डीएनए एक्सप्लेनर
Bengaluru Stampede: बेंगलुरु में बुधवार शाम को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) के 18 साल बाद IPL Trophy जीतने का जश्न रखा गया था. इस दौरान लाखों फैंस Chinnaswamy Stadium पहुंच गए, जहां भगदड़ मचने से देर रात तक 11 लोगों की मौत हो चुकी थी और दर्जनों घायल हैं.
Bengaluru Stampede: बेंगलुरु में बुधवार देर शाम को चिन्नास्वामी स्टेडियम (Chinnaswamy Stadium) के बाहर जो हुआ, वो देश में किसी जीत के जश्न के जानलेवा होने का पहला उदाहरण नहीं है. पहले भी इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. बस कमी है तो ये कि हम हादसों से सबक नहीं लेते. कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने भी पहले हो चुके हादसों से सबक नहीं लिया, जिसका नतीजा रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) की 18 साल बाद IPL Trophy जीत के जश्न के लिए पहुंचे फैंस में मची भगदड़ के तौर पर सामने आया है. इस हादसे में 11 लोगों की मौत की पुष्टि देर रात तक हो चुकी थी, जबकि करीब 47 लोग गंभीर रूप से घायल हैं और उनका अस्पतालों में इलाज चल रहा है. अब इस हादसे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति शुरू हो गई है. कर्नाटक सरकार आयोजन की जिम्मेदारी से पीछे हट रही है, जबकि उसके डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार (DK Shivkumar) हादसे के समय RCB के प्लेयर्स के साथ स्टेडियम के ही अंदर IPL CUP हाथ में उठाकर घूम रहे थे. सरकार कह रही है कि आयोजन कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (Karnataka Cricket Association) ने कराया था, लेकिन KCA कह रही है कि स्टेडियम के बाहर की व्यवस्था बनाने की जिम्मेदारी कर्नाटक पुलिस (Karnataka Police) यानी राज्य सरकार की थी. खैर इन आरोप-प्रत्यारोप से मरने वाले वापस नहीं आएंगे. हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन इस तरह की जांच की रिपोर्ट हमारे देश में कितने दिन बाद और किस तरह की आती है, ये भी जगजाहिर है.
चलिए उन 5 कारणों को समझने की कोशिश करते हैं, जिनसे यह हादसा हुआ है-
1. अचानक प्रोग्राम में बदलाव, छोटा सा स्टेडियम और लाखों फैंस की भीड़
कर्नाटक भी उन्हीं दक्षिण भारतीय राज्यों में से एक है, जहां क्रिकेट से लेकर फिल्मों तक के लिए फैंस में गजब दीवानगी देखी जाती है. यह दीवानगी मंगलवार रात में IPL 2025 Final खत्म होने के तत्काल बाद ही पूरे कर्नाटक में शुरू हो गई थी, क्योंकि उनकी राजधानी के नाम वाली टीम 18 साल की कोशिश के बाद पहली बार चैंपियन बनी थी. पूरी रात सड़कों पर जश्न चले. इसके बाद सुबह RCB Victory Prade की घोषणा हुई तो यह तय था कि फैंस की भीड़ रिकॉर्डतोड़ होगी. इसके बावजूद व्यवस्थाएं बनाने की कोशिश नहीं की गई. फिर अचानक विक्ट्री परेड कैंसिल करके चिन्नास्वामी स्टेडियम में जश्न मनाए जाने का ऐलान कर दिया गया. इससे जो भीड़ पूरे शहर में विक्ट्री परेड के रूट पर फैली हुई थी, उसका रुख सीधे चिन्नास्वामी स्टेडियम की तरफ हो गया. चिन्नास्वामी स्टेडियम की क्षमता महज 35 हजार दर्शकों की है, जबकि खुद बेंगलुरु प्रशासन ने माना है कि स्टेडियम के बाहर हादसे के समय कम से कम 3 लाख लोग मौजूद थे. इतनी बड़ी संख्या में लोगों को एकजगह पहुंचने देना ही प्रशासनिक विफलता थी, जो भगदड़ और फिर हादसे का कारण बन गई.
