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देश में करोड़ों लोग आयुष्मान कार्ड योजना का लाभ ले रहे हैं. इस योजना में आने वाले व्यक्ति को किसी भी प्राइवेट अस्पताल में 5 लाख रुपये तक का फ्री इलाज मिलता है.
अगर आप आयुष्मान कार्ड धारक हैं और प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने जा रहे हैं तो भर्ती होने से पहले उसका एम्पैनलमेंट स्टेटस जरूर देख लें. इसकी वजह सरकार द्वारा देशभर में 3500 से भी ज्यादा अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड की सूची से बाहर करना है. इसकी वजह आयुष्मान कार्ड भारत योजना के तहत इन अस्पतालों द्वारा फर्जीवाड़ा कर फर्जी बिल और लोगों के इलाज के नाम पर सरकार से पैसा वसूलना है. इसके चलते सरकार ने इन अस्पतालों को सूची से बाहर कर दिया है.
सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के तहत चल रहे बड़े फर्जीवाड़े और फर्जी बिलिंग के खेल पर अब तक का सबसे बड़ा धावा बोला है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, नियमों की अनदेखी करने वाले 2,359 अस्पतालों को योजना की सूची (De-empanelled) से हमेशा के लिए बाहर कर दिया गया है, जबकि 1,200 अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है. यानी, देश के कुल 3550 से ज्यादा अस्पतालों में अब आयुष्मान कार्ड के जरिए 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज नहीं मिलेगा. अगर आप बिना जांचे-परखे इन अस्पतालों में चले गये, तो आपको पूरा खर्च अपनी जेब से ही देना पड़ेगा.
इस पूरी कार्रवाई में सबसे दिलचस्प और छिपा हुआ पहलू यह है कि इस बार अस्पतालों की पोल किसी इंसानी रेड या शिकायत से नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) ने खोली है. नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने ऐसा ऑटोमेटेड सिस्टम तैयार किया है, जो अस्पताल द्वारा क्लेम अपलोड करते ही 24 घंटे के अंदर संदिग्ध पैटर्न को पकड़ लेता है.
आयुष्मान कार्ड पर सरकार से पैसा पाने के लिए इन अस्पतालों ने नकली मरीज और फर्जी ऑपरेशन कर बिल लगा दिये. इतना ही नहीं, एक ही आयुष्मान कार्ड का दो दा बार इस्तेमाल किया गया. अस्पतालों का यह बिल पास भी हो गया, लेकिन एआई सिस्टम ने अस्पतालों का यह फर्जीवाड़ा पकड़ लिया. इसी के चलते सरकार 676 करोड़ रुपये की चपत खाने से बच गई. सरकार ने फर्जी दावे करने वाले अस्पतालों पर 328.49 करोड़ का भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ 29 अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई है.
सरकार की इस कार्रवाई का असर फर्जी अस्पतालों के साथ ही उन मरीजों पर भी पड़ सकता है, जो लंबे समय से किसी विशेष निजी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे या सर्जरी की तारीख ले चुके थे. अस्पताल प्रबंधन अक्सर सस्पेंशन या डि-एम्पैनलमेंट की जानकारी मरीजों को तुरंत नहीं देते, जिससे डिस्चार्ज के समय अचानक बड़ा बिल थमा दिया जाता है. ऐसी स्थिति में अस्पताल का आयुष्मान कार्ड की सूची में नाम होने पर ही उसमें इलाज कराये.
अब आप घर बैठे अस्पताल का पूरा स्टेट्स जांच सकते हैं. यानी वह आयुष्मान योजना में एम्पैनलमेंट है या नहीं. इसके लिए सबसे पहले अपने मोबाइल और कंप्यूटर से NHA की आधिकारिक साइट पर जाये. इसके बाद pmjay.gov.in पर जाकर एम्पैनल्ड अस्पतालों की लिस्ट देखें. इसके अलावा अस्पताल के हेल्पडेस्क पर मौजूद 'आयुष्मान मित्र' से यह लिखित या स्पष्ट रूप से पूछें कि क्या आज की तारीख में उनका कार्ड यहां कैशलेस मान्य है. इमरजेंसी में सावधानी बरतें. ऐसी स्थिति सिर्फ सरकारी या पूरी तरह से प्रमाणित (Active) प्राइवेट अस्पतालों में ही इलाज कराये.