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RSCWS का कहना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में भत्ते जरूरी हैं, लेकिन सैलरी स्ट्रक्चर में भत्तों का बड़ा हिस्सा पेंशन कैलकुलेशन को प्रभावित कर सकता है. उनका कहना है कि कई भत्ते ऐसे हैं, जिन्हें पेंशन में शामिल नहीं किया जाता है.
आठवां वेतन आयोग अगले कुछ दिनों में दिल्ली में कर्मचारी संगठनों, महासंघों और यूनियनों के साथ मीटिंग करेगा. 7 से 10 अगस्त तक होने वाली इन मीटिंग्स में कर्मचारी संगठन के साथ आयोग फिटमेंट फैक्टर और सैलरी हाइक जैसे जरूरी मुद्दों पर बात करेगा. ऐसे में हर मीटिंग पर सरकारी कर्मचारियों की निगाहें टिकी हैं. इस बीच पेंशन को लेकर एक संगठन ने खास डिमांड वेतन आयोग के सामने रखी है और अगर इस पर आयोग की मुहर लग गई तो करोड़ों सरकारी कर्मचारियों को बड़ा लाभ मिलेगा.
रेलवे सीनियर सिटिजंस वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने पे कमीशन को एक मेमोरेंडम भेजा है, जिसमें उन्होंने पेंशनर्स की ओर से उठाई गई प्रमुख शिकायतों के बारे में बताया है. संगठन ने सैलरी स्ट्रक्चर में बहुत ज्यादा भत्तों के बजाय बेसिक सैलरी को मजबूत करने की मांग की है, ताकि रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों को फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिल सके.
RSCWS की मुख्य डिमांड यही है कि सैलरी स्ट्रक्चर में बहुत ज्यादा भत्तों को शामिल करने के बजाय बेसिक सैलरी को बढ़ाया जाए क्योंकि रिटायरमेंट के बाद बेसिक सैलरी के आधार पर ही कर्मचारियों को पेंशन मिलती है. संगठन का कहना है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में भत्ते जरूरी हैं, लेकिन सैलरी स्ट्रक्चर में भत्तों का बड़ा हिस्सा पेंशन कैलकुलेशन को प्रभावित कर सकता है. उनका कहना है कि कई भत्ते ऐसे हैं, जिन्हें पेंशन में शामिल नहीं किया जाता है.
मेमोरेंडम में वेतन आयोग को सलाह दी गई है कि बेसिक सैलरी और भत्तों में बैलेंस रखा जाए, ताकि इससे कर्मचारियों की पेंशन पर कोई असर न पड़े और उन्हें रिटायरमेंट के बाद इसका कोई नुकसान न हो, बल्कि नौकरी छोड़ने के बाद उनको फाइनेंशियल सिक्योरिटी मिले. उनका तर्क है कि हाउसिंग, ट्रांसपोर्टेशन और हेल्थकेयर जैसे भत्तों का लाभ रिटायरमेंट के बाद भी कर्मचारियों को मिलता है, लेकिन कई ऐसे भत्ते हैं, जो रिटायरमेंट के बाद नहीं मिलते, जिसकी वजह से बेसिक सैलरी में कमी होती है और रिटायर होने के बाद ये पैसा कर्मचारी को नहीं मिलता.
RSCWS ने रिमोट एरिया और कठिन परिस्थितयों में काम करने वाले कर्मचारियों का भी मुद्दा वेतन आयोग के सामने उठाया. उन्होंने कहा कि सातवें वेतन आयोग में कई भत्तों को हटाया और कुछ नयों को शामिल किया गया, लेकिन इसकी वजह से खतरनाक और कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों में चिंताएं बढ़ गईं इसलिए आठवें वेतन आयोग में उनकी चिंताओं को ध्यान में रखा जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे कर्मचारियों को उचित मुआवजा मिले.
मेमोरेंडम में हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए और ट्रांसपोर्ट भत्तों की समीक्षा करने की भी मांग की गई है. उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच इन भत्तों पर भी ध्यान देना जरूरी है. इसके अलावा, RSCWS ने मांग की है कि भत्तों का स्ट्रक्चर साधाराण, पारदर्शी और आवश्यकताओं पर आधारित होना चाहिए.
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