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Syria में विद्रोहियों से सीधा संपर्क साध, कुछ बड़ा करने की फिराक में तो नहीं है Russia?

रूस के उप विदेश मंत्री मिखाइल बोगदानोव ने कहा कि हयात तहरीर अल शाम के साथ रूस के सैन्य ठिकानों पर बातचीत ';रचनात्मक ढंग से आगे बढ़ रही है. वहीं अमेरिका का कहना है कि वह देश में हिरासत में लिए गए एक नागरिक को वापस लाने पर काम कर रहा है.

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Syria में विद्रोहियों से सीधा संपर्क साध, कुछ बड़ा करने की फिराक में तो नहीं है Russia?
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बशर अल असद के देश छोड़ने और विद्रोहियों द्वारा सत्ता पर कब्ज़ा करने के बाद, उम्मीद की जा रही थी कि, सीरिया के मद्देनजर चर्चाओं पर लगाम लगेगी. तो क्या ऐसा हुआ? जवाब दिलचस्प है. रूसी न्यूज़ एजेंसी इंटरफैक्स की बातों पर यकीन किया जाए तो रूस ने सीरिया के हयात तहरीर अल शाम (HTS) विद्रोही समूह के साथ 'सीधा संपर्क' स्थापित किया है.

इंटरफैक्स ने बताया है कि उप विदेश मंत्री मिखाइल बोगदानोव ने पत्रकारों से हुई बातचीत में इस बात को स्वीकार किया है कि रूस, सीरिया के अंदर अपने सैन्य ठिकानों को बनाए रखने का लक्ष्य बना रहा है.

मामले में दिलचस्प ये कि रूस HTS के साथ संपर्क 'रचनात्मक तरीके से आगे बढ़ रहा है.' साथ ही मास्को ने इस बात की भी उम्मीद जताई है कि समूह सीरिया के भीतर व्यवस्था बनाए रखने और राजनयिकों और अन्य विदेशियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने वादों को पूरा करेगा.

उप विदेश मंत्री मिखाइल बोगदानोव के अनुसार, 'ठिकाने अभी भी वहीं हैं, जहां वे सीरियाई क्षेत्र में थे.' वहीं उन्होंने ये भी माना है कि फिलहाल कोई अन्य निर्णय नहीं लिया गया है। बोगदानोव ने इस बात पर भी बल दिया कि रूस इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों से लड़ने के उद्देश्य से सीरियाई लोगों के अनुरोध पर वहां गया था. 

बोगदानोव ने इस बात को भी कहा कि, 'मैं इस धारणा के आधार पर आगे बढ़ रहा हूं कि हर कोई इस बात पर सहमत है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई, और आईएस के बचे हुए हिस्से, खत्म नहीं हुए हैं.'

बता दें कि रूस के सीरिया के अंदर दो बेस टार्टस में एक नौसैनिक बेस और लताकिया के बंदरगाह शहर के पास खेमिमिम एयर बेस है. 

ज्ञात हो कि HTS - बशर अल असद के शासन के पतन के बाद उभरने वाला सबसे शक्तिशाली विद्रोही समूह - सीरिया में आधिकारिक अल कायदा सहयोगी के रूप में नुसरा फ्रंट के नाम से शुरू हुआ. सुन्नी इस्लामवादी उग्रवादी गुट को कई पश्चिमी ताकतें एक आतंकवादी संगठन के रूप में देखती हैं.

हालांकि, यूके सरकार ने हाल ही में कहा कि वह एचटीएस को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की अपनी सूची से हटा सकती है. सीरिया में जो कुछ भी चल रहा है यदि उन बातों के बीच अमेरिका के रवैये को देखा जाए तो अमेरिका सीरिया से अपने नागरिकों को घर वापस लाने पर काम कर रहा है. 

गौरतलब है कि यह बातें तब सामने आई हैं जब अमेरिका ने कहा कि वह बीते दिनों सीरिया में मिले एक अमेरिकी नागरिक ट्रैविस टिमरमैन को घर वापस लाने के लिए काम कर रहा है. अकाबा में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा है कि, 'हम उसे घर लाने, सीरिया से बाहर निकालने के लिए काम कर रहे हैं.

वहीं ब्लिंकन की तरफ से यह भी कहा गया है कि,'गोपनीयता कारणों से, मैं इस बारे में और अधिक जानकारी साझा नहीं कर सकता.'

ट्रैविस टिमरमैन ने कहा कि उसे 'मुक्तिदाताओं' द्वारा जेल से रिहा किया गया था. उसने एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उसकी रिहाई एक 'आशीर्वाद' थी. बेटे की इस रिहाई पर ट्रैविस की मां, स्टेसी कोलिन्स ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उसे विश्वास था कि उसका बेटा सात महीने पहले लापता होने के बाद मर चुका है.

29 वर्षीय टिमरमैन ने कहा कि वे ईसाई तीर्थयात्रा पर सीरिया गए थे और फिलिस्तीन शाखा में रहते हुए उनके साथ बुरा व्यवहार नहीं किया गया - यह सीरियाई खुफिया द्वारा संचालित एक कुख्यात हिरासत केंद्र है.

टिमरमैन ने कहा कि जून में पूर्वी लेबनान के शहर ज़हले के पास एक पहाड़ से सीरिया में प्रवेश करने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था. ब्लिंकन ने यह भी कहा कि ऑस्टिन टाइस - एक अन्य अमेरिकी नागरिक जिसे एक दशक से अधिक समय पहले सीरिया में अपहरण कर लिया गया था - का पता लगाने के प्रयास जारी हैं.

बताया जा रहा है कि टाइस, एक पूर्व अमेरिकी मरीन और एक स्वतंत्र पत्रकार थे. किसी ज़माने में सीरिया से किडनैप हुए टाइस के विषय में जो जानकारी आई है उसपर यदि यकीन किया जाए तो जब  टाइस अगस्त 2012 में जब 31 वर्ष के थे तब दमिश्क में उनका अपहरण कर लिया गया था.

बहरहाल राष्ट्रपति जोबाइडेन ने ये कहकर कि अमेरिकी सरकार का मानना ​​है कि टाइस अभी भी जीवित हैं, एक नई बहस को न केवल आंच दी बल्कि अमेरिका में विपक्ष को आरोप प्रत्यारोप और बयानबाजी का मौका दे दिया है.  सवाल हो रहा है कि जब टाइस ज़िंदा है तो फिर अमेरिका द्वारा उसे वापस लाने के प्रयत्न क्यों नहीं किये गए. 

बहरहाल विषय रूस का सीरिया के विद्रोही समूह एचटीएस और जोलानी से सीधा संपर्क साधना है, तो इतना जरूर है कि जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ेंगे हम ऐसा बहुत कुछ देखेंगे, सुनेंगे जो हमारी सोच और कल्पना से परे होगा.

ध्यान रहे ये वही रूस था जो कभी बशर के साथ था. यदि ये एचटीएस के साथ हो जाता है तो इतना तो तय है कि, ग्लोबल पॉलिटिक्स और मिडिल ईस्ट में प्रभुत्व स्थापित करने के लिहाज से परिणाम हैरान करने वाले होंगे.

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