2. स्टेडियम के छोटे गेट में घुसने की जद्दोजहद
चिन्नास्वामी स्टेडियम में जीत के जश्न के लिए एंट्री फ्री रखी गई थी. इसके चलते हर क्रिकेट प्रेमी इसमें शामिल होना चाहता था. यहां तक कि लोग स्टेडियम की दीवारों से सटे पेड़ों तक पर चढ़ गए थे ताकि किसी तरह वहां से अंदर कूद सकें. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्टेडियम के बाहर 3 लाख लोगों की भीड़ थी. इस कारण जब स्टेडियम के एंट्री गेट खुले तो वे इतनी भीड़ के सामने छोटे साबित हो गए. सभी गेट पर हर दिशा से लोग अंदर घुसने के लिए दौड़ पड़े. हर कोई किसी भी तरह गेट के अंदर घुसना चाहता था. इसके चलते लोग एक-दूसरे के ऊपर से घुसने की कोशिश कर रहे थे. इसी दौरान किसी बात पर मची भगदड़ में यही लोग एक-दूसरे को कुचलते हुए चले गए. लोगों ने बैरिकेडिंग भी तोड़ दी. जो लोग बैरिकेडिंग के आगे पहुंच चुके थे, वे भीड़ के दबाव में उसके नीचे कुचलते चले गए.
3. स्टेडियम के बाहर नाले के स्लैब का टूटना
बताया जा रहा है कि चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर नाले के ऊपर बिछे स्लैब के ऊपर हजारों लोग पहुंच गए. स्लैब इतने लोगों का वजन नहीं सह सका और टूट गया. इससे ही अचानक अफवाह उड़ी और लोग डर के मारे दौड़ने लगे. इस अफरा-तफरी के कारण ही भगदड़ मची और लोगों ने जान बचाने की जद्दोजहद में एक-दूसके को कुचल दिया.
4. हल्की बारिश भी बनी अफरा-तफरी का कारण
चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर जब लाखों लोग अंदर जाने की जुगत भिड़ाने में जुटे थे. इसी दौरान बताया जा रहा है कि हल्की बारिश भी शुरू हो गई. बारिश से बचने के लिए ही लोग नाले के स्लैब के ऊपर चढ़े ताकि दीवार की ओट में पानी से बच सकें. इससे ही स्लैब टूटा और अफरा-तफरी मची, जो भगदड़ में बदल गई.
5. लाखों लोगों को संभालने के लिए मुट्ठीभर पुलिस
क्रिकेट प्रेमियों का जश्न पूरी रात से चल रहा था. बेंगलुरु के क्रिकेट और मूवी फैंस का जोश हर कोई जानता है. विक्ट्री परेड की घोषणा सुबह ही हो गई थी. इसके बावजूद कर्नाटक पुलिस ने पर्याप्त सुरक्षाबलों का प्रबंधन नहीं किया. कर्नाटक सरकार की तरफ से भी इस बारे में कोई कदम उठाने की कोशिश नहीं की गई. खुद डिप्टी सीएम DK Shivkumar की मानें तो स्टेडियम के बाहर 5,000 पुलिसकर्मी लगाए गए थे, लेकिन लाखों लोगों को संभालने के लिए क्या यह मुट्ठीभर पुलिस नहीं थी? स्टेडियम के बाहर लाखों लोग कुछ पलों में तो जमा नहीं हुए थे? सवाल ये उठता है कि लोगों की बढ़ती भीड़ और उनका जोश देखकर भी स्टेडियम के बाहर और ज्यादा अतिरिक्त पुलिस बल उसी समय क्यों नहीं बुलाया गया? स्टेडियम में जश्न होने की घोषणा दोपहर में ही हो गई थी. ऐसे में पर्याप्त समय था कि स्टेडियम के बाहर भीड़ का प्रबंध करने के लिए और उन्हें लाइनों में चलाने के लिए पोलिंग बूथ सरीखी बैरिकेडिंग की जाती, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान ही नहीं दिया. इसके चलते ही स्टेडियम के हर गेट पर हजारों की भीड़ एकसाथ अंदर घुसने की कोशिश कर रही थी. आखिर में यही हादसे का कारण बन गया.
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