डीएनए एक्सप्लेनर
ब्रिक्स देशों में दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी रहती है. इन देशों की जीडीपी दुनिया की करीब 40 फीसदी है और कारोबार 26 फीसदी है. 2009 में पहली BRIC समिट रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई. 2011 में चीन के सान्या शहर में हुई बैठक में साउथ अफ्रीका पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ था.
BRICS.... ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका का एक संगठन. बाद में छह और देश BRICS में शामिल हुए, जिसके बाद इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 11 पहुंच गई और 10 पार्टनर देश हो गए. यह संगठन वैश्विक मुद्दों पर अपना दायरा बढ़ाता जा रहा है. इनमें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, जलवायु परिवर्तन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कृषि और कारोबार शामिल हैं. ऐसा नहीं है कि इसमें शामिल सभी देश आपस में दोस्त हैं. इनमें कई सदस्य देशों के बीच गहरे विवाद और मतभेद भी हैं, जोकि अकसर सामने आते रहे हैं. आइए इन पर विस्तार से बात करते हैं-
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद ब्रिक्स का सबसे पुराना और सबसे बड़ा द्विपक्षीय मुद्दा है. लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC को लेकर दोनों देशों के बीच दशकों पुराना विवाद है. 2020 में गलवान झड़प में दोनों देशों के कई सैनिक मारे गए थे, जिसके बाद भारत की ओर से चीन पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे, जिनमें मोबाइल ऐप बैन, निवेश पर नियंत्रण जैसी कार्रवाई शामिल थीं. हालांकि अब दोनों के बीच सीमा विवाद पर बातचीत चल रही है. भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी इस बातचीत को लीड कर रहे हैं. अब सीमा पर हालात सुधर रहे हैं.
इसके अलावा भारत और चीन दोनों ही ग्लोबल साउथ में नेतृत्व के लिए प्रतिस्पर्धा भी करते हैं. चीन ब्रिक्स को पश्चिम विरोधी मंच बनाना चाहता है, जबकि भारत का ऐसा कोई एजेंडा नहीं है. भारत अमेरिका और पश्चिमी देशों का भी सहयोग चाहता है और ब्रिक्स का भी. हाल ही में भारत ने यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन के साथ फ्री ट्रेड डील भी साइन की है और अमेरिका के साथ उसकी बातचीत चल रही है.
ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात तीनों ही देश 2024 में ब्रिक्स में शामिल हुए. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसके बाद ईरान की ओर से सऊदी अरब-यूएई में स्थित अमेरिकी बेसों पर मिसाइलों-ड्रोन से हमला किया गया. ईरान का कहना है कि ब्रिक्स को अमेरिकी हमलों की निंदा करनी चाहिए, जबकि यूएई-सऊदी चाहते हैं कि ईरान के हमलों की निंदा की जाए. इसी साल मई में जब ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में हुई थी तो इसी विवाद की वजह से साझा बयान भी जारी नहीं हो पाया था.
ईरान का आरोप है कि यूएई ने अमेरिका-इजरायल को उसके एयरबेस, एयरस्पेस और खुफिया जानकारी दी. वहीं यूएई ने ईरान के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया. इतना ही नहीं यूएई ने ईरान के साथ अपना कारोबार भी पूरी तरह बंद कर दिया है.
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच क्षेत्रीय नेतृत्व, तेल कारोबार और भू-राजनीतिक हितों को लेकर गंभीर तनातनी और खींचतान चल रही है. ओपेक में तेल उत्पादन नीतियों को लेकर दोनों खाड़ी देशों के बीच असहमतियां उभरकर सामने आई हैं. हाल के दिनों में सऊदी और पाकिस्तान के रिश्ते मजबूत हुए हैं, जिसकी वजह से यूएई के इस्लामाबाद से रिश्तों में कड़वाहट देखने को मिली है.
अफ्रीकी देश मिस्र और इथियोपिया के बीच नील नदी को लेकर विवाद है. दरअसल इथियोपिया ने नील नदी पर करीब पांच अरब डॉलर की लागत से ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम (GERD) बनाया है. सितंबर 2025 में इसका उद्घाटन किया गया है. मिस्र को मीठे पानी की जरूरत का 90 फीसदी हिस्सा इसी नदी से मिलता है. ऐसे में मिस्र को डर है बांध बनने से उसको होने वाली पानी की आपूर्ति कम हो जाएगी. दोनों देशों के बीच ये विवाद काफी समय से चला आ रहा है और कभी-कभी सैन्य तनाव तक पहुंच गया था.
इसके अलावा इथियोपिया ने कुछ दिन पहले ही आरोप लगाया है कि कि मिस्र उसे लाल सागर तक पहुंचने से रोकना चाहता है. इथियोपिया पहले से ही लैंडलॉक्ड देश है अब वह शांतिपूर्ण तरीके से समुद्री पहुंच चाहता है, लेकिन उसका कहना है कि मिस्र इसमें बाधा डाल रहा है. मिस्र का मानना है कि लाल सागर की सुरक्षा और व्यवस्था का अधिकार केवल उन देशों को है जो इस समुद्र की सीमा से जुड़े हुए हैं.
ब्रिक्स समिट में शामिल भारत, ब्राजील और साउथ अफ्रीका संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता चाहते हैं, लेकिन नए अफ्रीकी देश मिस्र और इथियोपिया नहीं चाहते कि साउथ अफ्रीका को UNSC में स्थायी सदस्यता मिले. उनका मानना है कि इससे मिस्र, नाइजीरिया और इथियोपिया जैसे अन्य दावेदार पीछे रह जाएंगे.
रूस और यूक्रेन के बीच 4 साल से चले आ रहे युद्ध को लेकर भी ब्रिक्स देशों का अलग-अलग रुख है. कुछ देश खुलेआम रूस का साथ दे रहे हैं, जबकि कुछ तटस्थ हैं. चीन और ईरान खुलकर रूस के साथ आए हैं, जबकि भारत, सऊदी अरब, इथियोपिया, यूएई, ब्राजील, साउथ अफ्रीका ने तटस्थ रुख अपनाया है.
साल 2006 में BRIC यानी ब्राजील, रूस, भारत और चीन के विदेश मंत्रियों की न्यूयॉर्क में पहली बैठक हुई. 2009 में पहली BRIC समिट रूस के येकातेरिनबर्ग में हुई. 2010 में न्यूयॉर्क में हुई विदेश मंत्रियों की बैठक में पहली बार साउथ अफ्रीका शामिल हुआ. 2011 में चीन के सान्या शहर में हुई ब्रिक्स समिट की बैठक में साउथ अफ्रीका पहली बार पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल हुआ था, जिसके बाद इसका नाम BRICS हो गया.
इसके बाद 2024 में इसमें 5 नए सदस्य जुड़े. इनके नाम हैं- मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE). 2025 में इसमें इंडोनेशिया शामिल हुआ, जबकि 10 नए पार्टनर देश भी जुड़े. जिनके नाम हैं- बेलारूस, बोल्विया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम.
ब्रिक्स देशों में दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी रहती है. इन देशों की जीडीपी दुनिया की करीब 40 फीसदी है और कारोबार 26 फीसदी है.
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