डीएनए एक्सप्लेनर
Bihar Assembly Election 2025: बिहार में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. सत्ताधारी NDA में यह स्पष्ट हो चुका है कि चुनाव एक बार फिर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को ही सीएम चेहरा बनाकर लड़ा जाएगा. इसके बावजूद चिराग पासवान (Chirag Paswan) लगातार बेचैन दिखे हैं. इसके खास मायने लगाए जा रहे हैं.
Bihar Assembly Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव का अघोषित बिगुल बज चुका है. हर पार्टी ने अपने समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं. एकतरफ भाजपा नेतृत्व वाला NDA है तो दूसरी तरफ RJD की अगुआई वाला महागठबंधन ताल ठोक रहा है. एकतरफ ये दोनों ही गठबंधन एक-दूसरे के साथियों को तोड़ने की कोशिश में जुटे हुए हैं, वहीं इन गठबंधनों के अंदर भी विधानसभा चुनाव में अपने लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने की मशक्कत शुरू हो गई है. इसके लिए 'प्रेशर पॉलीटिक्स' का खेला भी खूब खेला जा रहा है. महागठबंधन में भी सीटों को लेकर लालू प्रसाद यादव की राजद (RJD), कांग्रेस और अन्य छोटे दलों में बातचीत जारी है, लेकिन NDA में यह कशमकश जमकर सतह पर दिख रही है. खासतौर पर चुनाव करीब आते ही 'राजनीतिक मौसम विज्ञानी' रामविलास पासवान (Ramvilas Paswan) के बेटे चिराग पासवान (Chirag Paswan) बेचैन दिखाई देने लगे हैं. चिराग पासवान लगातार बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में अपनी अहमियत का अहसास भाजपा (BJP) हाईकमान को दिलाने की कोशिश कर रहे हैं. माना जा रहा है कि उनकी तरफ से यह कवायद अपनी पार्टी LJP (R) को चुनाव लड़ने के लिए ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलाने के लिए की जा रही है. उनकी इस कवायद के बड़े मायने लगाए जा रहे हैं.
चलिए आपको 5 पॉइंट्स में समझाते हैं कि चिराग पासवान की इस पूरी कवायद का मकसद क्या है-
1. चिराग की तरफ से उठाए जा रहे हैं ये कदम
चिराग पासवान ने अपनी पार्टी लोक जनशक्ति (रामविलास) के लिए NDA के अंदर 45 सीटें मांगी हैं. उन्होंने साथ ही केंद्र के बजाय बिहार की राजनीति में वापस लौटने का इशारा भी किया है. उन्होंने सोमवार (2 जून) को ही मीडिया से कहा था कि वे लंबे समय तक केंद्रीय राजनीति में रहने के बजाय बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट के विजन को आगे बढ़ाना चाहता हूं. राष्ट्रीय नेता के चुनाव लड़ने से NDA को बिहार में मदद मिलेगी तो मैं चुनाव लड़ूंगा. चिराग की पार्टी की तरफ से यह भी इशारा किया गया है कि चिराग पासवान खुद भी विधानसभा चुनाव में उतर सकते हैं. इतना ही नहीं उनके अपने पिता की परंपरागत हाजीपुर विधानसभा सीट (आरक्षित) या जमुई सीट को छोड़कर नवादा सीट से उतरने का इशारा किया गया है, जो सामान्य कैटेगरी की सीट है. इसके जरिये चिराग खुद को महज पासवान समुदाय का नहीं बल्कि सर्वसाधारण का नेता साबित करने की जुगत भिड़ा रहे हैं. चिराग के जीजा और LJP सांसद अरुण भारती ने भी कहा है कि चिराग समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधि हैं. इसलिए वे आरक्षित नहीं नवादा की सामान्य सीट से चुनाव लड़ेंगे. नवादा सीट पर 70,000 भूमिहार, 55,000 यादव, 50,000 दलित और 30,000 कुशवाहा व मुस्लिम वोटर हैं. यदि यहां चिराग जीतते हैं तो उनकी इमेज सर्वसाधारण के नेता की बन जाएगी.
