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ट्रेन है या कांच की हवेली? छत से दिखता है आसमान, जानिए कहां चलती है ये भारतीय रेल और क्या है इसका किराया और रूट

Most scenic Glass Roof Train Journey in India: भारत में ऐसी ट्रेन यात्रा भी है जहां सफर के दौरान पहाड़, जंगल, घाटियां और बारिश से भरे वेस्टर्न घाट खिड़की से नहीं बल्कि लगभग चारों तरफ से नजर आते हैं. यशवंतपुर से मंगलुरु जाने वाली गोमटेश्वर एक्सप्रेस में विस्टाडोम कोच इस अनुभव को खास बनाता है.

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ट्रेन है या कांच की हवेली? छत से दिखता है आसमान, जानिए कहां चलती है ये भारतीय रेल और क्या है इसका किराया और रूट

पहाड़ों के बीच दौड़ती है ये कांच की ट्रेन, टिकट बुक करने से पहले जान लें पूरा रूट (फोटो एआई)

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  • कांच की छत वाला शानदार कोच
  • 358 किलोमीटर का खूबसूरत सफर
  • वेस्टर्न घाट के अद्भुत नजारे
  • टिकट किराया हजारों में नहीं
  • आईआरसीटीसी से टिकट बुकिंग संभव

भारत में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए कुछ रूट सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने का साधन नहीं हैं. यशवंतपुर से मंगलुरु के बीच चलने वाली गोमटेश्वर एक्सप्रेस का विस्टाडोम कोच इसी वजह से अलग है. कांच की बड़ी खिड़कियों और ग्लास रूफ की वजह से यह सफर किसी सामान्य ट्रेन यात्रा से ज्यादा एक चलती हुई ऑब्जर्वेशन गैलरी जैसा महसूस होता है.  

इस ट्रेन को खास बनाने वाली बात सिर्फ इसका कांच वाला डिजाइन नहीं है. असली आकर्षण वह रास्ता है जिससे होकर ट्रेन गुजरती है. खासकर हासन, सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड के बीच वेस्टर्न घाट का इलाका यात्रियों को जंगल, पहाड़, घाटियां और हरियाली के बेहद करीब ले आता है. 

विस्टाडोम कोच आखिर इतना खास क्यों है?

विस्टाडोम का मतलब सिर्फ बड़ी खिड़कियों वाला कोच नहीं है. इसका डिजाइन ही इस तरह तैयार किया गया है कि यात्री आसपास के प्राकृतिक नजारों को ज्यादा बेहतर तरीके से देख सकें. इस कोच में पैनोरमिक ग्लास विंडो और बड़ा ग्लास रूफ है, जिसकी वजह से ऊपर और दोनों तरफ का व्यू काफी हद तक दिखाई देता है.  

यानी सामान्य ट्रेन में जहां यात्री अक्सर खिड़की से बाहर देखने की कोशिश करता है, वहीं विस्टाडोम में देखने का एंगल काफी ज्यादा खुला हुआ मिलता है. यही वजह है कि बारिश, धुंध और हरियाली के मौसम में यह रूट खास तौर पर आकर्षक हो जाता है.

यशवंतपुर से मंगलुरु तक 358 किलोमीटर का सफर

गोमटेश्वर एक्सप्रेस का 16575 नंबर यशवंतपुर से मंगलुरु की तरफ जाता है, जबकि 16576 नंबर वापसी की दिशा में चलता है. उपलब्ध रेलवे किराया डेटा के मुताबिक मंगलुरु जंक्शन से यशवंतपुर जंक्शन की दूरी करीब 358 किलोमीटर है. ट्रेन के रेक में विस्टाडोम कोच भी शामिल है.  

इस यात्रा की सबसे खास तस्वीर हासन के बाद वाले हिस्से में देखने को मिलती है, जहां ट्रेन सकलेशपुर और सुब्रह्मण्य रोड की तरफ बढ़ती है. यह इलाका वेस्टर्न घाट की पहाड़ियों और हरियाली के लिए जाना जाता है. दिसंबर 2025 में सेवा दोबारा शुरू होने की जानकारी देते हुए साउथ वेस्टर्न रेलवे के हवाले से रिपोर्ट में भी इसी खूबसूरत रूट का जिक्र किया गया था.  

टिकट के लिए कितने पैसे खर्च होंगे?

विस्टाडोम की टिकट सामान्य सेकंड सिटिंग या एसी चेयर कार से महंगी होती है. एक उपलब्ध किराया विवरण में गोमटेश्वर एक्सप्रेस के विस्टाडोम एसी कोच का यशवंतपुर से मंगलुरु पूरा सफर लगभग 1575 रुपये बताया गया था. हालांकि किराया यात्रा की तारीख, बोर्डिंग स्टेशन और लागू शुल्क के अनुसार बदल सकता है, इसलिए बुकिंग के समय आईआरसीटीसी पर वास्तविक किराया देखना सबसे सही रहेगा.  

