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'माल' फूंकने के बावजूद कैसे कानून के चंगुल से बचा आईआईटी बाबा? गांजे को लेकर क्या कहता है Law

हाल में ही संपन्न हुए महाकुंभ में लोकप्रिय हुए आईआईटी बाबा उर्फ़ अभय सिंह अभी बीते दिनों ही गांजे के साथ गिरफ्तार हुए थे, जिन्हें जमानत बांड भरने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया है. जानिये गांजे को लेकर क्या कहता है कानून.

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'माल' फूंकने के बावजूद कैसे कानून के चंगुल से बचा आईआईटी बाबा? गांजे को लेकर क्या कहता है Law
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हाल ही में संपन्न हुए महाकुंभ के दौरान चर्चा में आए आईआईटी बाबा के नाम से मशहूर अभय सिंह को जयपुर में गांजा रखने के आरोप में कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया. अभय सिंह के खिलाफ नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. जयपुर पुलिस कमिश्नर की ओर से जारी बयान के मुताबिक, आईआईटी बाबा को जमानत बांड भरने के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया, क्योंकि उनके पास से बरामद गांजा व्यावसायिक मात्रा में नहीं था.

चूंकि यह मामला लगातार सुर्खियों में है इसलिए हमारे लिए भी यह जानना बहुत जरूरी है कि गांजे (मारिजुआना) के कब्जे, सेवन और बिक्री के बारे में कानून की राय क्या है? 

यह मुद्दा भारत में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS एक्ट) द्वारा शासित है. ध्यान रहे कि NDPS एक्ट एक ऐसा कानून है जो नारकोटिक ड्रग्स और साइकोट्रोपिक पदार्थों से संबंधित संचालन के नियंत्रण और विनियमन के लिए कड़े प्रावधान स्थापित करने के लिए बनाया गया है.

एनडीपीएस अधिनियम की धारा 2(iii)(बी) के अनुसार, 'भांग" में गांजा शामिल है, जो भांग के पौधे के फूल या फल के ऊपरी भाग को संदर्भित करता है. अधिनियम की धारा 20 भांग के पौधे और भांग के संबंध में उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करती है.

यह धारा भांग के उत्पादन, निर्माण, कब्जे, बिक्री, खरीद, परिवहन, अंतरराज्यीय आयात, अंतरराज्यीय निर्यात या उपयोग के लिए दंड निर्धारित करती है. 

एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20 में भांग से संबंधित अपराधों के लिए दंड की रूपरेखा दी गई है, जो कि रखी गई मात्रा के आधार पर अलग-अलग है:

छोटी मात्रा (1 किलोग्राम तक गांजा): 1 वर्ष तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों.

छोटी मात्रा से अधिक लेकिन वाणिज्यिक मात्रा से कम (1 किलोग्राम से 20 किलोग्राम): 10 वर्ष तक की कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना.

वाणिज्यिक मात्रा (20 किलोग्राम या उससे अधिक): 10 से 20 वर्ष तक की कैद और 1 लाख रुपये से 2 लाख रुपये तक का जुर्माना.

आरोपी व्यक्तियों को उन मामलों में ज़मानत मिलने की संभावना ज़्यादा होती है, जहां शामिल पदार्थ की मात्रा कम होती है. बताते चलें कि अधिनियम की धारा 37 ज़मानत देने के लिए कड़ी शर्तें लगाती है. हालांकि, ये शर्तें विशेष रूप से वाणिज्यिक मात्रा से जुड़े अपराधों और अधिनियम की धारा 19, धारा 24 या धारा 27A के तहत अपराधों पर लागू होती हैं.

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