Advertisement
हिंदी न्यूज़यूटिलिटी

सोना 20% टूट चुका है, फिर भी एक्सपर्ट क्यों नहीं दे रहे 'ऑल इन' की सलाह? खरीदारी से पहले जान लें बड़ा संकेत

Should I buy gold now: जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद, वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में 20 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है और यह 4,500 डॉलर से नीचे गिर गई है. तो क्या आपको अभी सोना खरीदना चाहिए या यह सस्ता हो जाएगा? चलिए एक्सपर्ट की राय जानें.

Latest News
सोना 20% टूट चुका है, फिर भी एक्सपर्ट क्यों नहीं दे रहे 'ऑल इन' की सलाह? खरीदारी से पहले जान लें बड़ा संकेत

सोना गिरा, पर खरीदारी का फैसला क्यों मुश्किल? (फोटो एआई)

Add DNA as a Preferred Source

क्या सोने की कीमतों में आई गिरावट निवेश का सुनहरा मौका है या अभी और सस्ता होने का इंतजार करना चाहिए? यही सवाल इस समय लाखों निवेशकों के मन में घूम रहा है. जनवरी 2026 में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई है. ऐसे में कई लोग इसे खरीदारी का अवसर मान रहे हैं, जबकि बाजार विशेषज्ञ जल्दबाजी से बचने की सलाह दे रहे हैं. उनका मानना है कि कीमतों में आई मौजूदा गिरावट कहानी का अंत नहीं भी हो सकती है.

इतिहास क्या कहता है और निवेशकों को क्यों सतर्क रहना चाहिए?

बाजार के पुराने आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने ने हर बड़ी तेजी के बाद लंबा करेक्शन देखा है. जब भी कीमतों में असाधारण उछाल आया, उसके बाद कई महीनों या वर्षों तक दबाव बना रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में सोने में जो तेजी देखने को मिली, वह सामान्य नहीं थी. वैश्विक तनाव, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और निवेशकों की सुरक्षित संपत्ति की तलाश ने कीमतों को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया. अब वही कारक कमजोर पड़ते दिख रहे हैं. यही वजह है कि कुछ चार्ट विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा गिरावट के बाद भी बाजार में और नरमी देखने को मिल सकती है.

एक्सपर्ट की सबसे बड़ी सलाह: एकमुश्त निवेश से बचें

वित्तीय विशेषज्ञ हेमंत मनानी की राय में अगर कोई निवेशक केवल गिरावट देखकर पूरा पैसा सोने में लगा देता है तो यह जोखिम भरा फैसला हो सकता है. उनका सुझाव है कि निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें. यदि कीमतें और गिरती हैं तो औसत लागत कम करने का अवसर मिलेगा, और अगर बाजार पलटता है तो निवेश पहले से शुरू हो चुका होगा. यानी फिलहाल 'सब कुछ खरीद लो' वाली रणनीति के बजाय 'धीरे-धीरे खरीदो' वाला तरीका अधिक सुरक्षित माना जा रहा है.

सोने की मांग में कमजोरी क्यों चिंता बढ़ा रही है?

कीमतों का भविष्य केवल निवेशकों की भावना पर निर्भर नहीं करता. असली तस्वीर मांग और आपूर्ति तय करती है. हाल के महीनों में भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में सोने के आभूषणों की मांग कमजोर हुई है. ऊंची कीमतों ने उपभोक्ताओं को खरीदारी से पीछे हटने पर मजबूर किया है. इसके साथ ही गोल्ड ETF में निवेश की गति भी धीमी हुई है. जब मांग कमजोर पड़ती है तो कीमतों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है. यही कारण है कि कई विश्लेषक निकट भविष्य में तेज उछाल की उम्मीद नहीं कर रहे.

वो बातें जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए

सोने के बाजार में एक दिलचस्प पहलू यह है कि जब ज्यादातर लोग तेजी की उम्मीद छोड़ देते हैं, तब अक्सर लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बनना शुरू होता है. यदि वैश्विक तनाव फिर बढ़ता है, ब्याज दरों में कटौती होती है या वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता लौटती है, तो सोना दोबारा सुरक्षित निवेश के रूप में मजबूत हो सकता है. यानी अल्पकालिक कमजोरी और दीर्घकालिक संभावना-दोनों एक साथ मौजूद हैं.

आम निवेशक के लिए क्या है सही रणनीति?

अगर आपका लक्ष्य शादी, गहनों की खरीदारी या निकट भविष्य की जरूरत है, तो कीमतों में आई नरमी राहत की खबर हो सकती है. लेकिन अगर आप निवेश के नजरिए से सोना खरीदना चाहते हैं, तो विशेषज्ञ धैर्य रखने की सलाह देते हैं.

पूंजी का छोटा हिस्सा चरणबद्ध तरीके से निवेश करना, नियमित अंतराल पर खरीदारी करना और पोर्टफोलियो में संतुलन बनाए रखना फिलहाल अधिक समझदारी भरा कदम माना जा रहा है. सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर से काफी नीचे आ चुकी हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे आंख बंद करके खरीदारी का संकेत नहीं मान रहे. उनका मानना है कि बाजार अभी भी दिशा तलाश रहा है. ऐसे में घबराहट या लालच के बजाय संतुलित रणनीति अपनाना ही निवेशकों के लिए सबसे सुरक्षित रास्ता हो सकता है.

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से. 

Read More
Advertisement
Advertisement
Advertisement