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बुमराह, सिराज...चोटिल होते गेंदबाज और छोटा हो रहा टीम इंडिया का फास्ट बॉलिंग पूल

जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज अगर एक साथ चोटिल हो जाते हैं, तो टीम इंडिया के पास कोई भी मैच विनर तेज गेंदबाज नहीं बचेगा. टीम इंडिया का फास्ट बॉलिंग पूल छोटा होता जा रहा है.

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बुमराह, सिराज...चोटिल होते गेंदबाज और छोटा हो रहा टीम इंडिया का फास्ट बॉलिंग पूल

Jasprit Bumrah and Mohammed Siraj Workload

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2020-21 में भारतीय क्रिकेट टीम बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी खेलने ऑस्ट्रेलिया गई थी, तब पहले टेस्ट मैच में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और उमेश यादव मुख्य तेज गेंदबाज थे. चौथे टेस्ट मैच के आते-आते इनमें से कोई भी उपलब्ध नहीं था. सभी चोटिल हो चुके थे. चौथे टेस्ट में मोहम्मद सिराज, नवदीप सैनी और शार्दुल ठाकुर के साथ टी नटराजन टीम की पेस अटैक का हिस्सा थे. लंबे विदेशी दौरे के अंत में भारतीय टीम चोटिल खिलाड़ियों से जूझ रही थी और समस्या ये थी कि 11 खिलाड़ी कैसे पूरे हों. यही वजह थी कि टी नटराजन को भी टीम में जगह मिली जबकि वो केवल नेट बॉलर के रूप में वहां मौजूद थे. इसके बावजूद भारत न केवल यह मैच जीतने में सफल रहा, बल्कि सीरीज जीतने का ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया. नटराजन ने पहली पारी में तीन विकेट लेकर दिखाया कि वे कोई नौसिखिये नहीं हैं. लेकिन अब ऐसे हालात नहीं हैं. टीम के पास तेज गेंदबाजों की निहायत कमी है. फास्ट बॉलिंग पूल लगातार छोटा हो रहा है और नए गेंदबाज मिल नहीं रहे हैं.

अब जरा हाल में खत्म हुई एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज को याद कीजिए. ये पहले से तय था कि बुमराह पांच में से तीन टेस्ट खेलेंगे. चौथे टेस्ट से पहले आकाशदीप और अर्शदीप सिंह चोटिल हो गए तो अंशुल कंबोज को टीम में जगह मिली. पूरे मुकाबले के दौरान कंबोज की गेंदें बमुश्किल 130 किलोमीटर के रफ्तार तक पहुंच पाईं. उनकी गेंदबाजी में न तो स्विंग थी, न ही सीम मूवमेंट. ये बताता है कि भारतीय टीम के पास तेज गेंदबाजों का पूल कमजोर पड़ गया है. यदि बुमराह और सिराज एक साथ चोटिल हो जाएं तो टीम के लिए तीन या चार मैच जिताऊ तेज गेंदबाज ढूंढना मुश्किल हो सकता है. अभी इस पर ध्यान नहीं दिया तो हालात जल्द ही सौरव गांगुली की कप्तानी वाले दौर के जैसे हो जाएंगे जब जवागल श्रीनाथ के चोटिल होने पर दादा को खुद ही नई गेंद से गेंदबाजी करनी पड़ती थी.

बुमराह और सिराज पर वर्कलोड

बुमराह और सिराज के एक साथ चोटिल होने का डर फिजूल नहीं है. दोनों ही ओवरवर्क के शिकार हैं. एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज में भी सिराज इकलौते ऐसे गेंदबाज थे जो पांचवें टेस्ट की चौथी पारी में भी बॉलिंग कर रहे थे. 26 दिसंबर 2023 से अब तक सिराज ने भारतीय टीम के लिए सबसे ज्यादा 3144 गेंदें फेंकी हैं. 3080 गेंदों के साथ जसप्रीत बुमराह दूसरे नंबर पर हैं. तीसरे नंबर पर आकाशदीप ने 1536 गेंदें फेंकी हैं जो सिराज के मुकाबले करीब आधा है. चौथे नंबर पर मौजूद प्रसिद्ध कृष्णा ने एक हजार से कम और पांचवें पर नीतीश रेड्डी ने 500 से कम गेंदें फेंकी हैं. सूची में नीतीश रेड्डी का नाम चौंकाता है क्योंकि वो बैटिंग ऑलराउंडर हैं. ये यह भी बताता है कि टीम के पास फिलहाल तेज गेंदबाजी के 7-8 विकल्प ही हैं. इनमें वो भी शामिल हैं जो चोट या अन्य कारणों से फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं.

सीमित विकल्प

अंतरराष्ट्रीट क्रिकेट के लिए औसतन 135 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले तेज गेंदबाजों की जरूरत होती है. इस लिहाज से देखें तो बुमराह और सिराज के अलावा अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, आवेश खान, प्रसिद्ध कृष्णा और खलील अहमद का नाम ही सामने आता है. घरेलू क्रिकेट में हाल के दिनों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अन्य गेंदबाज स्पीड के मामले में मीडियम पेस हैं. यानी हालात विराट कोहली और रोहित शर्मा की कप्तानी वाले दिनों से एकदम अलग हैं जब टीम इंडिया की पेस बैटरी में 10-12 तेज गेंदबाजों का पूल होता था.

बूढ़ी हो रही पेस बैटरी

हालात कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इससे भी लगता है कि मोहम्मद शमी 34 तो बुमराह 32 साल के हो चुके हैं. सिराज 31 तो आकाशदीप 29 और प्रसिद्ध कृष्णा 28 साल के हैं. बुमराह लगातार चोटों का शिकार होते रहे हैं. शमी चोट के चलते एक साल से ज्यादा समय से मैदान से दूर हैं. आकाशदीप और प्रसिद्ध कृष्णा के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का खास अनुभव नहीं है. यानी टीम के पास फिलहाल मोहम्मद सिराज ही अकेला तेज गेंदबाज है जिस पर आंख बंद कर भरोसा किया जा सकता है. 

विदेशी दौरों पर मुश्किल

टीम मैनेजमेंट को इस मुश्किल का अंदाजा है. हर्षित राणा और अंशुल कंबोज को जल्दबाजी में भारतीय टीम में मौका देने की वजह भी यही है. राणा ने अपने पहले टेस्ट मैच से पहले बमुश्किल दस फर्स्ट क्लास मैच खेले थे. कंबोज को इंग्लैंड गई इंडिया ए टीम से सीधे टेस्ट मैच खिलाया गया. तेज गेंदबाजों की ये कमी विदेशी दौरों पर टीम के लिए मुश्किल बन सकती है. अच्छी बात यह है कि अगले करीब 15 महीने तक भारतीय टीम के सारे टेस्ट मैच एशिया में ही हैं. नवंबर, 2026 में टीम को न्यूजीलैंड दौरे पर जाना है. तब तक घरेलू क्रिकेट का एक सीजन और आईपीएल खत्म हो चुके होंगे. उम्मीद होगी कि इस दौरान 3-4 अच्छे तेज गेंदबाज मिलें जो आगे चलकर टीम की पेस अटैक को धार दे सकें.

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