यूटिलिटी
अभी तक ईपीएफओ ईपीएफओ से जुड़े नौकरीपेशा कर्मचारियों की वेज लिमिट 15 हजार रुपये थे. इसमें 10 हजार रुपये बढ़ाकर जल्द ही 25000 रुपये किया जा सकता है. ऐसे में ईपीएफओ के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या तो बढ़ेंगी ही, साथ ही उनका रिटायरमेंट सिक्योर हो जाएगा.
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े नौकरीपेशा लोगों के लिए आज एक बड़ा फैसला आ सकता है. इसकी वजह केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में आज ईपीएफ एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम में वेज लिमिट को लेकर फैसला लिया जाएगा. इसे 12 साल से तय 12000 हजार रुपये बढ़ाकर 25000 रुपये प्रति महीने का करने प्रस्ताव पर चर्चा होगी. अगर सभी की सहमति हुई तो इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा. इसका करोड़ों नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी पर सीधाा असर पड़ेगा. आइए जानते हैं कि वेज लिमिट में होने वाला ये बदलाव आपके बैंक खाते, आपकी सेविंग और आपके भविष्य पर किस तरह से प्रभाव डाल सकता है.
आज से 12 साल पूर्व 1 सितंबर 2024 को सरकार ने पीएफ की अनिवार्य सीमा 15,000 रुपये तय की थी. तब से लेकर आज तक, जिनकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये तक थी, उनके लिए पीएफ कटना अनिवार्य था, लेकिन क्या आज के समय में इस रकम से घर चलाना मुमकिन है. पिछले कुछ सालों में ही महंगाई आसमान छू चुकी है, लेकिन यह ईपीएफओ का यह नियम वहीं का वहीं अटका हुआ था. इसी में फेरबदल की प्रक्रिया चल रही है.
इस पुरानी सीमा की वजह से 15,000 रुपये से ज्यादा कमाने वाले कर्मचारी सोशल सिक्योरिटी के दायरे से बाहर हो रहे थे. उन्हें लग रहा था कि उनकी नौकरी सुरक्षित है, लेकिन रिटायरमेंट के वक्त हाथ में आने वाला फंड बहुत छोटा रह जाता था. ऐसे में सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर 15,000 से सीधे 25,000 रुपये करने की तैयारी में है, जैसे ही यह नियम लागू होगा. 15,000 से 25,000 रुपये के बीच बेसिक सैलरी पाने वाले कर्मचारी भी पीएफ के दायरे में आ जाएंगे. हालांकि इसका प्रभाव उनकी इन हैंड सैलरी पर भी पड़ेगा. उनकी इन हैंड सैलरी कम हो सकती है, लेकिन पीएफ में जमा होने वाला पैसा आपके भविष्य को सुरक्षित कर सकता है.
कम सैलरी हाथ में आने का दुख तो होगा, लेकिन इसका दूसरा बड़ा और मजबूत फायदा है, जब आपकी बेसिक सैलरी का बड़ा हिस्सा हर महीने पीएफ और पेंशन (EPS) में जमा होगा, तो आपका रिटायरमेंट फंड तेजी से बढ़ेगा, जब आप काम करना बंद करेंगे, तब यही बढ़ा हुआ पैसा एक मोटे कॉर्पस फंड और बेहतर पेंशन के रूप में आपके काम आएगा. यह एक तरह की जबरदस्ती की गई बचत है, जो मुश्किल समय में आपके और आपके परिवार के लिए सबसे बड़ा सहारा बनती है.
इस फैसले से सिर्फ कर्मचारियों की जेब पर असर नहीं पड़ेगा, बल्कि कंपनियां भी इसकी हिसाब मिलाने में जुटी हैं. इस नियम के अनुसार, जितना पैसा कर्मचारी अपनी सैलरी से कटवाते हैं, उतना ही योगदान कंपनी को भी देना होता है. ऐसे में जब ज्यादा कर्मचारियों की सीमा 25,000 रुपये होगी, तो कंपनियों को भी ज्यादा पैसा पीएफ में डालना पड़ेगा. इससे कई इंडस्ट्रीज खासकर लेबर-इंटेंसिव सेक्टर का पेरोल खर्च बढ़ जाएगा. हालांकि कई कंपनियां इसे अपने स्ट्रक्चर में एडजस्ट करने के तरीके ढूंढ रही हैं.
आज ईपीएफओ के साथ ही दो और प्रमुख मुद्दों पर सरकार की मुहर लग सकती है. इनमें पहला देश में डिजिट डेटा की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया का गठन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है. इसके साथ ही डिजिटल कम्युनिकेशन कमीशन को खत्म करने के प्रस्ताव पर भी कैबिनेट में विचार किया जा सकता है.