यही बात इस सफर को खास बनाती है. करीब 350 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा के लिए आपको किसी लक्जरी रिसॉर्ट का खर्च नहीं करना पड़ता, बल्कि ट्रेन के जरिए ही पहाड़ों और जंगलों के बीच लंबा सफर देखने का मौका मिलता है.

आईआरसीटीसी पर ऐसे करें टिकट की तलाश

भारतीय रेलवे की आधिकारिक पैसेंजर रिजर्वेशन व्यवस्था में ट्रेन नंबर, यात्रा की तारीख, स्रोत स्टेशन, गंतव्य स्टेशन और क्लास डालकर किराया और उपलब्धता देखी जा सकती है. भारतीय रेलवे के आधिकारिक फेयर इन्क्वायरी पेज पर भी ट्रेन नंबर और यात्रा से जुड़ी जानकारी भरकर किराया जांचने की सुविधा दी गई है.  

इसलिए अगर आप यह यात्रा प्लान कर रहे हैं तो सिर्फ ट्रेन का नाम देखकर टिकट बुक न करें. अपनी तारीख डालकर विस्टाडोम क्लास की उपलब्धता और उसी दिन का किराया जरुर चेक करें. खासकर वीकेंड और छुट्टियों में सीट मिलने की स्थिति अलग हो सकती है.

क्या यह सफर आपके पैसे वसूल कराएगा?

अगर आपका मकसद केवल एक शहर से दूसरे शहर पहुंचना है तो विस्टाडोम सबसे सस्ता विकल्प नहीं है. लेकिन अगर ट्रेन यात्रा को ही ट्रेवल एक्सपीरियंस बनाना चाहते हैं, तो मामला बदल जाता है.

इसका असली फायदा उन यात्रियों को मिलता है जो रास्ते को भी डेस्टिनेशन का हिस्सा मानते हैं. पहाड़ी रास्ते, बारिश, धुंध और वेस्टर्न घाट की हरियाली इस यात्रा को सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं रहने देते. यही वह छिपा हुआ फायदा है जिसकी वजह से सामान्य ट्रेन टिकट और विस्टाडोम टिकट के बीच का अंतर कई यात्रियों को सही लग सकता है.

यात्रा से पहले एक बात जरुर ध्यान रखें

विस्टाडोम कोच की सबसे बड़ी खासियत उसका व्यू है, इसलिए सीट उपलब्ध होने पर भी सिर्फ कोच देखकर खुश होने के बजाय यात्रा की तारीख और मौसम पर भी ध्यान देना चाहिए. मानसून और हरियाली के दौरान वेस्टर्न घाट का अनुभव अलग हो सकता है, जबकि साफ मौसम में दूर तक पहाड़ियों का नजारा ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकता है.

इसके अलावा खाने को टिकट में स्वत: शामिल मान लेना भी सही नहीं है. अलग-अलग ट्रेन और सर्विस में कैटरिंग व्यवस्था अलग हो सकती है, इसलिए बुकिंग के समय मिलने वाली जानकारी को जरुर देखना चाहिए. उपलब्ध रेलवे डेटा में गोमटेश्वर एक्सप्रेस के लिए ई-कैटरिंग की सुविधा यशवंतपुर और मंगलुरु जंक्शन पर उपलब्ध होने का उल्लेख है.  

मंजिल से ज्यादा रास्ते की याद रहते हैं

भारत की सबसे खूबसूरत ट्रेन यात्रा कहना एक राय हो सकती है, लेकिन यशवंतपुर से मंगलुरु के बीच गोमटेश्वर एक्सप्रेस का विस्टाडोम सफर निश्चित तौर पर उन रेल यात्राओं में शामिल है जहां ट्रेन से ज्यादा रास्ता आकर्षण बन जाता है. करीब 358 किलोमीटर के सफर में वेस्टर्न घाट के नजारे और कांच की छत वाला कोच इसे खास ट्रेवल एक्सपीरियंस बनाते हैं.  

अगर आप ऐसी यात्रा चाहते हैं जिसमें मंजिल से ज्यादा रास्ते की याद रहे, तो यह रूट आपकी ट्रेवल लिस्ट में जगह बना सकता है. टिकट बुक करने से पहले आईआरसीटीसी पर अपनी तारीख का किराया और विस्टाडोम सीट की उपलब्धता जरुर जांचें.  

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