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Jaya Pandey | May 08, 2026, 02:57 PM IST
1.अलग-अलग रंग की दूध के पैकेट के क्या हैं मायने?

भारत में दूध का इस्तेमाल लगभग हर दिन होता है. कहीं लोग इसे पीते हैं तो कहीं चाय या दूसरे व्यंजन में इसका उपयोग किया जाता है. दूध का पैकेट खरीदते वक्त आपने अलग-अलग रंगों को देखा होगा. कहीं नीला पैकेट होता है, कहीं हरा, कहीं ऑरेंज या पीला. कई घरों में तो लोग सीधे 'नीला वाला दूध' या 'हरा पैकेट' बोलकर ही दूध मंगाते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन रंगों का मतलब क्या होता है?
(Image: AI Generated)
2.दूध में मौजूद फैट की मात्रा से है पैकेट की रंग का नाता

दरअसल, दूध के पैकेट के रंग का सीधा संबंध दूध में मौजूद फैट की मात्रा से होता है. आसान शब्दों में कहें तो पैकेट का रंग यह बताता है कि दूध कितना हल्का, कितना गाढ़ा या कितना क्रीमी है. भारत में दूध की गुणवत्ता और लेबलिंग के नियम FSSAI तय करता है हालांकि, पैकेट पर कौन-सा रंग इस्तेमाल होगा, इसका कोई तय नियम नहीं है.
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3.कलर कोडिंग क्यों फॉलो करती हैं कंपनियां?

अलग-अलग डेयरी ब्रांड अपनी पैकेजिंग डिजाइन खुद तय करते हैं. लेकिन कई साल से कुछ रंगों का इस्तेमाल लगभग एक सामान्य पहचान बन चुका है. इसी वजह से ज्यादातर डेयरी कंपनियां एक जैसी कलर कोडिंग फॉलो करती हैं जिससे ग्राहक आसानी से दूध पहचान सकें. आमतौर पर नीले रंग का पैकेट टोंड मिल्क के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इसमें करीब 3 प्रतिशत फैट होता है. यह दूध रोजमर्रा की चाय, कॉफी और सामान्य इस्तेमाल के लिए सबसे ज्यादा खरीदा जाता है.
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4.पीले, लाल, हरे रंग के दूध के पैकेट

हरे रंग का पैकेट अक्सर स्टैंडर्डाइज्ड मिल्क को दिखाता है. इसमें फैट की मात्रा लगभग 4.5 प्रतिशत होती है. यह थोड़ा ज्यादा गाढ़ा और स्वाद में क्रीमी होता है. वहीं ऑरेंज, पीले या लाल रंग का पैकेट आमतौर पर फुल क्रीम मिल्क के लिए इस्तेमाल होता है. इसमें करीब 6 प्रतिशत फैट होता है. यह दूध बच्चों, मिठाई बनाने और दही या पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स के लिए पसंद किया जाता है. कुछ कंपनियां डबल टोंड मिल्क के लिए हल्का नीला या मैजेंटा रंग भी इस्तेमाल करती हैं. इसमें फैट बहुत कम होता है.
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5.हरे रंग के दूध के पैकेट के मायने

मिल्क पैकेट का रंग दूध की गुणवत्ता तय नहीं करता. कई लोगों को लगता है कि गहरे रंग वाले पैकेट के अंदर अच्छा वाला दूध है, जबकि असल में ऐसा कुछ नहीं होता. पैकेट का रंग सिर्फ दूध के प्रकार और फैट लेवल की पहचान है. कौन-सा दूध बेहतर है? यह पूरी तरह व्यक्ति की जरूरत पर निर्भर करता है. जो लोग कम फैट वाला दूध चाहते हैं, वे टोंड या डबल टोंड दूध लेते हैं, जबकि ज्यादा क्रीमी स्वाद पसंद करने वाले लोग फुल क्रीम मिल्क चुनते हैं.
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6.बिना पढ़े सही दूध खरीद सकता है ग्राहक

डेयरी कंपनियां रंगों का इस्तेमाल इसलिए भी करती हैं क्योंकि दूध ऐसा प्रोडक्ट है जिसे लोग रोज खरीदते हैं और खरीदते समय ज्यादातर ग्राहत पैकेट पढ़ना नहीं चाहते. सुपरमार्केट या डेयरी शॉप में एक ही ब्रांड के कई तरह के दूध एक-साथ रखे होते हैं. ऐसे में रंग तुरंत पहचानने के काम आते हैं. इससे ग्राहक बिना लेबल पढ़े कुछ सेकंड में सही पैकेट चुन लेता है. इसी वजह से यह कलर सिस्टम भारत में बेहद लोकप्रिय हो गया है.
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