंपनी कमांडेंट के तौर पर नेतृत्व किया है.
#WATCH | #OperationSindoor | Gandhinagar: IG, BSF Gujarat, Abhishek Pathak says, "... There are more than 800 women BSF personnel in Gujarat. During the entire operation, all the women BSF personnel were deployed at the border. I want to mention Assistant Commandants Amandeep and… pic.twitter.com/Vdn0hzCYfN
— ANI (@ANI) May 30, 2025
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