डीएनए एक्सप्लेनर
वैश्विक व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले भारतीय नाविक इस समय युद्ध क्षेत्रों के बीच फंस रहे हैं, जिससे उनकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
ओमान के तट के पास अमेरिकी सेना की एक कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई है, जिसने भारत सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं. केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुरुवार (11 जून 2026) को पुष्टि की है कि खाड़ी में लापता हुए तीनों भारतीय क्रू मेंबर्स के शव बरामद कर लिए गए हैं. इस गंभीर घटना के बाद नई दिल्ली में हड़कंप मच गया है और भारत सरकार ने अमेरिकी उप-राजदूत को तलब कर इस हमले पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है.
अमेरिकी सेना का कहना है कि उसने ओमान की खाड़ी में 'एमटी सेट्टेबेलो' (MT Settebello) नाम के एक तेल टैंकर पर सटीक हमला किया था, क्योंकि वह उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहा था और उस पर ईरान का तेल लदा था. इस पलाऊ-ध्वज वाले जहाज पर कुल 21 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से 18 को बचा लिया गया, लेकिन 3 ने अपनी जान गंवा दी.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और इसे बेहद चिंताजनक बताते हुए दोनों पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है. पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध के चलते इस साल मार्च से अब तक कुल 6 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं. इस घटना ने एक बार फिर दुनिया के समंदरों में काम करने वाले लाखों भारतीय नाविकों की सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था में उनकी बड़ी भूमिका पर रोशनी डाल दी है.
शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि दुनिया का करीब 90 से 95 फीसदी व्यापार समंदर के रास्ते ही होता है. आज वैश्विक मर्चेंट नेवी या शिपिंग इंडस्ट्री में भारतीयों का डंका बजता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा समय में 3 लाख से ज्यादा भारतीय नाविक अंतरराष्ट्रीय पानी में काम कर रहे हैं, जो एक दशक पहले महज सवा लाख थे. आज दुनिया के कुल जहाजी कार्यबल में 10 से 12 फीसदी हिस्सेदारी अकेले भारतीयों की है.
ये नाविक सिर्फ छोटे-मोटे काम नहीं करते, बल्कि बड़े-बड़े जहाजों के कैप्टन, मरीन इंजीनियर, नेविगेशन ऑफिसर और तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में जिम्मेदारी संभालते हैं. कच्चा तेल, एलएनजी (LNG), अनाज और रोजमर्रा का सामान दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक सुरक्षित पहुंचाने का पूरा दारोमदार इन्हीं कंधों पर होता है. लेकिन जब भी खाड़ी देशों या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संकरे समुद्री रास्ते पर युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो ये नाविक अनजाने में ही सीधे जंग के मैदान के बीच फंस जाते हैं.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) की रिपोर्ट बताती है कि इस संकट में विदेशी जहाजों पर काम कर रहे कम से कम 78 भारतीय नाविक सीधे हमलों की चपेट में आए. समंदर में मंडराते ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण पैदा हुए खतरों को देखते हुए जहाजों को लगातार अलर्ट रहने और पल-पल की रिपोर्ट देने की हिदायत दी गई है. सिर्फ विदेशी जहाज ही नहीं, बल्कि भारत के अपने 37 से ज्यादा कमर्शियल जहाज और उनमें सवार 1100 से अधिक नाविक भी इस तनाव के चलते ओमान की खाड़ी और फारस की खाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में फंस गए हैं.
मिसाइल हमलों के डर और समुद्री रास्ते बंद होने की वजह से कई जहाजों को हाई-रिस्क जोन में ही लंगर डालकर रुकना पड़ा है. हफ्तों तक समंदर के बीच फंसे रहने के कारण इन नाविकों और घर पर उनके परिवारों में भारी मानसिक तनाव का माहौल है. मदद के लिए सरकारी हेल्पलाइन पर अब तक 11 हजार से ज्यादा फोन कॉल्स और 25 हजार से अधिक ईमेल आ चुके हैं.
इस संकट के बीच भारत सरकार अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही है. जहाजरानी मंत्रालय के मुताबिक, अब तक अलग-अलग प्रभावित इलाकों से 3,474 भारतीय नाविकों को सुरक्षित एयरलिफ्ट या रेस्क्यू कर भारत वापस लाया जा चुका है.
नागरिकों की सुरक्षा के लिए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग सीधे भारतीय नौसेना, विदेश मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मिशनों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रहा है. जहाजों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है और किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एक विशेष क्विक रिस्पांस टीम बनाई गई है, जो चौबीसों घंटे नाविकों और उनके परिवारों की मदद में जुटी है.