2. कितना वाजिब है चिराग का 45 सीट मांगना
अब चिराग की तरफ से 45 सीट पर उम्मीदवार उतारने की मांग को देखते हैं. विधानसभा चुनाव 2020 में चिराग की पार्टी NDA से अलग हो गई थी. साल 2020 में चिराग अपनी पार्टी के लिए 30 सीट नहीं मिलने पर NDA से बाहर निकले थे. उन्होंने 137 सीट पर उम्मीदवार उतारे थे. हालांकि उन्हें जीत 1 ही सीट पर मिली थी, लेकिन कम से कम 40 सीट पर सीधे-सीधे NDA उम्मीदवार को नुकसान पहुंचाया था. करीब 73 सीट पर उनकी पार्टी के उम्मीदवार को पहले-दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवारों की जीत-हार के अंतर से ज्यादा वोट मिला था. खासतौर पर नीतीश कुमार की जेडीयू को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा था, जिसे 33 सीट पर सीधा नुकसना LJP के कारण हुआ था. इनमें से 28 सीट पर जेडीयू दूसरे नंबर पर थी, जबकि 5 पर एलजेपी दूसरे नंबर पर आ गई थी. इसके चलते साल 2015 में 71 सीट जीतने वाली जेडीयू 2020 में 115 सीट पर लड़कर भी 43 सीट ही जीत सकी थी. भाजपा को 110 सीट पर लड़कर 71 सीट मिली थी, जबकि HAM ने 7 में से 4 सीट जीती थीं. इस बार महागठबंधन के साथ मौजूद VIP ने 11 में से 4 सीट जीती थीं. चिराग पासवान की पार्टी ने 6% वोट हासिल किए थे, जो बड़ा शेयर है. इन आंकड़ों की याद दिलाकर ही चिराग पासवान अपनी पार्टी के लिए 45 सीट मांग रहे हैं, जिसकी राह में असली रोड़ा नीतीश कुमार ही हैं. यदि चिराग को 45 सीट मिलती हैं तो भाजपा नीतीश के कोटे से सीट कम करेगी, जो उन्हें मंजूर नहीं होगा. हालांकि चिराग ने 33 सीट पर भी सहमत हो जाने का इशारा किया है.
3. क्या मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं चिराग?
चिराग पासवान ने खुद मीडिया के सामने बिहार का नेतृत्व करने की इच्छा जताई है यानी वे मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं. हालांकि वे इसे लेकर फिलहाल कोई ऐसा बयान नहीं देना चाहते हैं, जिससे विवाद पैदा हो जाए. इसके बावजूद इशारों-इशारों में वे यह इच्छा जता चुके हैं. उनके साफ-साफ नहीं कहने के पीछे भाजपा और खासतौर पर अमित शाह (Amit Shah) का वह बयान भी है, जिसमें नीतीश कुमार को ही बिहार में NDA का चेहरा बताया जा चुका है. फिलहाल चिराग भाजपा का साथ छोड़ने की स्थिति में नहीं हैं. इसलिए उन्होंने यह कहा भी है कि नीतीश कुमार ही बिहार में उनके भी नेता होंगे यानी उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री पद की होड़ से बाहर रखा है, लेकिन उनकी पार्टी के नेता उन्हें इस पद के लिए प्रोजेक्ट कर रहे हैं. इसे दोहरी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है.
4. सीएम पद मांगो और डिप्टी सीएम पर सहमति बनाओ
बिहार की राजनीति को करीब से जानने वाले एक सीनियर जर्नलिस्ट के मुताबिक, चिराग पासवान बार-बार मुख्यमंत्री पद का जिक्र करके दरअसल 'प्रेशर पॉलीटिक्स' खेल रहे हैं. इसी प्रेशर पॉलीटिक्स के तहत उन्होंने बिहार में विधानसभा चुनाव में खुद कैंडीडेट के तौर पर उतरने की भी बात कही है. इसके जरिये दरअसल उनका मकसद मुख्यमंत्री की कुर्सी पाना नहीं है बल्कि चुनावी गंगा में अपनी नाव किनारे लगाकर सीएम पद के नाम पर मोलभाव करते हुए डिप्टी सीएम पद पर सहमति बनाने की जुगत भिड़ाई जा रही है. नीतीश कुमार की सेहत बहुत अच्छी नहीं है. ऐसे में चिराग इस कोशिश में हैं कि यदि वे डिप्टी सीएम बनने में भी सफल हो पाए तो नीतीश के साथ किसी तरह की परेशानी होने पर वे ही सीएम पद के दावेदार के तौर पर सबसे आगे खड़े होंगे. साथ ही वे यह भी मानते हैं कि डिप्टी सीएम का पद भी मिला तो उन्हें बिहार में अपनी पार्टी का जनाधार बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी.
5. नीतीश ही हैं चिराग की राह की बाधा
चिराग पासवान शतरंज की बिसात पर किस तरह की चाल चल रहे हैं, इसका असल अंदाजा तो वे ही लगा सकते हैं. लेकिन इतना तय है कि उनकी कवायद तब तक परवान नहीं चढ़ सकती है, जब तक कि नीतीश कुमार उसे हरी झंडी नहीं दिखा देते हैं. दरअसल चिराग जितनी सीटें मांग रहे हैं, उन्हें देने के लिए भाजपा को नीतीश की पार्टी जेडीयू की सीटें काटनी पड़ेंगी. नीतीश कुमार को इस परिस्थिति के लिए तैयार करना ही असली काम होगा, जो पिछले विधानसभा चुनाव में भी चिराग के साथ सीटें बांटने को तैयार नहीं हुए थे. इसके साथ ही नीतीश भी अपनी पार्टी का वोट बैंक महादलित समुदायों को मानते हैं. ऐसे में वे चिराग की पार्टी को ज्यादा मजबूत बनाने के लिए तैयार होंगे या नहीं, यह भी एक सवाल रहेगा.
अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए हमारे गूगल, फेसबुक, x, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से जुड़ें.