डीएनए एक्सप्लेनर
चीन ने बुधवार को व्लादिमीर पुतिन और किम जोंग उन के सामने दुनिया की सबसे बड़ी सेना और अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया. माना जा रहा है कि इस शक्ति प्रदर्शन के एवज में चीन को अरबों युआन खर्च करने पड़े.
मौजूदा वक़्त में पूरे विश्व में जैसी राजनीति चल रही है, सशक्त उसी राष्ट्र को माना जाता है जिसकी सेना मजबूत है. विभिन्न मुल्क भी इस बात को समझते हैं. और शायद यही वो कारण है, जिसके चलते अलग अलग देशों द्वारा अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा अपनी 'रक्षा या ये कहें सेना पर खर्च किया जा रहा है. दुनिया को अपना 'वर्चस्व' दिखाने की ये लड़ाई कैसी है इसका अंदाजा उस सैन्य परेड को देखकर लगाया जा सकता है जिसके कारणवश अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चीन सुर्खियों में आ गया है.
बता दें कि चीन की अब तक की सबसे बड़ी सैन्य परेड आयोजित हुई, जिसमें राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हज़ारों दर्शकों के सामने अपने देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन, बीजिंग में मौजूद उन 26 अन्य विश्व नेताओं में शामिल थे जिन्होंने हज़ारों सैनिकों, बख्तरबंद वाहनों, टैंकों और एक नई अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल की परेड को तियानमेन चौक पर देखा.
बताते चलें कि चीन में आयोजित यह बेहद कोरियोग्राफ़्ड तमाशा एक 'विजय दिवस' समारोह था, जो द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में जापान की हार के 80 साल पूरे होने का प्रतीक था.
बताया यह भी जा रहा है कि अमेरिका, पश्चिमी यूरोप, जापान और भारत के नेता इसमें शामिल नहीं हुए, और दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देशों ने निचले स्तर के अधिकारियों को भेजा. केवल पश्चिमी नेता ही उपस्थित थे, जैसे स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फ़िको और सर्बिया के अलेक्जेंडर वुसिक.
यह परेड लगभग दो घंटे तक चली और ताइवान सरकार के अनुसार, इस पर चीन को लगभग 5 अरब डॉलर (£3.75 अरब) का खर्च आया. लेकिन दुनिया भर की अन्य विशाल सैन्य परेडों की तुलना में इसकी क्या तुलना थी? आइये आधुनिक इतिहास की कुछ सबसे उल्लेखनीय परेडों पर एक नज़र डालते हैं.
साम्यवादी चीन की 'स्थापना' के उपलक्ष्य में परेड
2019 के बाद से चीन में पहली बड़ी सैन्य परेड थी, जब साम्यवादी चीन की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक विशाल आयोजन किया गया था. उस परेड में, जो चीन के इतिहास में कई परेडों में से एक थी - 15,000 सैनिकों ने मध्य बीजिंग में मार्च किया, जबकि 160 से अधिक विमान ऊपर से उड़ान भर रहे थे.
2009 में 60वीं वर्षगांठ भी बहुत बड़ी थी - इसमें लगभग 2,00,000 नागरिकों ने देखा और 1,00,000 से अधिक कर्मियों ने अपनी देशभक्ति दिखाने के लिए मार्च किया.
रूस में विजय दिवस परेड
इतिहास पर नजर डालें तो पूर्व में रूस ने भी देश की ताकत दिखाने के लिए अपनी सेना का भव्य प्रदर्शन किया है. 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की हार के उपलक्ष्य में रेड स्क्वायर पर सोवियत संघ द्वारा आयोजित विजय दिवस परेड को अब तक की सबसे बड़ी सैन्य परेड माना जाता है.
इतिहासकारों का कहना है कि इसमें लगभग 40,000 सैनिक और 1,800 बख्तरबंद वाहन शामिल थे. कहा जा रहा है कि यह परंपरा दशकों से जारी है और पुतिन ने रेड स्क्वायर पर अपने स्वयं के बड़े जुलूस निकाले हैं, जिनमें इस वर्ष मई में विजय दिवस की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित एक जुलूस भी शामिल है.
नॉर्थ कोरिया में किम जोंग उन की हथियारों वाली परेड
जिक्र देशों द्वारा अपने को शक्तिशाली दर्शाने का हुआ है इसलिए नॉर्थ कोरिया का जिक्र स्वतः ही होगा. उत्तर कोरियाई तानाशाह ने, अपने चीनी और रूसी समकक्षों की तरह, सैन्य प्रदर्शनों को अपने शासनकाल का अभिन्न अंग बना लिया है.
कई प्रदर्शन सितंबर में देश की स्थापना की वर्षगांठ पर हुए हैं, और इनमें किम की सेना द्वारा परमाणु मिसाइल लांचर का प्रदर्शन भी शामिल है.
वाशिंगटन की गक्फ वॉर विक्ट्री परेड
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश ने 1991 में खाड़ी युद्ध की समाप्ति के उपलक्ष्य में अमेरिकी राजधानी में लगभग 8,000 सैनिकों के साथ एक परेड का निरीक्षण किया. कहा जाता है कि कुवैत से इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन की सेना को खदेड़ने का जश्न मनाने के लिए लाखों लोग टैंकों का भी प्रदर्शन करने आए थे.
इस वर्ष जून में ही अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर सैन्य परेड हुई थी, जिसमें डोनाल्ड ट्रंप ने अपने 79वें जन्मदिन पर, संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर, लगभग 6,600 सैनिकों और 150 वाहनों के साथ वाशिंगटन डीसी की सड़कों पर परेड की थी.
पेरिस में बैस्टिल दिवस
बैस्टिल दिवस परेड - जो 1789 में फ्रांसीसी क्रांति की शुरुआत में बैस्टिल जेल पर हमले का प्रतीक है - यूरोप में सबसे बड़ी परेड होती है. ये परेड हर साल 14 जुलाई को पेरिस के चैंप्स-एलिसीज़ रोड पर होती है.
हिटलर द्वारा नाज़ी जर्मनी में परेड
द्वितीय विश्व युद्ध से पहले और उसके दौरान एडॉल्फ हिटलर के शासनकाल में कई बड़े सैन्य आयोजन हुए.उनमें से एक सबसे बड़ा परेड तानाशाह के 49वें जन्मदिन यानी 20 अप्रैल 1938 पर हुआ था, जब उसने लगभग 10,000 सैनिकों को मध्य बर्लिन में इकट्ठा किया था. यह परेड उसके मूल ऑस्ट्रिया के जर्मन रीच में विलय के उपलक्ष्य में आयोजित की गई थी.