डीएनए एक्सप्लेनर
अपने कार्यकाल के पहले ही दिन डोनाल्ड ट्रंप ने 100 से अधिक कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किये हैं. माना जा रहा है कि ये सब उन्होंने अपने समर्थकों को लुभाने के लिए किया. वहीं आलोचक इससे नाखुश हैं और मानते हैं कि यूएस बर्बादी की कगार पर आ गया है.
कयास लगाए जा रहे थे कि दोबारा सत्ता में वापसी के बाद डोनाल्ड ट्रंप ऐसे तमाम क्रांतिकारी फैसले लेंगे, जो दुनिया को हैरत में डालेंगे. ऐसा ही हुआ है. माना जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा पहले ही दिन जारी किए गए 100 से अधिक कार्यकारी आदेश, राजनीतिक परिदृश्य को नाटकीय रूप से बदल देंगे. ट्रंप के ये तमाम आदेश न्याय से लेकर आव्रजन तक, जलवायु से लेकर स्वास्थ्य तक, लिंग से लेकर TikTok पर प्रतिबंध तक नीतिगत क्षेत्रों की एक विविध श्रेणी को कवर करते हुए नजर आते हैं.
दिलचस्प ये कि अपने उद्घाटन भाषण में भी ट्रंप ने 'अमेरिका के लिए स्वर्ण युग' की बात को दोहराया है. वहीं ट्रंप को लेकर फिर एक बार बयानबाजी की शुरुआत हो गयी है. राष्ट्रपति ट्रंप को ध्यान में रखकर डेमोक्रेटिक सीनेट के नेता चक शूमर का कहना है कि, डोनाल्ड ट्रंप उन लोगों के लिए स्वर्ण युग की शुरुआत कर रहे हैं जो कानून तोड़ते हैं और सरकार को उखाड़ फेंकने का प्रयास करते हैं.'
सामूहिक निर्वासन को उचित ठहराने के लिए यूएस-मेक्सिको सीमा पर राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करना, ये बताता है कि ट्रंप ने पूर्व में जो कुछ भी अपनी रैलियों में कहा वो सच निकला.
इसी तरह संघीय कर्मचारियों को नियुक्त करने और निकालने के लिए सिविल सेवा पदों को पुनर्वर्गीकृत करना, स्वतः इस बात की तरफ इशारा कर देता है कि अपने इस कार्यकाल में 'डीप स्टेट' को ख़त्म करना डोनाल्ड ट्रम्प का मुख्य एजेंडा रहने वाला है.
चूंकि पहले ही दिन ट्रंप ने एकसाथ कई आदेश पारित किये हैं. इसलिए आदेशों की व्यापकता और तात्कालिकता व्हाइट हाउस और कांग्रेस के बीच सत्ता के संतुलन के बारे में बहस को बढ़ावा देती हुई भी नजर आ रही है.
अमेरिका के मद्देनजर विधायी प्रक्रिया को दरकिनार करने से यह आशंका भी पैदा हो रही है कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई लोकतांत्रिक मानदंडों को कमजोर कर सकती है. ध्यान रहे कि कानूनी चुनौती की संभावना ट्रंप की महत्वाकांक्षा और संवैधानिक बाधाओं के बीच रस्साकशी को रेखांकित करती है.
लेकिन ट्रंप के नेतृत्व में पेरिस जलवायु समझौते और विश्व स्वास्थ्य संगठन से जिस तरह अमेरिका पीछेहटा है इससे दुनिया भर को एक बड़ा संकेत भी मिलता हुआ नजर आ रहा है.
व्हाइट हाउस में अपने पहले कार्यकाल के दौरान अपनाई गई 'अमेरिका फर्स्ट' अलगाववादी की वो नीति है जो ट्रंप ब्रिगेड को क्षणिक फायदा तो दे सकती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम क्या होंगे इसे लेकर दुनिया भर में संशय की स्थिति जस की तस है.
जैसा कि हम ऊपर ही इस बात को जाहिर कर चुके हैं. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल पर दुनिया भर के अलावा उनके आलोचकों विशेषकर डेमोक्रेट्स की नजर है. तो एक बड़ा वर्ग वो भी है जो इस बात को स्वीकार करता है कि इन आदेशों के जरिये ट्रंप सिर्फ और सिर्फ दिखावा कर रहे हैं.
आलोचक इस बात को बल दे रहे हैं कि ट्रंप अपनी नीतियों से उन लोगों को खुश करने का प्रयास कर रहे हैं जो अमेरिका में अलगाववाद के पक्षधर हैं. कहा जा रहा है कि ओवल ऑफिस डेस्क पर ऐसे कई आदेश हैं जिन्हें वास्तव में लागू करना चाहिए. मगर ट्रंप ने उन्हें लेकर अब तक कहीं पर भी कोई बात नहीं की है.
ट्रंप ने अपनी अनूठी शैली में जिन भी आदेशों पर हस्ताक्षर किये हैं यदि उनका अवलोकन किया जाए तो मिलता यही है कि वो स्पष्ट तौर पर ट्रंप को फायदा दे रहे हैं.
बहरहाल अमेरिका में उद्घाटन के साथ बहुत सी परंपराएं जुड़ी हुई हैं, लेकिन जैसा ट्रंप का स्वाभाव और नजरिया है संयुक्त राज्य अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति उन तमाम पारंपरिक चीजों से बहुत दूर हैं.
ट्रंप बिना किसी फ़िल्टर के, बिना किसी स्क्रिप्ट के हमेशा शोमैन की तरह रहते हैं. चाहे वो घर हो या विदेश वो टिपिकल राजनीति के मानदंडों में बहुत ज़्यादा दिलचस्पी नहीं रखते. '
खैर बात अतरंगे आदेशों की हुई है तो फिर एक बार इन आदेशों के जरिये ट्रंप ने दुनिया को इस बी बात से अवगत कराया है कि उनको लेकर कितनी भी बातें क्यों न हो जाएं लेकिन सच्चाई यही है कि वो अप्रत्याशित हैं.
जाते जाते हम फिर इस बात को दोहराना चाहेंगे कि ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका कितनी दूर जाता है? इसका जवाब वक़्त देगा. लेकिन राजनीति पर जो नजरिया ट्रंप का है, वो इस बात के संकेत दे देता है कि अपने इस कार्यकाल में ट्रंप ऐसे तमाम फैसले लेंगे. जिन्हें देखकर दुनिया दंग रह जाएगी.
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