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क्या आपकी छत सिर्फ पानी की टंकी और पुराने सामान रखने के काम आ रही है? अगर हां, तो शायद आप हर महीने होने वाली एक संभावित कमाई से चूक रहे हैं.
देशभर में 5G नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है और इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को नई जगहों की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में घर की छत या खाली प्लॉट अब सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि नियमित आय का स्रोत भी बन सकते हैं. हालांकि, इस मौके के साथ कुछ जरूरी सावधानियां भी जुड़ी हुई हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना महंगा पड़ सकता है.
क्यों बढ़ी है छत और खाली प्लॉट की मांग?
भारत में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑनलाइन पढ़ाई, वर्क फ्रॉम होम और एआई आधारित सेवाओं ने मोबाइल नेटवर्क पर दबाव बढ़ा दिया है. यही वजह है कि टेलीकॉम कंपनियां अपने नेटवर्क को मजबूत करने के लिए नई लोकेशन तलाश रही हैं.
ऐसे में जिन लोगों के पास अच्छी लोकेशन पर छत या खाली जमीन है, उनके लिए यह अतिरिक्त कमाई का अवसर बन सकता है. खास बात यह है कि इसमें रोजाना मेहनत करने की जरूरत नहीं होती और एक बार समझौता होने के बाद नियमित किराया मिलता रहता है.
मोबाइल टावर से हर महीने कितनी कमाई हो सकती है?
मोबाइल टावर से होने वाली आय आपकी लोकेशन पर निर्भर करती है. महानगरों में इसकी मांग सबसे ज्यादा होती है, इसलिए किराया भी अपेक्षाकृत अधिक मिलता है.
दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में प्रॉपर्टी मालिकों को 40 हजार से 80 हजार रुपये प्रतिमाह तक किराया मिल सकता है. वहीं लखनऊ, जयपुर और इंदौर जैसे टियर-2 शहरों में यह रकम 20 हजार से 50 हजार रुपये प्रति माह तक हो सकती है.
ग्रामीण इलाकों में भी यह अवसर मौजूद है. वहां आमतौर पर 8 हजार से 25 हजार रुपये मासिक तक किराया मिलने का अनुमान लगाया जाता है. इसके अलावा कंपनियां अक्सर लंबी अवधि का लीज एग्रीमेंट करती हैं, जिससे आय की स्थिरता बनी रहती है.
आवेदन की प्रक्रिया क्या है?
मोबाइल टावर लगवाने के लिए किसी एजेंट या बिचौलिए की जरूरत नहीं होती. टेलीकॉम कंपनियां और अधिकृत इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर सीधे आवेदन स्वीकार करते हैं.
इच्छुक व्यक्ति रिलायंस जियो, एयरटेल या इंडस टावर्स जैसी कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन कर सकता है. आवेदन के बाद तकनीकी टीम साइट का निरीक्षण करती है और यह जांचती है कि वहां नेटवर्क की जरूरत, भवन की ऊंचाई और बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं.
यदि स्थान उपयुक्त पाया जाता है तो कंपनी और प्रॉपर्टी मालिक के बीच समझौता किया जाता है. इसके बाद आवश्यक अनुमतियां पूरी होने पर इंस्टॉलेशन का काम शुरू होता है, जिसमें आमतौर पर 2 से 4 सप्ताह का समय लग सकता है.
किन दस्तावेजों की पड़ती है जरूरत?
मोबाइल टावर लगवाने के लिए प्रॉपर्टी से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार रखने होते हैं. इनमें मालिकाना हक का प्रमाण, बिजली बिल या टाइटल डीड शामिल हो सकते हैं.
इसके अलावा किसी मान्यता प्राप्त इंजीनियर द्वारा जारी स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है. कई मामलों में हाउसिंग सोसाइटी या आसपास के निवासियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी मांगा जा सकता है. यदि प्रॉपर्टी एयरपोर्ट के नजदीक है, तो सिविल एविएशन अथॉरिटी की अनुमति भी जरूरी हो सकती है.
क्या मोबाइल टावर का रेडिएशन नुकसान पहुंचाता है?
मोबाइल टावर लगने की बात आते ही सबसे पहले रेडिएशन को लेकर चिंता सामने आती है. हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों में अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि निर्धारित मानकों के भीतर काम करने वाले मोबाइल टावर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं.
भारत का दूरसंचार विभाग भी रेडिएशन को लेकर सख्त नियम लागू करता है. देश में लागू सीमा अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में काफी सख्त मानी जाती है. इसी वजह से रिहायशी इलाकों में भी नियमों का पालन करते हुए टावर स्थापित किए जाते हैं.
सबसे बड़ा खतरा: मोबाइल टावर के नाम पर ठगी
जहां एक तरफ यह कमाई का अवसर है, वहीं दूसरी तरफ धोखाधड़ी का जोखिम भी तेजी से बढ़ा है. कई लोग मोबाइल टावर लगवाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी मनी या टैक्स के बहाने पैसे मांगते हैं.
ध्यान रखने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि असली टेलीकॉम कंपनियां टावर लगाने के लिए प्रॉपर्टी मालिक से एडवांस पैसे नहीं मांगतीं. इसके अलावा TRAI और दूरसंचार विभाग व्यक्तिगत स्तर पर कोई NOC या अनुमति पत्र जारी नहीं करते.
किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले कंपनी की पहचान और वैधता की जांच करना बेहद जरूरी है. केवल आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत प्रतिनिधियों के जरिए ही प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए.
क्या यह मिडिल क्लास के लिए सही अवसर है?
बढ़ती महंगाई और अतिरिक्त आय की जरूरत के बीच यह विकल्प कई परिवारों के लिए आकर्षक हो सकता है. जिन लोगों के पास खाली छत या अनुपयोगी जमीन है, वे इसे आय पैदा करने वाली संपत्ति में बदल सकते हैं.
हालांकि अंतिम निर्णय लेने से पहले कानूनी दस्तावेज, लीज एग्रीमेंट और तकनीकी शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है. सही जानकारी और सावधानी के साथ यह एक लंबी अवधि की नियमित कमाई का जरिया बन सकता है.
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