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Explained: चीन ने बना लिए 5वीं पीढ़ी के सैकड़ों स्टील्थ लड़ाकू विमान, भारत रह गया पीछे, भारतीय वायु सेना के सामने कितनी बड़ी चुनौती?

चीन का 'स्टील्थ एडवांटेज' भविष्य में भारत के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है. चीन हर साल सौ से ज्यादा पांचवी पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर जेट बना रहा है.

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Explained: चीन ने बना लिए 5वीं पीढ़ी के सैकड़ों स्टील्थ लड़ाकू विमान, भारत रह गया पीछे, भारतीय वायु सेना के सामने कितनी बड़ी चुनौती?

चीन के स्टेल्थ विमान फ्रंटलाइन सर्विस में हैं. (AI इमेज)

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  • चीन तेजी से बना रहा है पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान.
  • चीन ने अपने J-20 'माइटी ड्रैगन' भारतीय सीमा के पास तैनात किए हैं.
  • भारतीय वायुसेना के पास एक भी ऑपरेशनल स्टील्थ फाइटर नहीं.

5th Generation Stealth Fighter Jets: एक तरफ भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों की कमी की समस्या से जूझ रही है तो दूसरी तरफ चीन हर साल सैकड़ों की तादाद में  5वीं पीढ़ी के सैकड़ों स्टील्थ लड़ाकू विमान बना रहा है. भारत और चीन की वायुसेना के बीच इस समय क्षमता का एक बड़ा अंतर आ चुका है. चीन की सेना पर नजर रखने वाले अनुभवी जानकार एंड्रियास रूप्रेक्ट ने अमेरिकी डिफेंस जर्नल 'द वॉर जोन' में लिखा है कि चीन के पास इस समय लगभग 500 ऑपरेशनल J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर जेट मौजूद हैं. ये जेट पहले से ही फ्रंटलाइन सर्विस में हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास भी तैनात हैं. भारत के लिए स्थिति चिंताजनक है. वायुसेना के लिए ये चुनौती कितनी बड़ी है, आइये जानते हैं. 

क्या भारत के पास हैं स्टेल्थ फाइटर जेट?

नहीं...आज की तारीख में भारतीय वायुसेना के पास ऑपरेशनल स्टील्थ फाइटर की संख्या बिल्कुल शून्य है. अगले कुछ सालों में भी भारत को 5वीं पीढ़ी के सैकड़ों स्टील्थ लड़ाकू विमान मिलने की उम्मीद कम ही है. दूसरी तरफ, चीन J-20 स्टेल्थ फाइटर जेट का प्रोडक्शन इतने बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है कि वह अमेरिका से भी आगे निकल गया है. चीन की ये हवाई ताकत भविष्य के किसी भी संघर्ष में एक निर्णायक कारक बन सकती है. चीन न सिर्फ तेजी से J-20 'माइटी ड्रैगन' स्टील्थ फाइटर का उत्पादन बढ़ा रहा है बल्कि, इसे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास तिब्बत और झिंजियांग में तैनात भी कर रहा है. 

आधुनिक लड़ाई में स्टेल्थ विमानों का महत्व

आधुनिक युद्ध में स्टील्थ विमान गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं. स्टील्थ विमानों को पारंपरिक राडार आसानी से नहीं पकड़ पाते. इसका मतलब है कि चीनी J-20 विमान भारतीय राडार और सुखोई या राफेल जैसे विमानों की नजर में आने से बहुत पहले ही उन्हें देख सकते हैं और उन पर लंबी दूरी की मिसाइलों से हमला कर सकते हैं. चीन के स्टील्थ विमान भारत की हवाई रक्षा प्रणालियों को भेद भी भी सकते हैं. इससे भारतीय हवाई क्षेत्र में अंदर तक घुसकर हमला करने की ताकत मिलती है. 

