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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन सिर्फ पर्यावरण के लिहाज से ही बेहतर नहीं है बल्कि यह किराए के हिसाब से भी आम आदमी को काफी सुकून देने वाली है. जानें इस ट्रेन से सफर के लिए आपको कितने रुपये खर्च करने पड़ेंगे...
इंडियन रेलवे ने एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. खास बात यह है कि यह ट्रेन सिर्फ पर्यावरण के ही अनुकूल नहीं है बल्कि इसका किराया भी आम आदमी की जेब पर बोझ नहीं डालेगा.
यह हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच लगभग 90 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग पर चलेगी. 10 कोच वाली यह ट्रेन करीब दो घंटे में अपनी यात्रा पूरी करेगी. रास्ते में इसके 11 स्टेशन होंगे और इसकी प्रतिदिन लगभग 2,600 यात्रियों के सफर करने की क्षमता होगी.
इस हाइड्रोजन ट्रेन का प्रमुख मार्ग जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत के बीच रहेगा. इस दौरान यह जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा हॉल्ट, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी हॉल्ट, बुटाना हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, रभड़ा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहाना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू स्टेशन पर भी रुकेगी.
रेलवे के टाइम टेबल के मुताबिक, ट्रेन संख्या 74010 जींद से सुबह 7:40 बजे रवाना होगी और लगभग दो घंटे का सफर तय करने के बाद सुबह 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी. वहीं वापसी में ट्रेन संख्या 74009 सोनीपत से सुबह 10:40 बजे निकलेगी और दोपहर करीब 1:00 बजे जींद पहुंचेगी.
यह ट्रेन हफ्ते में सातों दिन सोमवार से रविवार तक नियमित रूप से चलेगी. सोनीपत से जींद की ओर आने वाली यात्रा के दौरान ट्रेन सोनीपत न्यू, बरवासनी, मोहाना, लाठ, रभड़ा, गोहाना, खंडराई, बुटाना, ईशापुर खेड़ी, भंभेवा, ललित खेड़ा, पांडु पिंडारा और जींद सिटी स्टेशन पर रुकते हुए जींद जंक्शन पहुंचेगी.
इस ट्रेन की एक और खास बात इसका किराया है. इसका न्यूनतम किराया 5 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 25 रुपये तक रखा गया है. इसका मतलब है कि इस ट्रेन से सफर रेलवे स्टेशनों पर मिलने वाले प्लेटफॉर्म टिकट से भी कम होगा. जींद से सोनीपत जाने के लिए यात्रियों को सिर्फ 25 रुपये ही खर्च करने पड़ेंगे.
यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्निक पर आधारित है. पारंपरिक डीजल ट्रेनों के अलग यह ट्रेन चलने के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड या कोई और प्रदूषित गैस नहीं छोड़ता. हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के केमिकल प्रोसेस से बिजली तैयार होती है और इसी बिजली से यह ट्रेन संचालित होती है. इस प्रोसेस से सिर्फ पानी निकलता है और इस वजह से ही इसे जीरो-एमिशन ट्रेन कहा जा रहा है.
इस ट्रेन के संचालन के लिए ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति जींद में बने हाइड्रोजन प्लांट्स से की जाएगी. रेलवे ने इस प्रोजेक्ट में सभी जरूरी आधुनिक सुरक्षा मानकों का भी पूरा ध्यान रखा है.
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हाइड्रोजन ट्रेन टेक्निक का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में पहले से किया जा रहा है. जर्मनी इस टेक्निक को कॉमर्शियल लेवल पर अपनाने वाला पहला देश है. इसके अलावा यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली और अमेरिका जैसे देशों में भी हाइड्रोजन ट्रेनों का टेस्टिंग की जा चुकी है और इनमें से कई देशों में हाइड्रोजन ट्रेनों का संचालन भी हो रहा है. अब भारत भी दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जो ट्रेनों में हाइड्रोजन फ्यूल सेल टेक्निक का इस्तेमाल कर रहे हैं.