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Success Story: क्या आपने कभी सोचा था कि गली-नुक्कड़ की पान की दुकान एक दिन कैफे स्टाइल ब्रांड में बदल सकती है? जिस पान को लंबे समय तक सिर्फ पारंपरिक खानपान का हिस्सा माना गया, वही आज करोड़ों के संगठित बिजनेस का आधार बन चुका है.
इस बदलाव के पीछे है एक ऐसा आइडिया, जिसने पान की पूरी छवि बदलने की कोशिश की. एक MBA ग्रेजुएट ने उस बाजार में अवसर देखा, जिसे ज्यादातर लोग पुराना और सीमित मानकर नजरअंदाज कर रहे थे. नतीजा यह हुआ कि एक छोटे से प्रयोग ने देश के सबसे तेजी से बढ़ते पान ब्रांड्स में अपनी जगह बना ली.
जब एक साधारण पान की दुकान में दिखा बड़ा बिजनेस अवसर
भारत में पान सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि संस्कृति और परंपरा का हिस्सा रहा है. शादी-ब्याह, त्योहार, पूजा-पाठ और मेहमाननवाजी में पान की अपनी अलग जगह है. इसके बावजूद पान का कारोबार लंबे समय तक असंगठित ही बना रहा.
इसी क्षेत्र में अवसर तलाशते हुए पी. एन. ठाकुर ने एक अलग सोच के साथ काम शुरू किया. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से मार्केटिंग और इंटरनेशनल बिजनेस में MBA करने वाले ठाकुर ने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान टाइम्स से की थी. ब्रांडिंग और उपभोक्ता व्यवहार की समझ ने उन्हें यह महसूस कराया कि पान के बाजार में बदलाव की काफी गुंजाइश है.
तीन साल तक रिसर्च, फिर शुरू हुआ नया सफर
किसी भी बड़े ब्रांड की तरह इस कहानी की शुरुआत भी तैयारी से हुई. कंपनी की कहानी के अनुसार, पी. एन. ठाकुर ने देशभर की पान दुकानों को करीब से समझा और महसूस किया कि यह उद्योग वर्षों से लगभग एक जैसा बना हुआ है.
उन्होंने देखा कि साफ-सफाई की कमी, पुराने तरीके से प्रस्तुति और पान को लेकर बनी धारणाएं इसकी पहुंच को सीमित कर रही हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने लगभग तीन साल रिसर्च और डेवलपमेंट पर काम किया. साल 2016 में नोएडा से शुरू हुई इस पहल का मकसद साफ था—पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए पान को आधुनिक ग्राहकों के लिए नए अंदाज में पेश करना.
तंबाकू-फ्री रणनीति ने बदल दी पूरी पहचान
ब्रांड की सबसे बड़ी खासियत 100 प्रतिशत तंबाकू-फ्री पान को बनाया गया. यह फैसला सिर्फ प्रोडक्ट बदलने का नहीं था, बल्कि ग्राहकों की सोच बदलने का प्रयास भी था.
जहां पारंपरिक पान को अक्सर तंबाकू और गुटखा संस्कृति से जोड़कर देखा जाता था, वहीं यहां पान को डेजर्ट और प्रीमियम फूड एक्सपीरियंस के रूप में पेश किया गया. यही कारण है कि परिवारों, महिलाओं और युवाओं के बीच इसकी स्वीकार्यता बढ़ी. एक तरह से देखा जाए तो ब्रांड ने पान को खानपान की पुरानी श्रेणी से निकालकर लाइफस्टाइल कैटेगरी में लाने की कोशिश की.
30 रुपये से 2100 रुपये तक, हर ग्राहक के लिए विकल्प
कंपनी ने अपने मेन्यू को भी अलग पहचान दी. यहां आम ग्राहकों के लिए 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक के पान उपलब्ध हैं, जबकि शादियों और विशेष आयोजनों के लिए 2100 रुपये तक के प्रीमियम पान भी पेश किए जाते हैं.
युवा ग्राहकों के बीच नए स्वाद और अनोखे फूड एक्सपीरियंस की बढ़ती मांग ने इस मॉडल को तेजी से लोकप्रिय बनाया. यही वजह है कि ब्रांड सिर्फ पान बेचने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक अनुभव बेचने वाला बिजनेस बन गया.
फ्रेंचाइजी मॉडल ने दिलाई देशभर में पहचान
एक सफल आइडिया तब बड़ा बनता है जब वह तेजी से विस्तार कर सके. मस्त बनारसी पान ने इसी रणनीति पर काम किया और फ्रेंचाइजी मॉडल के जरिए देशभर में अपनी मौजूदगी बढ़ाई. आज कंपनी के 400 से अधिक आउटलेट संचालित हो रहे हैं. वहीं भारत के 20 राज्यों के 320 से ज्यादा शहरों में इसकी पहुंच बताई जाती है. कंपनी के अनुसार, हर दिन लगभग एक लाख पान बेचे जाते हैं.
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Swiggy और Zomato के साथ साझेदारी ने भी शहरी बाजारों में इसकी पकड़ मजबूत करने में मदद की है. इसके अलावा निजी और कॉर्पोरेट आयोजनों में भी कंपनी अपनी सेवाएं उपलब्ध करा रही है.
इस सफलता की कहानी से क्या सीख मिलती है?
यह कहानी सिर्फ पान बेचने की नहीं है, बल्कि उस सोच की है जो किसी पारंपरिक कारोबार को नए दौर के हिसाब से बदल सकती है. जहां अधिकांश लोग एक पुराने बिजनेस मॉडल को देखकर आगे बढ़ जाते हैं, वहीं कुछ लोग उसी में नया अवसर खोज लेते हैं.
मस्त बनारसी पान की यात्रा यह दिखाती है कि सही ब्रांडिंग, ग्राहकों की जरूरतों की समझ और लगातार नवाचार किसी भी पारंपरिक उत्पाद को आधुनिक बाजार में नई पहचान दिला सकते हैं.
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