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Should I buy silver now: चांदी में अचानक दबाव बढ़ा है और एमसीएक्स पर भाव ₹2.43 लाख प्रति किलो के आसपास आ गया है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सिल्वर 4.6 फीसदी टूटकर 64.19 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई. अब खरीदारों और निवेशकों की नजर सपोर्ट लेवल पर है.
जिस चांदी की कीमत कुछ दिन पहले लगातार तेजी के कारण चर्चा में थी, उसमें अब मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय दबाव साफ दिखाई देने लगा है. 10 सितंबर को एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 एक्सपायरी वाली सिल्वर करीब ₹2,43,574 प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी. इसका इंट्राडे हाई ₹2,44,300 रहा. इकोनॉमिक टाइम्स के एमसीएक्स आंकड़ों में इसी कॉन्ट्रैक्ट का भाव करीब ₹2,43,050 और दिन का निचला स्तर ₹2,42,408 दर्ज हुआ.
यानी बाजार अभी पूरी तरह टूटने वाली स्थिति में नहीं है, लेकिन ऊपर की तेजी पर दबाव जरूर बढ़ा है. यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि मौजूदा स्तर से चांदी में खरीदारी की जाए या कुछ और गिरावट का इंतजार किया जाए.
भारत में चांदी पर दबाव की बड़ी वजह सिर्फ घरेलू कारोबार नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब 4.6 फीसदी गिरकर 64.19 डॉलर प्रति औंस तक आ गई. उसी दिन सोने में भी एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी गई.
अमेरिका के अगस्त उत्पादक मूल्य सूचकांक यानी पीपीआई में 0.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बाजार में करीब 70 फीसदी तक पहुंच गई, जो पहले 62 फीसदी थी. ऊंची ब्याज दरों की आशंका आमतौर पर बिना ब्याज देने वाली धातुओं पर दबाव डालती है.
इसके साथ अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड में तेजी और डॉलर की मजबूती ने भी कीमती धातुओं का आकर्षण कम किया. तेल की कीमतों में करीब 4 फीसदी उछाल ने भी महंगाई को लेकर बाजार की चिंता बढ़ाई है.
अब चांदी खरीदने वालों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सिर्फ यह नहीं है कि भाव ₹2.43 लाख पर है. असली सवाल यह है कि अगला मजबूत सपोर्ट कहां है. 10 सितंबर के तकनीकी आंकड़ों में ₹2.42 लाख से ₹2.41 लाख के आसपास तत्काल सपोर्ट बताया गया है, जबकि उसके नीचे ₹2.37 लाख से ₹2.36 लाख का क्षेत्र अगला सपोर्ट बनता है. दूसरी तरफ ₹2.45 लाख से ₹2.46 लाख तत्काल रेजिस्टेंस है. इसके ऊपर निकलने पर ₹2.49 लाख से ₹2.50 लाख का क्षेत्र फिर चर्चा में आ सकता है.
इसका मतलब यह है कि ₹2.43 लाख पर खरीदारी करने वाले निवेशक को सपोर्ट और रेजिस्टेंस दोनों को ध्यान में रखना होगा. अगर चांदी लगातार ₹2.42 लाख के नीचे टिकती है और आगे ₹2.37 लाख के आसपास भी दबाव बना रहता है, तो जल्दबाजी में पूरी रकम लगाने का जोखिम बढ़ सकता है.
यहां जवाब हर निवेशक के लिए एक जैसा नहीं है. जिस व्यक्ति ने काफी नीचे चांदी खरीदी है और अच्छा मुनाफा बना चुका है, उसके लिए ऊंचे स्तरों पर कुछ मुनाफावसूली करना एक रणनीति हो सकती है. लेकिन सिर्फ एक-दो कारोबारी सत्र की गिरावट देखकर पूरी होल्डिंग बेच देना भी जरूरी नहीं है.
खासकर फिजिकल चांदी रखने वाले लोगों का नजरिया वायदा कारोबार करने वाले ट्रेडर से अलग होना चाहिए. फिजिकल चांदी में खरीद-बिक्री के बीच अंतर, जीएसटी, मेकिंग या अन्य कारोबारी लागत जैसे पहलू भी असर डालते हैं. इसलिए स्क्रीन पर दिख रहे एमसीएक्स भाव को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि आम ग्राहक को दुकान पर बिल्कुल वही कीमत मिलेगी.
अगर किसी को शादी, परिवारिक जरूरत या लंबे समय के लिए चांदी खरीदनी है, तो मौजूदा गिरावट को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करने की जरूरत नहीं है. लेकिन एकमुश्त खरीद के बजाय चरणबद्ध खरीद ज्यादा व्यावहारिक हो सकती है, खासकर तब जब बाजार महत्वपूर्ण सपोर्ट के आसपास हो.
दूसरी तरफ, अगर उद्देश्य केवल कुछ दिनों या हफ्तों में ट्रेडिंग मुनाफा कमाना है, तो जोखिम काफी ज्यादा है. चांदी सोने की तुलना में अधिक तेज उतार-चढ़ाव दिखा सकती है. 10 सितंबर की अंतरराष्ट्रीय गिरावट इसका ताजा उदाहरण है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसी दिन प्लैटिनम 5.5 फीसदी और पैलेडियम 5.1 फीसदी भी टूटे. ([Reuters][2])
देवकृष्ण पांडेय के नाम से 11 सितंबर 2026 के लिए चांदी पर ऐसी सत्यापित ताजा टिप्पणी उपलब्ध नहीं मिली है, जिसमें वह साफ तौर पर अभी खरीदने या बेचने की सलाह दे रहे हों. इसलिए उनके नाम से कोई अनुमानित बयान या नकली कोट डालना सही नहीं होगा.
फिलहाल उपलब्ध बाजार आंकड़ों से इतना जरूर कहा जा सकता है कि चांदी का शॉर्ट टर्म रुख सावधानी वाला है. ₹2.45 से ₹2.46 लाख के ऊपर मजबूती आने पर तेजी दोबारा मजबूत हो सकती है, जबकि ₹2.42 लाख के नीचे दबाव बढ़ने और फिर ₹2.37 से ₹2.36 लाख की तरफ जाने का जोखिम बढ़ेगा.
चांदी में मौजूदा गिरावट को सिर्फ डर की खबर की तरह देखने के बजाय इसे लेवल आधारित बाजार के रूप में समझना ज्यादा जरूरी है. ₹2.43 लाख के आसपास बाजार फिलहाल निर्णायक मोड़ पर है. ऊपर जाने के लिए ₹2.45 से ₹2.46 लाख का क्षेत्र पार करना जरूरी होगा, जबकि नीचे ₹2.42 लाख और फिर ₹2.37 लाख के आसपास के स्तर महत्वपूर्ण रहेंगे.
आम खरीदार के लिए सीधी बात यह है कि अगर खरीदारी जरूरी है तो पूरी रकम एक साथ लगाने के बजाय हिस्सों में खरीदारी करना जोखिम को कुछ हद तक कम कर सकता है. वहीं ट्रेडर को बिना स्टॉप लॉस के केवल तेजी की उम्मीद में पोजीशन लेने से बचना चाहिए.
बाजार की मौजूदा तस्वीर में चांदी न तो पूरी तरह बिकवाली का मामला दिखा रही है और न ही आंख बंद करके खरीदने का. अगले कुछ सत्रों में अमेरिकी महंगाई, फेड की ब्याज दर संबंधी उम्मीदें, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और तेल की कीमतें चांदी की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं.
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