भारतीय वायुसेना बनाम चीन की वायुसेना

चीन लगातार  J-20 की संख्या बढ़ा रहा है. वह J-31 नाम का एक और नया स्टील्थ फाइटर भी विकसित कर रहा है जिसे वह अपने विमान वाहक पोतों पर तैनात करेगा.  चीन की उत्पादन क्षमता इतनी तेज है कि वह हर साल दर्जनों नए स्टील्थ विमान अपने बेड़े में शामिल कर रहा है. भारतीय वायु सेना की बात करें तो यह स्वीकृत लड़ाकू स्क्वाड्रन की संख्या (42 स्क्वाड्रन) से काफी कम (29 स्क्वाड्रन) पर काम कर रही है. इसमें भी 10 से ज्यादा स्क्वाड्रन पुराने मिराज, मिग-29 और जगुआर विमानों के हैं. हालांकि, भारत के पास सुखोई 30 एमकेआई और राफेल जैसे बेहतरीन लड़ाकू विमान हैं लेकिन, इनकी संख्या कम है. भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान से लगती सीमा पर भी तैनाती बनाए रखने पड़ती है. इसलिए चुनौती और भी ज्यादा मुश्किल हो जाती है. 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

रिटायर्ड एयर मार्शल आरजीके कपूर कहते हैं, "चीन लंबे समय से अपनी हवाई ताकत बढ़ाने पर काम कर रहा है. चीन के पास आज हर साल 150 नए लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता है. साल 2035 तक चीन के पास पांचवी और छठी पीढ़ी के 1500 के करीब लड़ाकू विमान होंगे. चीन की ये ताकत भारत के लिए गंभीर चिंता की बात है. चीन के ट्विन सीटर जे-20 एयरक्राफ्ट मैन-अनमैंड टीमिंग भी कर सकते हैं. इस तरह अगर देखा जाए तो साल 2030 तक चीन के पास 500 से 1000 तक स्टील्थ लड़ाकू विमान होंगे.  साथ ही, हजारों अनमैंड एयरक्राफ्ट भी होंगे जो हमारे लिए खतरे की घंटी है." 

रिटायर्ड एयर मार्शल एसपी धरकर भी चीन की बढ़ती हवाई ताकत पर चिंता जताते हैं. लेकिन वह कहते हैं, चीन के पास बड़ी संख्या में स्टील्थ जेट होना एक वास्तविक खतरा है. लेकिन हमें ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि चीन सीमा की भौगोलिक स्थिति हमारे पक्ष में है. हमें इस मामले पर गंभीरत से काम करना चाहिए और अपने पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोग्राम को तेज करना चाहिए." 

भारत के पास क्या विकल्प है?

भारत अपने खुद के 5वीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान AMCA पर काम कर रहा है. सरकार ने इसके विकास के लिए बजट को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसकी पहली उड़ान और भारतीय वायु सेना में इसके शामिल होने में अभी कई साल का समय है. तब तक चीन के पास 5वीं पीढ़ी के विमानों का एक बहुत बड़ा और अनुभवी बेड़ा तैयार हो चुका होगा. भारत के पास अमेरिकी F-35 लाइटनिंग II या रूस का सुखोई-57 खरीदने का भी विकल्प है. 

रिटायर्ड एयर मार्शल आरजीके कपूर कहते हैं कि स्टील्थ पूरी तरह से अदृश्य विमान नहीं होता. इसे भी हराया जा सकता है. लेकिन हमें अपने काउंटर मेजर तेज करने होंगे. एक नेटवर्क केंद्रित एयर डिफेंस सिस्टम बनाना होगा और उसे मजबूत करना होगा. 

भारत अभी क्या कर रहा है?

भारतीय वायुसेना इस खतरे को बहुत पहले ही भांप चुकी है. इंडियन एयर फ़ोर्स (IAF) ने रूस में बना नेबो-UM वेरी हाई फ्रीक्वेंसी रडार शामिल किया है जिसे लंबी दूरी तक कई तरह के हवाई खतरों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है. इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकने वाले व्हील वाले चेसिस पर लगाया गया है. इस रडार को तेजी से तैनात करने के लिए डिजाइन किया गया है और इसका मकसद एक इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क के हिस्से के तौर पर काम करना है.  Nebo-UM एक मोबाइल थ्री-डायमेंशनल सर्विलांस रडार है जिसके बारे में माना जाता है कि यह स्टील्थ विमानों को भी ट्रैक कर सकता है. Nebo-UM रडार को बनाने वाली रूसी कंपनी अल्माज-एंटे के डायरेक्टर जनरल यान नोविकोव भी ये कह चुके हैं कि यह एडवांस्ड स्टील्थ एयरक्राफ्ट का पता लगाने में सक्षम है.

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